में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट कहर बरपा रहा है। संघाई के बाद बीजिंग में यह बेहद तबाही मचा रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए चीन ने काफी कड़े नियम बना रखा है और इन नियमों का पालन हो इसके लिए सरकार बेहद सख्त नीति अपना रही है। कोरोना को नियंत्रित करने की चीन इस जीरो कोविड पॉलिसी को लेकर पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन तक इस नीति की आलोचना कर चुका है। इसके साथ ही चीन में व्यापार करने वाली कई विदेशी कंपनियों को भी इस नीति से नुकसान हो रहा है।
सप्लाई चेन हो रही प्रभावित
दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी एपल चीन में अपने स्मार्टफोन का प्रॉडक्शन करती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर्स आईफोन, आईपैड और मैकबुक लैपटॉप सहित एपल के 90 फीसदी से अधिक उत्पाद बनाते हैं। लेकिन चीन की जीरो कोविड पॉलिसी के कारण एपल के प्रोडक्ट के उत्पादन में बाधा आ रही है। इस कारण एपल की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में अब एपल चीन का दामन छोड़कर दक्षिण पूर्व एशिया और भारत में प्रॉडक्शन बढ़ाने की तैयारी में है।
कई जगहों पर उत्पादन हुआ ठप
निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक शंघाई और कुशान में लगे लॉकडाउन के कारण एपल के तीन तीन सप्लायर्स को प्रोडक्शन रोकने के लिए बाध्य किया जा चुका है। इसके कारण पेगाट्रॉन जो कि लगभग 30 फीसदी आईफोन का प्रोडक्शन करता है वह ठप हो चुका है। इसके साथ ही शंघाई और कुशान स्थित पेगाट्रॉन के दो उत्पादन स्थल को सरकारी नियमों का पालन न करने की एवज में बंद करा दिया गया है। इसके अलावा मैकबुक का निर्माण करने वाले क्वांटा और आईपैड एसेंबल करने वाले कॉम्पल को भी कोविड दिशा-निर्देशों का पालन न करने के लिए बंद कराया जा चुका है।
एपल को 8 बिलियन का घाटा
इस कारण एपल ने चीन की एंटी कोविड पॉलिसी सहित कई दूसरे फैक्टर्स की आलोचना की है। शंघाई में लगे कड़े लॉकडॉउन के कारण एपल को अप्रैल-जून की तिमाही में भारी घाटा होने जा रहा है। कंपनी का अनुमान है यह घाटा लगभग 8 बिलियन डॉलर तक का हो सकता है। एपल के सीएफओ लुका मेस्त्री ने कहा है कि कोविड नियमों के कारण हो रहे व्यवधानों की वजह से ग्राहकों की मांग पर भी कुछ प्रभाव पड़ा है। हालांकि चीन में एपल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता फॉक्सकॉन ने चीनी शहर झेग्झौ मे अपना उत्पादन जारी रखा है।






