Thursday, May 7, 2026
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राहुल गांधी फिर प्रशांत किशोर की शरण मे,PK की मांग सारे बड़े नेता मेरी मर्जी के बिना न करे बयानबाजी, कांग्रेस में नम्बर 2 की मांग PK की

गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसके बावजूद अबतक कांग्रेस पार्टी के पास कोई चुनावी रणनीति नहीं है. इस बीच चुनाव सलाहकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की सुगबुगाहट तेज होने लगी है. कांग्रेस नेताओं का एक वर्ग चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी टीम के साथ राज्य में एक चुनावी असाइनमेंट के लिए पार्टी आलाकमान के साथ बातचीत के बारे में मीडिया में लगाई जा रही अटकलों को हवा दिया है.

गुजरात चुनाव में पीके निभा सकते हैं अहम भूमिका

प्रशांत किशोर गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी के लिए गुजरात में अहम भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि इस फैसले पर चर्चा जारी है और अंतिम निर्णय लेना बाकि है. लेकिन कांग्रेस पार्टी से जुड़े लोगों की मानें तो प्रशांत किशोर गुजरात विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका में नजर आ सकते हैं. एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने टेलीग्राफ को बताया कि इस बारे में राहुल गांधी ने उनसे राय ली है.

वहीं एक और गुजरात कांग्रेस के नेता ने कहा कि हम खुले तौर पर फैसले की अवहेलना नहीं कर सकते हैं लेकिन प्रशांत किशोर को लेकर प्रतिरोध जरूर रहेगा. राहुल गांधी के सहयोगी ने टेलीग्राफ को बताया कि प्रशांत किशोर के साथ राहुल गांधी की कई राउंड बैठक हो चुकी है. इस बैठक में उनके पार्टी में शामिल होने सहित कई प्रस्ताव थे. लेकिन वे राहुल गांधी द्वारा दिए जा रहे ऑफर से कहीं ज्यादा की मांग कर रहे थे. प्रशांत किशोर गुजरात में एक और अहमद पटेल बनने का ख्वाब देख रहे हैं. उन्होंने बताया कि किशोर अपने आप को पार्टी में नंबर 2 की भूमिका में देख रहे हैं.
प्रियंका गांधी जो इस बैठक का हिस्सा थीं उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि कुछ मामलों पर अभी सहमति नहीं बनी है. जिस कारण चर्चा आगे नहीं बढ़ पा रही है. इस बीच जब बात नहीं बन पाई तो प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि नेतृत्व किसी व्यक्ति का दैवीय अधिकार नहीं है. इस कारण कांग्रेस पार्टी के अंदर थोड़ी नाराजगी देखने को मिल रही है.

पार्टी का टूटेगा मनोबल

गुजरात कांग्रेस के एक पर्व अध्यक्ष की माने तो अगर प्रशां किशोर के गुजरात आने की बात सफल नहीं होती है तो इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा. उन्होंने कहा कि ऐसी किसी बी योजना के बारे में तमाम बड़े नेताओं से राय नहीं ली गई है. उन्होंने कहा कि बड़े नेताओं के भीतर एकजुटता की कमी अब सार्वजनिक रूप से दिखने लगी है.

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