Friday, April 24, 2026
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दिल्ली सरकार का फर्जी स्कूल मॉडल फिर खुला: छात्रा के सर पर गिरा पंख,छात्रों की संख्या कम हुई,खर्चा हो गया डेढ़ गुना

 

शिक्षा विभाग ने अपने जवाब में बताया कि ‘आप’ की सरकार ने फरवरी 2015 से लेकर मई 2022 के बीच कुल 63 नए स्कूल खोले हैं। ‘आप’ ने 2015 के विधानसभा चुनावों के लिए जारी अपने घोषणा पत्र में 500 स्कूल खोलने का वादा किया था।

‘आप’ के घोषणा पत्र के बिंदु-19 के मुताबिक, “पार्टी दिल्ली में 500 स्कूल खोलेगी और उसका विशेष ध्यान माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों पर होगा, ताकि दिल्ली के हर बच्चे की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।”

आरटीआई आवेदन पर 326 स्कूलों की जानकारी उपलब्ध कराई गई है, जबकि अन्य स्कूलों की जानकारी शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट से जुटाई गई है। कुल 838 उच्च माध्यमिक विद्यालयों के आंकड़े उपलब्ध हुए हैं, जिनमें से सिर्फ 279 स्कूलों में विज्ञान और 674 विद्यालयों में वाणिज्य के विषयों की पढ़ाई होती है। यानी राष्ट्रीय राजधानी के लगभग 66 फीसदी सरकारी स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान, जबकि तकरीबन 19 प्रतिशत विद्यालयों में वाणिज्य के विषयों की पढ़ाई नहीं होती है। दिल्ली सरकार के तहत आने वाले स्कूलों की कुल संख्या 1047 है, जिनमें माध्यमिक और मिडिल स्कूल भी शामिल हैं।

दिल्ली सरकार के स्कूलों में विज्ञान और वाणिज्य की पढ़ाई नहीं होने को लेकर 2017 में दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि विज्ञान और वाणिज्य के विषयों का आवंटन ‘असमान तरीके’ से किया गया है, जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता है और यह क्षेत्र के विद्यार्थियों के साथ नाइंसाफी है।

दिल्ली के सरकारी स्कूलों को लेकर जारी राजनीति के बीच एक हादसा सामने आया है। नांगलोई के एक स्कूल में सीलिंग फैन गिरने से एक छात्रा घायल हो गई। कहा जा रहा है कि छत पर नमी के कारण पानी टपक रहा था।

Delhi Govt school student in hospital after classroom ceiling fan falls on her head kpa

दिल्ली. बाहरी दिल्ली के नांगलोई में दिल्ली सरकार की एक स्कूली छात्रा क्लासरूम का पंखा उसके सिर पर गिरने से घायल हो गई। यह मामला ऐसा समय में सामने आया है, जब अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स और यूएई के अखबार खलीज टाइम्स में पिछले दिनों दिल्ली के सरकारी स्कूलों की तारीफ में छपे लेख का मुद्दा गर्माया हुआ है। AAP सरकार इसे अपनी उपलब्धि बता रही है, जबकि भाजपा इसे पेड न्यूज(पैसे देकर) बताती आ रही है। यही, नहीं दिल्ली सरकार पर शिक्षा में घोटाले का भी आरोप लगता आ रहा है।

छत पर नमी होने से टपक गया पंखा
घटना शनिवार की है। घायल छात्रा को नांगलोई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। घटना के बारे में बताते हुए छात्रा ने आरोप लगाया कि छत में नमी थी और वह टपक रही थी। “27 अगस्त को कक्षा में पंखा छत से गिर गया, जब कक्षाएं चल रही थीं। छत में नमी थी और उसमें से पानी टपक रहा था, जिससे छत टूट गई और पंखा नीचे गिर गया। घटना के बारे में स्कूल अधिकारियों या सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सरकारी स्कूलों में क्लासरूम के निर्माण पर जवाब
दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय ने सोमवार(29 अगस्त) को चीफ सेक्रेट्री को लेटर लिखकर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एजुकेशन पर बजट में वृद्धि के बावजूद 2014-15 से नामांकन में गिरावट और बच्चों की उपस्थिति कम होने को लेकर जवाब मांगा है। यह पत्र उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दिल्ली के सरकारी स्कूलों में क्लासरूम्स के निर्माण पर सीवीसी की रिपोर्ट पर ‘आप’ सरकार की ओर से कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाने के कुछ दिनों बाद लिखा गया है।

लेटर में कहा गया कि दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2021-2022 के अनुसार,2014-15 में शिक्षा पर खर्च 6,145 करोड़ रुपये से बढ़कर 2019-20 में 11,081 करोड़ रुपए किया गया, फिर भी छात्रों के नामांकन में गिरावट और छात्रों की अनुपस्थिति बढ़ी है। प्रति छात्र प्रति वर्ष खर्च 2015-16 में 42,806 रुपए से बढ़कर 2019-20 में 66,593 रुपये किया गया। इसके विपरीत नामांकित छात्रों की संख्या 2014-15 में 15.42 लाख से घटकर 2019-20 में 15.19 लाख रह गई।

भाजपा लगाती आ रही है शिक्षा घोटाले का आरोप
भाजपा लंबे समय ये आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र में घोटाले का आरोप लगाती आ रही है। दिल्ली बीजेपी प्रमुख आदर्श गुप्ता और प्रवक्ता ने 29 अगस्त को आरोप लगाया कि आप शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के दावे झूठे पेश करती है। बीजेपी का आरोप है कि केजरीवाल सरकार ने टॉयलेट को भी क्लासरूम बता दिया है। भाजपा का आरोप है कि आप सरकर ने 500  स्कूल बनवाने का वादा किया था। ये तो बने नहीं, बल्कि16 स्कूल बंद हो गए। सीवीसी की रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाया कि स्कूलों में 2400 कमरों की जरूरत थी, लेकिन उन्हें बढ़ाकर 7180 किया गया। इनकी लागत बढ़ा दी, ताकि मुनाफखोरी हो सके।

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