Thursday, April 30, 2026
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एक शिवलिंग जो 364 दिन नही दिखता,सिर्फ शिवरात्रि को प्रकट होता है

आश्चर्यजनक विश्व के लिए

कामाख्या देवी मंदिर परिसर के कुंड में स्थित ये शिवलिंग महाशिवरात्रि को आता है बाहर.

कामख्या (असम): असम के कामाख्या मंदिर के अंदर इस ‘शिवलिंग’ के बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी हैं जो साल में सिर्फ एक दिन के लिए ऊपर सतह पर आता है. और फिर सालभर, यह ‘शिवलिंग‘ पानी के नीचे रहता है. गुवाहाटी में नीलांचल पहाड़ियों पर स्थित श्रद्धेय कामाख्या मंदिर में आने वाले अधिकांश लोग मंदिर परिसर में इस ‘शिवलिंग’ के अस्तित्व से अनजान हैं. कामाख्या मंदिर कार्यालय के पीछे ‘रिन मुसन कुंड’ (पाप धोने वाला तालाब) और इस तालाब के ठीक नीचे, जिसे “मारा कुंड” भी कहा जाता है, श्रद्धेय ‘शिवलिंग’ है. 364 दिनों के लिए हर साल इस कुंड में पानी भरा रहता है, लेकिन शिवरात्रि के एक दिन पहले, कुंड का पानी बाहर निकाला जाता है, जिससे भक्तों के दर्शन लिए ‘शिवलिंग’ प्रकट होता है.

पापनाशक कुंड
चट्टानों और पत्थरों से बनी सीढ़ियां 30-35 फीट गहरे इस कुंड की ओर ले जाती हैं जहां भक्त प्रार्थना करते हैं. कई लोग इस ‘शिवलिंग’ को ‘पिनाकेश्वर‘ और ‘पेनेस्वर‘ कहते हैं. मंदिर के अधिकारी बताते हैं कि ये कुंड लोगों के पाप का नाश करता है जिसके वजह से इसे रिन मुसन कुंड (पाप धोने वाला तालाब) कहा जाता है. जहां श्रद्धालु बताते हैं कि इसके प्रति रहस्मयी जुड़ाव महसूस करते हैं वहीं स्थानीय लोगों ने बताया कि ये विशेष शिवलिंग कामख्या मंदिर के अस्तित्व में आने के समय से यहां मौजूद है.

ज्योतिर्लिंग विवाद पर बोले CM हिमंता
उधर, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, रविवार को कामरूप के पमोही में भीमाशंकर धाम ज्योतिर्लिंग मंदिर का दौरा किया. उन्होंने महाराष्ट्र के विपक्षी पार्टियों के उस बयान को नकार दिया है जिसमे कहा गया था कि छठवें ज्योतिर्लिंग उनके यहां है न की असम में है. उन्होंने अपने बयान में कहा कि ‘भीमाशंकर की स्थापना मैंने नहीं की है. शिवपुराण के अनुसार भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग असम में है. भीमाशंकर युगों से यहां हैं और शिव पुराण के 20वें और 21वें अध्याय में इसका उल्लेख है.’ उन्होंने अपने बयान में महाराष्ट्र के विपक्ष और उद्धव नीत शिवसेना को जमकर लताड़ा.
छठा ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर
दरअसल, असम में 12 ज्योतिर्लिंगों में छठे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के अस्तित्व का दावा करने वाले असम सरकार के एक विज्ञापन के बाद एक विवाद छिड़ गया है. इसके बाद महाराष्ट्र में लोगों और राजनेताओं ने इसपर तीखी प्रतिक्रियाओं व्यक्त की है क्योंकि पुणे में भीमाशंकर मंदिर को आमतौर पर छठा ज्योतिर्लिंग माना जाता है. लेकिन मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया है, ‘मैंने पुणे में भीमाशंकर मंदिर का दौरा किया है, लेकिन हमारा मानना है कि छठा ज्योतिर्लिंग कामरूप की डाकिनी पहाड़ियों में है और रुद्र संहिता में भी इसका उल्लेख है.’

शिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं की बाढ़
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, गुवाहाटी के बाहर जगलों में स्थित है, जहां शिवरात्रि पर भक्तों का जमवाड़ा लगता है. लेकिन हाल के वर्षों में उपहास के शिकार यह शिवमंदिर तब सुर्ख़ियों में आया जब, असं सरकार ने इसे छठा ज्योतिर्लिंग होने का दावा किया. इस शिवरात्रि मानों जैसे श्रद्धालुओं का यहां बाढ़ आ गया हो. लोकल, राज्य के और राज्य से बाहर के भी श्रद्धालु इस शिवरात्रि भगवान शिव के दर्शन के लिए कतारों में खड़े थे.

 

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