आमिर खान ने दंगल से कमाए 2000 करोड़ भारतीय कुश्ती संघ को donate कर दिए थे…..आज हर गली मोहल्ले में जो पहलवान पैदा हो रहे हैं, उसी का नतीजा है।
मेरी कॉम फ़िल्म से आई कमाई को प्रियंका चोपड़ा ने बॉक्सिंग फेडरेशन को donate कर दिया था….उसके बाद महिला बॉक्सर्स की संख्या एकदम से बढ़ गयी।
चक दे फ़िल्म से कमाए करोड़ो रूपये से शाहरुख खान ने महिला हॉकी के लिए स्टेडियम और ट्रेनिंग सेंटर खोले थे। जिसके बाद हमारी महिला हॉकी टीम मंगल ग्रह पर जा कर Universe Cup जीत आयी।
जय भीम और Article 25 फ़िल्म से कमाए सैंकड़ो करोड़ रुपये गरीब दलितों के उत्थान में लगाये गए हैं…..अब कोई गरीब नही कोई दलित दुखी नही।
PK फ़िल्म से कमाए सैंकड़ो करोड़ रुपये आमिर खान ने NASA को डोनेट किये थे, ताकि सेक्युलर Alien की खोज की जा सके। 2025 में इसके लिए एक space craft भी छोड़ा जाएगा, जो 30 फरवरी 2035 को Andromeda में land करेगा।
बस ऐसे ही विवेक अग्निहोत्री को भी कश्मीर फाइल्स की कमाई donate कर देनी चाहिए….है ना 🤨??
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जब घूम-घूम कर 700 पीड़ितों से मिल रहे थे विवेक अग्निहोत्री, तब कहाँ थे केजरीवाल? 15 फिल्मों का प्रचार किया, कश्मीरी पंडितों से दिक्कत क्यों?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘The Kashmir Files’ का दिल्ली विधानसभा में उड़ाया मजाक
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नब्बे के दशक में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन पर बनी फिल्म ‘The Kashmir Files’ का मजाक बनाया। इसे दिल्ली में टैक्स फ्री किए जाने की माँग पर उन्होंने बचकानी बातें करते हुए पूछा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री इस फिल्म को YouTube पर क्यों नहीं डाल देते। वो किस हक़ से ऐसा बोल रहे हैं, ये तो पता नहीं। लेकिन, लोगों को पता होना चाहिए कि इस फिल्म को बनाने में निर्माता-निर्देशक को कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
The Kashmir Files: फिल्म के रास्ते में थीं चुनौतियाँ ही चुनौतियाँ, तब कहाँ से अरविंद केजरीवाल?
पहली बात तो ये कि इस फिल्म को बनाने के लिए कोई निर्माता तैयार नहीं था। जहाँ इस्लामी कट्टरवादियों की सच्चाई दिखाई जा रही है, वहाँ मुस्लिमों को नाराज़ करने के लिए भला कोई क्यों पैसा लगाना चाहेगा? वो भी खासकर बॉलीवुड में, जहाँ हर फिल्म में मुल्ले-मौलवियों को सौम्य और ब्राह्मणों-महाजनों को खूब चूसने वाला बताया जाता है। ‘लाला मेरे हाथ के कंगन वापस दे दे’ वाली इंडस्ट्री ने कभी इस्लामी कट्टरवाद की निंदा की जहमत नहीं उठाई।
इस फिल्म को विवेक अग्निहोत्री की पत्नी पल्लवी जोशी के साथ-साथ हैदराबाद के अभिषेक अग्रवाल ने मिल कर प्रोड्यूस किया है। अभिषेक अग्रवाल ने जब सुना कि विवेक अग्निहोत्री इस तरह की कोई फिल्म बना रहे हैं, तो उन्होंने खुद उन्हें फोन कॉल कर के इसका निर्माता बनने की इच्छा जताई। कोई बड़ा सुपरस्टार वैसे भी इस फिल्म में काम करता नहीं। आमिर खान ‘पीके’ में भगवान शिव का मजाक बनाते हैं और शाहरुख़ खान ‘माय नेम इस खान’ जैसी फिल्मों के माध्यम से इस्लामी आतंक को व्हाइटवॉश करते हैं।
क्या तब अरविंद केजरीवाल इस फिल्म को बनाने में विवेक अग्निहोत्री की मदद करने गए थे? क्या उन्होंने इस फिल्म के लिए निर्माता खोज कर दिए? क्या उन्होंने बॉलीवुड के तथाकथित ए-लिस्टर सुपरस्टार्स को जाकर मनाया कि वो घाटी का सच्चा इतिहास दिखाने वाली इस फिल्म में काम करें? क्या उन्होंने कभी किसी कश्मीरी पंडित से उसका दुःख-दर्द जाना? फिर अब वो इस हक़ से इस फिल्म को मुफ्त में दिखाने की माँग कर रहे हैं?
YouTube की तो छोड़ ही दीजिए, वो तो राष्ट्रवादी आवाज़ों को दबाने में सबसे आगे रहा है। उसने रचित कौशिक के ‘सब लोकतंत्र’ नामक चैनल को बार-बार प्रतिबंधित कर के घृणा फैलाने का आरोप लगाया और उन्हें अपने प्लेटफॉर्म से दूर कर दिया। क्या गारंटी थी कि अगर YouTube पर ‘The Kashmir Files’ अपलोड भी हो जाती तो इस 3 साल की कड़ी मेहनत को वो हटाने में एक पल का भी वक्त नहीं लगाता? यही तो केजरीवाल जैसे लोग चाहते हैं।
YouTube तो छोड़िए, जरा अब धड़ाधड़ हिन्दुओं को बदनाम करने वाले वेब सीरीज रिलीज कर रहे OTT प्लेटफॉर्म्स की बात कर लेते हैं। अग्निहोत्री ने हाल ही में बताया था कि एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म ने द कश्मीर फाइल्स को रिलीज करने के लिए साल 2020 में उनसे संपर्क किया था। यह तब की बात है जब वैश्विक कोरोना संक्रमण की वजह से सिनेमाघर पूरी तरह बंद थे। बड़े निर्माताओं को भी फिल्म रिलीज करने के लिए नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, हॉटस्टार, सोनी लीव और जी फाइव जैसे ओटीटी मंचों का सहारा लेना पड़ा था।
जब ओटीटी प्लेटफॉर्म के प्रमुख ने उनसे पूछा कि क्या फिल्म में आतंकवाद को लेकर किसी विशेषण का इस्तेमाल किया गया है तो वे चकित रह गए। विवेक के अनुसार प्लेटफॉर्म के मुखिया का कहना था कि वे फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते। उनसे स्पष्ट शब्दों में कहा गया, “हमारी एक वैश्विक नीति है कि हम अपनी किसी भी फिल्म में इस्लामिक आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं। मुझे आशा है कि आप इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।” जबकि उस समय कश्मीर में हत्यारे केवल इस्लामी नारे ही लगा रहे थे।





