कांग्रेस नेतृत्व झुक गया सारे बनाये नियम कचरे में
एक तरफ परिवारवाद कांग्रेस के पतन का कारण बन रही है वहीं पार्टी इससे सबक लेने को तैयार नहीं है। हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए पार्टी ने 46 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में परिवारवाद की छाप साफ देखने को मिल रही है। इसमें से 13 उम्मीदवार राजनीतिक घरानों से संबंध रखते हैं। देश की सबसे पुरानी पार्टी पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे है और अब यह साबित भी हो रहा है कि पार्टी परिवारवाद को छोड़ने वाली नहीं है। इस सूची में हिमाचल प्रदेश के छह बार के मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के बेटे और शिमा ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के मौजूदा विधायक विक्रमादित्य सिंह, जुब्बल-कोठकई निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व मुख्यमंत्री राम लाल ठाकुर के बेटे रोहित ठाकुर का नाम भी शामिल है।
कांग्रेस की इस लिस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री राम लाल ठाकुर के बेटे रोहित ठाकुर का नाम शामिल है। इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी ने कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर को मण्डी से, पूर्व मंत्री पंडित संत राम के बेटे सुधीर शर्मा को धर्मशाला से, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल के बेटे आशीष बुटेल को पालमपुर से, पूर्व मंत्री जी.एस. बाली के बेटे रघुवीर सिंह बाली को नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया है। कसौली से पूर्व सांसद केडी सुल्तानपुरी के बेटे विनोद सुल्तानपुरी को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा पूर्व मंत्री सत महाजन के बेटे अजय महाजन को नूरपुर क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। सुंदरनगर से सोहन लाल ठाकुर पूर्व विधायक शेर सिंह ठाकुर के भाई हैं।
भाजपा मजबूत साबित हुई
Himachal Pradesh Assembly Election 2022 हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने प्रत्याशियों की पहली सूची ने सबको चौंकाया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के पुत्र को टिकट नहीं दिया गया है। ऐसा कर भाजपा ने पूरे देश को एक बड़ा संदेश दिया है।
Himachal Pradesh Assembly Election 2022, हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के पुत्र का नाम इस सूची में नहीं है। भाजपा हाईकमान ने जेपी नड्डा के पुत्र को टिकट न देकर एक बड़ा संदेश दिया है। जेपी नड्डा के बड़े बेटे हरीश नड्डा बिलासपुर में काफी समय से सक्रिय थे व उनका लोगों से रोज मिलना जुलना जारी था। ऐसे में क्यास लगाए जा रहे थे हरीश नड्डा चुनाव में उतर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने पार्टी संविधान के अनुसार उन्हें टिकट नहीं दिया।
धर्मपुर में तोड़ी प्रथा
नड्डा के बेटे को प्रत्याशी न बना कर भाजपा ने पूरे देश को संदेश दिया। लेकिन धर्मपुर में यह प्रथा तोड़ दी। यहां मंत्री के पुत्र को टिकट थमा दिया। हालांकि मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर अब चुनाव नहीं लड़ेंगे व इसी शर्त पर उनके पुत्र को टिकट मिला है। लेकिन इससे भाजपा में एक नई रिवायत भी शुरू होगी।
जुब्बल कोटखाई में भी पूर्व मंत्री पुत्र को टिकट
जुब्बल कोटखाई में भी पूर्व मंत्री के बेटे को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बेटे को टिकट न देकर पूरे देश को एक संदेश देने का प्रयास किया। लेकिन जुब्बल कोटखाई व धर्मपुर में मंत्री पुत्रों को टिकट देकर एक नई चर्चा भी शुरू कर दी है।
पार्टी प्रत्याशी के विरूद्ध लड़ा था चुनाव
जुब्बल कोटखाई में दो साल पहले हुए उपचुनाव में भाजपा को जमानत जब्त करवानी पड़ी थी। तब चेतन बरागटा ने पार्टी के विरूद्ध जाकर चुनाव लड़ा था। कुछ माह पहले उन्होंने भाजपा में वापसी कर ली थी व पार्टी ने उन्हें टिकट थमाया है।
धूमल परिवार से किसी को टिकट नहीं
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के परिवार से भी किसी को इस बार प्रत्याशी नहीं बनाया गया है। इससे भी एक परिवारवाद के मामले में बड़ा संदेश देने का पार्टी ने प्रयास किया है। लेकिन धर्मपुर में पार्टी ने परिवारवाद को बढ़ावा देने का काम कर दिया है।






