अम्बेडकर जी के गोडसे के प्रति क्या विचार थे?
भारत के संविधान के निर्माता और गांधीजी के आलोचक, डॉ. बी आर अंबेडकर उन लोगों में से थे। जिन्होंने गांधीजी की मृत्यु के बाद कुछ सकारात्मक देखा था। हत्या के लगभग एक हफ्ते बाद, जब राष्ट्र का अधिकांश हिस्सा अभी भी सदमे और शोक में था, तब बाबा साहब ने एक पत्र में गांधीजी की मृत्यु पर चर्चा की थी ।
उन्होने लिखा था की,
“मेरा अपना विचार है कि महापुरुष अपने देश के लिए महान सेवा के होते हैं, लेकिन वे निश्चित समय के बाद कभी कभी देश की प्रगति में बाधा भी बनते हैं। मि. गांधी इस देश के लिए एक सकारात्मक खतरा बन गए थे, उन्होंने सभी के विचारों को घुट कर रख दिया था। वह कांग्रेस के साथ खड़े हुए थे, वो काँग्रेस, जो समाज के सभी बुरे और स्वार्थसेवी तत्वों का एक संयोजन है। जो सिवाय प्रशंसा और चापलूसी के, समाज-जीवन को नियंत्रित करने वाले किसी भी सामाजिक या नैतिक सिद्धांत पर सहमत नहीं हैं । इस तरह की संस्था किसी भी देश पर शासन करने के लिए अयोग्य है, ”
“जैसा कि बाइबल कहती है कि कभी-कभी अच्छाई, बुराई से ही बाहर आती है, इसलिए मुझे भी लगता है कि मि. गांधी की मौत से अच्छा ही निकलेगा। यह लोगों को बंधन से निकाल कर, उन्हें खुद के लिए सोचने के लिए और उनकी योग्यता के आधार पर खड़े होने के लिए मजबूर करेगा ”
स्रोत : पेज़ नं. २०५ | लेटर्स ऑफ अंबेडकर | लेखक – सुरेन्द्र अजनात
उपरांत, गोपाल गोडसे के जनवरी १९९२ के एक साक्षात्कार के मुताबिक उन्होने कहा था की, डॉ. बी आर अंबेडकर ने नाथुराम गोडसे को उसकी सजा कम कराने भी प्रस्ताव दिया था।
गोडसे परिवार के अनुसार, डॉ. बी आर अंबेडकर ने नाथूराम के वकील से संपर्क करके यह संदेश दिया कि, “यदि नाथूराम अपनी सजा को कम करके आजीवन कारावास करना चाहते हैं, तो वे कानून मंत्री के रूप में इसकी व्यवस्था कर सकेंगे। आखिर गांधीजी के अहिंसा के सिध्द्धांत को देखते हुए ये करना काफी आसान था।”
लेकिन नाथूराम गोडसे ने जवाब भेजा की, “कृपया,यह देखें कि मुझ पर दया न हो। मैं बताना चाहता हूं कि, मेरे माध्यम से ही गांधीजी के अहिंसा को फांसी दी जा रही है।” यह उत्तर सुनकर, अंबेडकर जिन्होंने गांधीजी के विचारों के बारे में कभी नहीं सोचा था, उन्होंने वास्तव में गोडसे की प्रशंसा की थी।
स्रोत : गांधी और गोडसे | लेखक : कोनिराड इलास्ट
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