Wednesday, May 6, 2026
Uncategorized

177 जमीनों के मालिक,लालू प्रसाद यादव के घर सीबीआई रेड,जानिए पूरा हाल

. रेलवे में नौकरी देने के नाम पर हुए फर्जीवाड़े को लेकर सीबीआई ने शुक्रवार को लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती के पटना, दिल्ली समेत 17 ठिकानों पर छापेमारी की. पटना में सीबीआई की टीम ने 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास के अलावा रूपसपुर थाना के महुआबाग स्थित 10 घरों में भी छापेमारी की. स्थानीय लोगों के मुताबिक सीबीआई की टीम सुबह 5 बजे महुआ बाग पहुंची थी. यहां सीबीआई की टीम ने उन 10 घरों में एक साथ छापेमारी की जिन्हें लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में नौकरी दी गई थी.

पूर्व मुख्‍यमंत्री राबड़ी देवी (Ex CM Rabri Devi) के पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर सुबह से सीबीआइ की छापेमारी चल रही है। इसको लेकर सुबह से राजनीतिक गरमाहट फैली हुई है। राजद कार्यकर्ता आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी कार्रवाई की आलोचना की है। जबकि भाजपा ने कार्रवाई को सही बताया है। ऐसे में सुबह से दोपहर बाद तक क्‍या-क्‍या हुआ, बिंदुवार हम आपको पूरी जानकारी दे रहे हैं।

(सीबीआइ का पुतला दहन करते राजद कार्यकर्ता।)

सुबह 5 बजकर 45 मिनट:  CBI कार्यलय से निकली सीबीआई की टीम। एक अणे मार्ग से पटना जू दो नंबर गेट होते हुए 10 सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर 10 मिनट में पहुंची।

6:15 बजे: राबड़ी देवी के आवास में दाखिल हुई CBI

6:35 बजे:  CBI की टीम से तेजप्रताप यादव की हुई मुलाकात

6:46 बजे:  राबड़ी देवी पहुंची सीबीआइ टीम के पास। पूछा क्या है मामला। CBI ने बताया कुछ पूछताछ करनी है राबड़ी ने कहा रुकिए हम अपने साहब से पूछ लेते हैं

6:50 बजे: लालू प्रसाद से मोबाइलपर राबड़ी की हुई बातचीत

6:55 बजे: राबड़ी ने कहा हमारे वकील आ रहे हैं इंतजार कीजिए

7:10 बजे: CBI ने कहा, मैडम तब तक कुछ बातचीत कर लेते हैंं।

7 बजकर 30 मिनट:  राबड़ी देवी और तेजप्रताप एक साथ CBI के पास गए, पूछताछ शुरू

7 बजकर 55 मिनट: CBI के दो अधिकारियों ने तेजप्रताप को बाहर आने को कहा

8:00 बजे: तेज प्रताप व राबड़ी को अलग-अलग कमरे में बिठाकर पूछताछ

11 बजे:  लालू के वकील पहुंचे राबड़ी देवी आवास

11.10 बजे: लालू के वकील की राबड़ी देवी से हुई मुलाकात। वकील के साथ राबड़ी व तेज प्रताप की हुई बातचीत

11 बजकर 15 मिनट: वकील ने सीबीआइ अधिकारी से की बात

11बजकर 18 मिनट: CBI की एक और टीम आई राबड़ी आवास, अंदर नही गई गेट से ही वापस हो गई

11 बजकर 20 मिनट: राबड़ी देवी दोबारा सीबीआइ टीम के पास बैठीं

11 बजकर 22 मिनट: गेट पर आकर तेजप्रताप ने अपने कार्यकर्ताओं से हंगामा नही करने का किया अनुरोध

1 बजकर 40 मिनट: सीबीआइ टीम के लिए बाहर से आया खाना

राबड़ी आवास में मौजूद है सीबीआइ की टीम

लालू ने रेल मंत्री रहते जिन्हें लगवाई थी रेलवे में नौकरी अब उन्हें तलाश रही CBI, महुआबाग में 10 गाड़ियों से पहुंची टीम

CBI Raids: जिन लोगों के घरों में छापेमारी की गई उन्होंने बताया कि सीबीआई की टीम सर्च वारंट के साथ 10 बड़ी गाड़ियों से सुबह 5 बजे यहां पहुचीं और तमाम दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया. इस दौरान रेलवे में नौकरी से जुड़े कागजातों की जांच की गयी.

2004-2009 के बीच लालू यादव रेल मंत्री मंत्री थे। ऐसा आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने गलत तरीके से रेलवे में सैकड़ों लोगों की नौकरी लगा दी। इसके एवज में लोगों से जमीन लिखवा ली। ये सारी जमीनें प्राइम लोकेशन की हैं। इस बात की शिकायत सीबीआई तक पहुंची थी और तब से पूरे मामले की जांच में लगी हुई थी। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने लालू यादव को Symbol Of Corruption In Bihar (बिहार में भ्रष्टाचार के प्रतीक) करार दिया। उन्होंने कहा कि ‘तुम मुझे जमीन दो, मैं तुम्हें नौकरी दूंगा’ की तर्ज पर घोटाले को अंजाम दिया।

शिवानंद तिवारी और ललन सिंह ने की थी शिकायत
सुशील मोदी ने कहा कि उस दौरान लालू यादव रेलवे में ग्रुप डी की नौकरी देने के एवज में दर्जनों लोगों से जमीनें लिखवा ली थी। इस मामले को लेकर शिवानंद तिवारी जो इस वक्त आरजेडी के वरिष्ठ नेता हैं और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने गए थे और ज्ञापन देकर कहा था कि लालू यादव किस तरह से रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लिखवा रहे हैं। सुशील मोदी ने ‘लालू लीला’ पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि हृदयनंद चौधरी जो पटना के रेलवे कॉम्प्लेक्स में काम करने वाला कर्मचारी रहा और ललन चौधरी विधान परिषद में कर्मचारी रहा इन दोनों ने लालू यादव के लिए काम किया।

5-6 साल में लालू के पास कैसे आ जाती थी जमीन? जानिए
दरअसल, जमीन सीधे लालू यादव के नाम पर नहीं लिखवाया जाता था बल्कि किसी और के नाम पर रजिस्ट्री होती थी। सुशील मोदी ने कहा कि पांच-छह साल बाद उस जमीन को गिफ्ट करवा लिया जाता था। अगर तुरंत उसी समय लालू यादव अपने नाम पर जमीन लिखवा लेते तो वो ज्यादा मजबूत सबूत बन जाता। पहले उन्होंने ग्रुप डी की नौकरी दे दी, जमीन की रजिस्ट्री किसी तीसरे आदमी के नाम पर करवा दी, फिर अपने नाम पर गिफ्ट करवा लिया।
लालू के जमीन के राज़दार हृदयानंद और ललन चौधरी
हृदयानंद चौधरी और ललन चौधरी जो विधान परिषद में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी है। उसने लाखों रुपए की जमीन राबड़ी देवी को दान में दे दिया। इसमें सवाल उठता है कि रेलवे और विधान परिषद के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के पास करोड़ों की संपत्ति कहां से आ गई, जिन्होंने लालू यादव के परिवार को जमीनें दान दे दी। सुशील मोदी ने बताया कि पहले सब्सीट्यूट के नाते नौकरी दी गई, बाद में नियमों का उल्लंघन कर उसे नियमित कर दिया गया। एक दर्जन से ज्यादा मामलों के बारे में शिवानंद तिवारी और ललन सिंह ने उजागर किया। हमें खुशी है कि सीबीआई ने पुख्ता सबूत मिलने पर इतने साल बाद कार्रवाई शुरू की है। इस मामले में प्रीमियर इंक्वायरी (PE) 21 सितंबर 2021 को ही दर्ज की जा चुकी है।
BJP को रास नहीं आ रही लालू फैमिली से CM नीतीश की नजदीकी, क्या उसी का रिएक्शन है CBI की रेड?
नौकरी ही नहीं टिकट के लिए भी जमीन लेने के आरोप
लालू परिवार के जमीन-जायदाद के हिसाब-किताब सबसे ज्यादा सुशील मोदी ने मीडिया को बताया था। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि कांति सिंह ने छह जनवरी 2005 को तेज प्रताप और तेजस्वी को चितकोहरा में तीन मंजिला मकान सहित 9.39 डिसमिल जमीन गिफ्ट के रूप में दे दीं। जमीन के रजिस्ट्री दस्तावेज में लिखा है कि दानकर्ता से दानप्राप्तकर्ता का लंबे समय से नजदीक का संबंध है और उनकी सेवा से खुश होकर ये जमीन दान में दी जा रही है। उस समय 15-16 साल लालू प्रसाद यादव के पुत्रों की उम्र रही होगी। उन्होंने कहा था कि तेज प्रताप बांसुरी बजाते थे और तेजस्वी क्रिकेट खेलते थे, तब उन्होंने कांति सिंह की कौन-सी सेवा की, जिसके बदले उन्हें जमीन और मकान गिफ्ट में दे दिया गया। प्रेमचंद गुप्ता, रघुनाथ झा और कांति सिंह ने क्यों ऐसा किया? इसका एक ही उद्देश्य है, टिकट पाना और मंत्री बनना। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन दान किए जाने के बाद लालू प्रसाद ने कांति सिंह के पति केशव प्रसाद सिंह को चुनाव का टिकट दिया था।
जमीन फॉर जॉब, लैंड फॉर टिकट… इसी फॉर्म्युले ने लालू परिवार को कैसे उलझाया, पूरी कहानी समझिए
‘177 प्रॉपर्टी का मालिक कैसे बन गया लालू परिवार?’
लालू यादव के सियासी दुश्मन सुशील मोदी ने कहा कि ये तो बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है कि कांति सिंह हों, रघुनाथ झा हों इन लोगों को मंत्री बनाने के एवज में मकान लिखवा लिया। रघुनाथ झा को केंद्र में मंत्री बनवाया तो गोपालगंज में तीन मंजिला उनका मकान लिखवा लिया। जब कांति सिंह को टिकट दिया फिर मंत्री बनाया उसके बदले उनसे जमीन लिखवा लिया। सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि इस वक्त लालू यादव के पास कुल मिलाकर 141 भूखंड है। 30 फ्लैट हैं और करीब 6 मकान के मालिक हैं। जिसका मैंने प्रमाण दिया है। आखिर एक चपरासी के घर में पैदा लेने वाला व्यक्ति 15-20 साल में 177 प्रॉपर्टी का मालिक कैसे हो गया?

Leave a Reply