Thursday, May 7, 2026
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हिंदू ओबीसी,हिंदू दलित ने सबसे ज्यादा नुकसान झेला,मुसलमान दंगाइयों से,कोई कांग्रेस नेता नही पहुंचा अभी तक

शहर की सीमा पर बसे आनंद नगर में करीब ढाई सौ हिंदू परिवार रहते हैं। वहां धीरे-धीरे मुस्लिम परिवार भी बसने लगे हैं। बस्ती में उनके 50 से ज्यादा मकान नहीं हैं, लेकिन दंगे वाली रात (10 अप्रैल) उनके घर की छतों से बरसे पेट्रोल बम, पत्थरों ने कई लोगों को जिंदगीभर की दर्दभरी निशानी दे दी। पेट्रोल बम के कारण किसी की पीठ झुलस गई, तो किसी के हाथ की हड्डी टूट गई। हिंदू परिवार इतने डरे हुए हैं कि उन्होंने ईंट की दीवार बनवा कर नफरत फैलाने वाले उस रास्ते को ही बंद कर दिया जहां से आकर दंगाइयों ने पेट्रोल बम बस्ती में फेंके थे। खौफ के कारण बस्ती में लोग रात को छतों पर सोने से अब डरने लगे हैं।

रहवासियों ने कहा कि दंगे के दूसरे ही दिन सभी ने गली को बंद करने का फैसला ले लिया था, ताकि हमारी गली सुरक्षित रहे। 10 अप्रैल को रात 2 बजे तक दंगाइयों ने बार-बार गली से आकर हमारी बस्ती में उत्पात मचाया था। यहां रहने वाले दमकलकर्मी सुभाष गांगले दंगे वाली रात दूसरे इलाकों में प्रभावितों के मकान की आग बुझा रहे थे, लेकिन दंगाइयों ने उनके मकान को ही फूंक दिया। चार अन्य मकानों में भी आग लगाई।

पत्थर हाथ पर लगा, हड्डी के दो टुकड़े हो गए

शाम को अचानक बस्ती में पत्थर आने लगे। मैं घर से बाहर निकल देखने लगा कि पत्थर क्यों बरसाए जा रहे हैं, तभी एक बड़ा पत्थर मेरे हाथ पर आकर लगा। परिवारवाले अस्पताल ले गए तो पता चला कि हड्डी के दो टुकड़े हो गए। आपरेशन कर राड़ डाली गई। -प्रवीण यादव, दंगा प्रभावित

दूर से देखते रहे घर लुटते हुए

गली में दंगाइयों ने आकर हमारे घर पर हमला कर दिया। छत पत्थरों से पट गई थी। पत्थरों से बचने के लिए हम घर से दूर भागे और सुरक्षित जगह पर पहुंचे, लेकिन वहां से हम अपना घर लुटते देख रहे थे, लेकिन कुछ नहीं कर पाए हम बुजुर्ग कैसे उन लोगों से लड़ते? -काली बाई, दंगा प्रभावित

बेघर ही नहीं बेरोजगार भी हो गए कई लोग, नहीं भागते तो दंगाई पहुंचा देते श्मशान घाट

दंगाइयों की भीड़ आती देख कोई घर का ताला लगा रहा था, तो कोई बिना ताला लगाए ही भाग रहा था। मैं अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चों को लेकर नंगे पैर ही भागा। नहीं भागते तो दंगाई हमको श्मशान घाट ही पहुंचा देते। मेरी इलेक्ट्रिक दुकान से सामान लूटकर ले गए और बाद में मकान-दुकान में आग लगा दी। अब पास के गांव भसनेर में दोस्त के घर रह रहा हूं।

यह दर्द है खरगोन के संजय नगर भवानी चौक निवासी विजय कुमावत का। संजय नगर के बड़े हिस्से में मुसलमान परिवार रहते हैं और एक हिस्से में हिंदू परिवार। इस इलाके में भी पेट्रोल बमों से हमले किए गए। दराते और फरसे लेकर आए दंगाइयों ने जमकर लूटपाट की। संजय नगर में बुजुर्ग नानूराम गुप्ता छोटी-सी किराना दुकान व मकान दोनों जला दिए। अब गुप्ता अपनी बेटी के यहां रह रहे हैं। संतोष मारू की किराना दुकान भी आग के हवाले हो गई। मारू बेरोजगार हो चुके हैं।

दंगे की आग में संजय नगर निवासी अमित बंडोले का आटो रिक्शा और भावसार मोहल्ला निवासी सुरेशचंद्र भावसार का लोडिंग रिक्शा भी जला दिया गया। जले हुए रिक्शे को देखकर अमित कहते हैं कि यही मेरे परिवार की रोजी-रोटी का सहारा था। अभी तो बैंक में इसकी पूरी किस्तें भी जमा नहीं की हैं। अब कैसे परिवार चलाऊंगा? संजय नगर निवासी मंजुला केवट के पति नहीं हैं। सिलाई करके दो बच्चों को पढ़ाती हैं और परिवार चलाती हैं। रामनवमी के दिन दंगाइयों ने उनका घर जला दिया। पड़ोसियों से खबर लगी तो खरगोन पहुंचीं। जली हुई गृहस्थी देखकर होश खो बैठीं और बीमार पड़ गईंं। वे कहती हैं- मेरा तो घर भी जल गया और सारा सामान भी। भाई ने वापस मायके बुला लिया। सबने हिम्मत दी तो अब देवर के घर रह रही हूं।

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