Thursday, April 30, 2026
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कांग्रेस गठबंधन शासित सरकार में जिहादियों का तांडव,भिखमंगो ने लूटी दुकाने,लगाई आग,अगड़े पिछड़े,ब्राह्मण,ठाकुर,बनिये,जाति जनजाति, सब पर बराबरी से पथराव

झारखंड में पलामू के पांकी बाजार में महाशिवरात्रि के लिए लगाए गए तोरण द्वार के कारण बुधवार को विवाद हो गया। दो पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई। मस्जिद से पत्थर फेंके गए, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने मस्जिद पर पत्थर चलाए। कई दुकानों में तोड़फोड़ की गई। पथराव में कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है।

पांकी में धारा 144 लगा दी गई है और इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। झारखंड सरकार के गृह विभाग ने टेलीकॉम कंपनियों को आदेश दिया कि 16 फरवरी के शाम चार बजे तक इंटरनेट सेवा बंद रखें।

कमलेश सिंह ने दावा किया कि हिन्दुओं पर पेट्रोल बम और पत्थर मस्जिद की छत से फेंके जा रहे थे। कमलेश सिंह ने हमें बताया, “न तो आज जुमा था और न ही उस क्षेत्र में मुस्लिमों की इतनी आबादी। न ही घटना का समय किसी नमाज या कार्यक्रम का था, फिर हमलावरों की इतनी भीड़ आई कहाँ से।” उन्होंने इस घटना को सुनियोजित बताया।
झारखंड पलामू सांप्रदायिक हिंसा
झारखंड के पलामू में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट (जमा मस्जिद फाइल फोटो)

झारखंड के पलामू जिले (Palamu, Jharkhand) में बुधवार (15 फरवरी 2023) को महाशिवरात्रि के लिए तोरणद्वार लगा रहे श्रद्धालुओं पर जमकर पथराव और आगजनी की गई। इस झड़प में लगभग 1 दर्जन लोग घायल हो गए। घायल होने वालों में पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटनास्थल पांकी बाजार में मौजूद एक मस्जिद के पास का बताया जा रहा है।

इलाके में तनाव को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही इलाके में धारा 144 लगा दी गई है और इंटरनेट को बंद कर दिया गया है। पुलिस ने फिलहाल हालात के काबू में होने का दावा किया है। ऑपइंडिया ने इस मामले में स्थानीय लोगों से बात करके मौजूदा हालातों की जानकारी ली।

पलामू हिंसा को लेकर जिस तरह की नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है, उसमें मुस्लिमों को पीड़ित और पीड़ित हिंदुओं को गुंडा साबित करने की कोशिश की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट में स्पष्ट कहा जा रहा है कि महाशिवरात्रि को लेकर पलामू के पांकी के हिंदू तैयारी कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने चौक पर तोरणद्वार बनाया था। चौक के पास ही मस्जिद स्थित है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जामा मस्जिद के नाम से पहचाने जाने वाली यह मस्जिद हिंदुओं के सहयोग से ही बनाई गई है। लोगों का कहना है कि यह मस्जिद ज्यादा पुरानी भी नहीं है और ना ही आसपास के इलाके में मुस्लिमों की इतनी जनसंख्या है। जहाँ मस्जिद बनाई गई है, वह इलाका हिंदू बहुल है।

तोरणद्वार बनाने के बाद मस्जिद से कुछ मुस्लिम निकल कर आए और इस द्वार को हटाने के लिए कहने लगे। उनका कहना था कि पास में मस्जिद है और मस्जिद के पास तोरणद्वार नहीं बना सकते। इसके लिए हिंदू पक्ष राजी नहीं हुआ और कहा कि वे तोरणद्वार सड़क पर बना रहे हैं, जो कि सरकारी संपत्ति है।

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