Wednesday, April 29, 2026
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देश का सबसे सनसनीखेज खुलासा: 873 पुलिसकर्मी मदद कर रहे थे,पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया की?

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर प्रतिबंध लगने से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने इस कट्टरपंथी संगठन से जुड़े होने के आरोप में जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें प्रोफेसर, लाइब्रेरियन, क्लर्क जैसे पदों पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। पीएफआई के अध्यक्ष ओएमए सलाम को भी गिरफ्तार किया गया था, जो कि केरल सरकार में एक कर्मचारी रह चुके हैं। उन्हें 2020 में निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ईएम अब्दुर रहमान कोचीन विश्वविद्यालय एक रिटायर्ड लाइब्रेरियन हैं। राष्ट्रीय सचिव वी पी नज़रुद्दीन जमात-ए-इस्लामी-हिंद के मुखपत्र मध्यमम के पूर्व क्लर्क हैं। ऐसे ही राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य पी कोया कतर में एक निजी कंपनी के पूर्व कर्मचारी हैं। उन्होंने बाद में कोझीकोड के एक सरकारी कॉलेज में बतौर लेक्चरर काम किया।
कर्नाटक से गिरफ्तार किए गए दो पीएफआई सदस्य अब्दुल वाहित सैत (राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद सदस्य) और अनीस अहमद (राष्ट्रीय महासचिव) तकनीकी विशेषज्ञ रह चुके हैं। पीएफआई के संस्थापक सदस्य सैत एक संपन्न मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं और बेंगलुरु में रहते हैं। सैत टैली, ईआरपी और अन्य बिजनेस सॉफ्टवेयर के समाधानों के लिए काम करने वाली एक कंपनी चलाते हैं। अनीस अहमद ने छह महीने तक बेंगलुरू के एरिक्सन में वर्ल्ड टेक्निकल मैनेजर के रूप में काम किया था। वह सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर काफी सक्रिय हैं और केंद्र सरकार की नीतियों सहित वर्तमान मुद्दों पर टिप्पणी करते रहते हैं।

ओएमए सलाम केरल राज्य बिजली बोर्ड के एक कर्मचारी हैं। 14 दिसंबर 2020 को पीएफआई के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका के कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया था। सलाम के खिलाफ मलप्पुरम में मामला दर्ज है। वह रिहैब इंडिया फाउंडेशन से भी जुड़े हैं। बुधवार को इसे भी प्रतिबंधित कर दिया गया। वह 2000 में एनडीएफ के राज्य सचिव थे और 2007 से पीएफआई से जुड़े।
एर्नाकुलम के रहने वाले ईएम अब्दुर रहमान 70 के दशक में सिमी में शामिल हुए और बाद में इसके अखिल भारतीय अध्यक्ष बने। वह एनडीएफ और बाद में कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया और कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन जैसे पीएफआई के संगठनों के गठन के मास्टरमाइंड थे। रहिमन स्टूडेंट्स इस्लामिक ट्रस्ट, नई दिल्ली के डायरेक्ट बोर्ड के सदस्य हैं।
कालीकट ई अबूबकर 1982 से 1984 तक सिमी के केरल के अध्यक्ष थे। वह एसडीपीआई के संस्थापक अध्यक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के संस्थापक सदस्य होने के अलावा एनडीएफ और रिहैब इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। वे थेजस दैनिक समाचार पत्र के प्रबंध संपादक होने के अलावा इंडिया नेक्स्ट हिंदी पत्रिका के संपादक भी रहे हैं।

पी कोया पीएफआई फ्रंट एनसीएचआरओ के राष्ट्रीय महासचिव भी थे। 1978-79 के दौरान वह एक सक्रिय सिमी कार्यकर्ता रह चुके हैं। नज़रुद्दीन ने अलुवा और कालीकट अनाथालय में एमईएस कॉलेज में शिक्षक के रूप में शुरुआत की। बाद में जेईआईएच के मुखपत्र मध्यमम डेली के लिए लिपिक स्टाफ के रूप में काम किया। उन्होंने 2014 का लोकसभा चुनाव मलप्पुरम से एसडीपीआई उम्मीदवार के रूप में लड़ा था।
पश्चिम बंगाल में पीएफआई प्रदेश अध्यक्ष मिनारुल शेख, मुर्शिदाबाद, मालदा और कोलकाता में पीएफआई की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जाने जाते हैं। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इतिहास में एमए और पीएचडी हैं। वह कोचिंग क्लास चलाते हैं। राजस्थान पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ स्नातक की पढ़ाई के दौरान सबसे पहले कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया में शामिल हुए।

 

अपडेट: केरल की पुलिस ने मीडिया में प्रकाशित नीचे की खबर को नकार दिया है। मीडिया रिपोर्ट का खंडन करने के लिए अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल का सहारा केरल की पुलिस ने लिया। ट्वीट में केरल की पुलिस ने लिखा:

“एनआईए ने राज्य के पुलिस प्रमुख को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें 873 पुलिसकर्मियों के प्रतिबंधित पीएफआई के साथ संबंधों का खुलासा किया गया है, यह खबर झूठी और असत्यापित है।”

केरल पुलिस के अलावे सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग ऐसे दावे कर रहे हैं कि खुद NIA ने भी इस खबर की पुष्टि नहीं की है।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने के कुछ दिनों बाद राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने बड़ा खुलासा किया है। एनआईए के मुताबिक, केरल के कम से कम 873 पुलिस कर्मचारियों के कट्टरपंथी संगठन PFI के साथ कनेक्शन थे। जाँच एजेंसी ने मंगलवार (4 अक्टूबर 2022) को इन पुलिस अधिकारियों का पर्दाफाश करते हुए केरल के पुलिस महानिदेशक को एक रिपोर्ट सौंपी है।

केंद्रीय जाँच एजेंसी की रिपोर्ट में सब-इंस्पेक्टर से लेकर स्टेशन हेड ऑफिसर (एसएचओ) रैंक के अधिकारियों सहित अन्य कर्मचारियों तक की लिस्ट है। एनआईए इन अधिकारियों के वित्तीय लेन-देन का ब्योरा भी जुटा रही है।

एनआईए ने कहा कि केरल के पुलिस अधिकारियों ने अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पीएफआई कैडरों को कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ लीक कीं। छापेमारी के दौरान भी इन पुलिस अधिकारियों ने पीएफआई से संबंधित आतंकियों और जिहादियों की मदद की। इन लोगों ने पीएफआई कैडरों को एनआईए और ईडी के छापे के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था, जिससे उन्हें अपने गोपनीय दस्तावेजों और अन्य सामानों को छिपाने में मदद मिली।

 

 

NIA और केरल की ATS ने कई राज्यों में दो बार छापेमारी कर 350 से अधिक PFI के सदस्यों को हिरासत में लिया था। इसके बाद भारत सरकार ने आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के कारण पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर पाँच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।

PFI का इतिहास हिंसा से सना रहा है। कई हिंसक मुस्लिमों संगठनों के विलय के बाद साल 2006 में PFI अस्तित्व में आया था। इसके बाद से यह सामूहिक हत्या, टारगेटेड मर्डर और दंगे फैलाने जैसे कामों में संलिप्त रहा। इतना ही नहीं, PFI पर लव जिहाद को बढ़ावा देने, महिलाओं का ब्रेनवॉश करने और धर्मांतरण कराने का भी आरोप है।

एनआईए अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान देश के लगभग 17 राज्यों में स्थित पीएफआई के ठिकानों से कई आपत्तिजनक सामग्रियाँ बरामद की थीं। इसमें एक ब्राउचर और एक सीडी भी मिली थी। जिसका नाम है – ‘मिशन 2047’। इसमें जो कंटेंट था, उसका मकसद खौफनाक था – आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक इस्लामी मुल्क में तब्दील कर देना।

बता दें कि कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के पीएफआई जिहादी ठिकानों से अवैध रूप से इकट्ठा किया गया कैश भी बरामद किया गया था। साथ ही राज्य में PFI के ‘प्रदेश अध्यक्ष’ के यहाँ से ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई दस्तावेज भी मिले थे। यह जानकारी भी सामने आई थी कि PFI द्वारा IED विस्फोटक तैयार करने के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। तमिलनाडु में PFI के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान मरीन रेडियो सेट्स भी जब्त किए गए थे, जिससे पता चला कि ये समुद्र में भी सक्रिय थे।

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