पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) के खिलाफ मेट्रो डेयरी मामले में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए अदालत पहुंचे कांग्रेस नेता और अधिवक्ता पी चिदंबरम (P Chidambaram) को कलकत्ता हाई कोर्ट में कांग्रेस समर्थित वकीलों द्वारा विरोध का सामना करना पड़ा. चिदंबरम कोलकाता हाईकोर्ट में एक कानूनी मामले में पहुंचे हुए थे. कोर्ट रूम के बाहर उनके खिलाफ नारे लगाए गए और उन्हें काले झंडे (Calcutta High Court Black Flag) भी दिखाए गए. कांग्रेस समर्थित वकीलों ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस का एजेंट बताया साथ ही कांग्रेस के वकीलों ने पश्चिम बंगाल में पार्टी के खराब प्रदर्शन के लिए भी चिदंबरम को ही जिम्मेदार ठहराया.
हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट रूम से बाहर निकल रहे वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ कांग्रेस समर्थित वकीलों ने प्रदर्शन किया. बुधवार को मेट्रो डेयरी से जुड़े एक मामले में चिदंबरम कलकत्ता उच्च न्यायालय में सरकार की ओर से हाजिर हुए थे. यह मामला कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर चौधरी ने राज्य सरकार के खिलाफ कदाचार का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था.
वे पूछ रहे हैं कि हम तृणमूल के साथ हैं या उनके विरोध में।
दरअसल, उनका यह गुस्सा 4 मई को अचानक सातवें आसमान पर तब पहुंच गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम राज्य में पहुंचे।
कांग्रेस लीगल सेल के कार्यकर्ताओं ने उनको काले झंडे दिखा कर विरोध जताया। वे वहां पार्टी या संगठन के लोगों से मिलने नहीं बल्कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लगे उस आरोप को
गलत साबित करने गए थे, जो उनकी ही पार्टी के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी ने लगाया था। चिदंबरम वहां बतौर एडवोकेट कलकत्ता हाईकोर्ट में
मेट्रो डेयरी स्कैम की साझा आरोपी कंपनी कैवेंटर के डिफेंस लॉयर बनकर पहुंचे थे।
ये कांग्रेस के नेता हैं या टीएमसी के वकील
यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी चंदन डे के मुताबिक, ‘बूथ स्तर का कार्यकर्ता हमसे सवाल कर रहा है, हम क्या टीएमसी के साथ हाथ मिलाने वाले हैं?
क्या कांग्रेस अब राज्य में टीएमसी की बी पार्टी बनकर रहेगी?’ वे कहते हैं, ‘दिल्ली की टॉप लीडरशिप को स्पष्ट करना चाहिए कि बंगाल कांग्रेस की स्थिति क्या है?
चिदंबरम, मनु सिंघवी, कभी कपिल सिब्बल यहां टीएमसी के नेताओं पर लगे आरोपों के खिलाफ कोर्ट में केस लड़ते हैं। ये कांग्रेस के नेता हैं या टीएमसी के वकील?’
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के स्पोक्सपर्सन और कलकत्ता हाईकोर्ट में एडवोकेट कौस्तुभ बागची कहते हैं, ‘मैं हैरान था कि आखिर पी. चिदंबरम यहां क्या करने यहां आए हैं?
वे उस याचिका को निरस्त करने की गुहार करने कोर्ट में आए हैं जो उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता ने लगाई है।
मेट्रो डेयरी स्कैम में जिस कंपनी के शेयर बेचे गए उस कंपनी की प्रार्थना लेकर वे कोर्ट पहुंचे थे।’ अगर वह कंपनी याचिका रद्द कराने में कामयाब हो जाती है तो टीएमसी खुद ब खुद
उस स्कैम के आरोप से बरी हो जाएगी, जिसे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दिग्गज नेता अधीर रंजन ने लगाया है। एडवोकेट बागची ने कहा, ‘मैंने अधीर रंजन और राज्य कांग्रेस की अन्य टॉप लीडरशिप से बात की है।
जल्द से जल्द इस मामले को दिल्ली की लीडरशिप तक ले जाने का भरोसा हमें मिला है। लेकिन अगर इस तरह से चलता रहा तो पहले से ही खस्ताहाल कांग्रेस बंगाल में दशकों तक अपनी जमीन नहीं तलाश पाएगी।’
कंपनी पर 447 करोड़ का चूना लगाने का आरोप
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के पूर्व नेता अधीर रंजन चौधरी ने राज्य सरकार के 47 फीसद शेयर वाली मेट्रो डेयरी को प्राइवेट कंपनी कैवेंटर के हाथों बेचे जाने के मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप टीएमसी पर लगाया है।
चौधरी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इसे पानी के भाव बेचा है, इससे राज्य को करीब 447 करोड़ का चूना लगा है।
चौधरी के मामले की सीबीआई जांच की मांग के बाद इस मामले में सीबीआई की एंट्री हुई।
राज्य के कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने अगस्त 2017 को मेट्रो डेयरी के 47 फीसद शेयर बेचने का फैसला लिया था।
राज्य सरकार ने इसे कोलकाता की एक प्राइवेट कंपनी के हाथों 84.50 करोड़ रुपए में बेच दिया, जिसके पास पहले से ही मेट्रो डेयरी का 53 फीसद शेयर है।
मेट्रो डेयरी का 100 प्रतिशत मालिकाना हक अब इस कंपनी पर हो गया है।
अधीर रंजन चौधरी ने इस मामले में याचिका दाखिल की थी, जिसकी सुनवाई 4 मई को हुई।
नारदा केस में टीएमसी के डिफेंस में सिंघवी आ गए थे
इससे पहले नारदा स्टिंग मामले में भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने सीबीआई जांच को लेकर बीजेपी को आड़े हाथों लिया था।
पिछले साल जब टीएमसी नेताओं को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था तो उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताया। वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा था,
‘पश्चिम बंगाल में गिरफ्तारियों के पीछे केंद्र सरकार और सीबीआई के गलत इरादे दिखते हैं। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी करने की पावर होने का यह मतलब नहीं कि आप गिरफ्तार ही करें।
सिंघवी ने कहा कि नारदा दशक पुराना मामला है, टेप भी 2016 के हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अफरा- तफरी में दो गिरफ्तारियों की क्या जरूरत थी?’ दरअसल, चंदन डे कहते हैं,
‘राज्य में हम टीएमसी के खिलाफ स्कैम को मुद्दा बनाते हैं और टॉप लीडर और वकील इस आरोप को गलत साबित करने के लिए उतर आते हैं।
कार्यकर्ता पूछते हैं, क्या कांग्रेस को विश्वास है, वह बंगाल में कभी नहीं आएगी? वह यहां चुनावी मैदान से खुद को अलग कर चुकी है? बंगाल में कांग्रेस अब चुनाव जीतने की फाइट में नहीं?’






