Tuesday, May 5, 2026
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38 आतंकवादियों को फांसी पर लटकाने का आदेश,56 हत्याओं को अंजाम दिया था सीरियल ब्लास्ट में,

2008 में हुए अहमदाबाद ब्लास्ट केस में ऐतिहासिक फैसला देते हुए अदालत ने 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. वहीं इस भयानक सीरियल ब्लास्ट केस 11 अन्य आयोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.इस मामले में फैसला 9 फरवरी को ही आना था, लेकिन बचाव पक्ष के वकील ने मामले में कुछ दस्तावेज देने के लिए समय मांगा था.

अहमदाबाद विस्फोट मामले में सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एआर पटेल ने 8 फरवरी को फैसला सुनाते हुए 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था. वहीं इस मामले में अदालत ने 77 में से 28 आरोपियों को बरी कर दिया था.

26 जुलाई 2008 में हुए थे धमाके
साल 2008 में अहमदाबाद में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे. इस हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 200 लोग घायल हो गए थे. यह घटना 26 जुलाई 2008 को घटी थी. इन 21 सीरियल ब्लास्ट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. ये ब्लास्ट भीड़-भाड़ वाली जगहों पर दहशत फैलाने के इरादे से किए गए थे. विस्फोट से कुछ मिनट पहले, टेलीविजन चैनलों और मीडिया को एक ई-मेल मिला था, जिसे कथित तौर पर ‘इंडियन मुजाहिदीन’ ने धमाकों की चेतावनी दी थी.
30 आतंकी तुरंत हो गए थे गिरफ्तार
28 जुलाई 2008 को विस्फोट मामले की जांच के लिए पुलिस टीम का गठन किया गया था. महज 19 दिनों के अंदर पुलिस ने 30 आतंकियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

इससे पहले इस मामले में न्यायाधीश एआर पटेल ने 8 फरवरी को सुनाए अपने फैसले में 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था। वहीं, 28 आरोपियों को बरी कर दिया था। इस मामले में कुल 78 आरोपित थे, जिसमें से एक आरोपित सरकारी गवाह बन गया था। इस तरह कुल 77 आरोपितों पर मामला चला।
सीरियल ब्लास्ट के इस मामले में सुनवाई पिछले साल सितंबर में ही पूरी हो गई थी। इस साल 2 फरवरी को फैसला आना था, लेकिन सत्र न्यायालय के न्यायाधीश एआर पटेल कोरोना से संक्रमित हो गए थे। इसके कारण मामले को 8 फरवरी तक के लिए टाल दिया गया था।
बता दें कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय अहमदाबाद शहर में 26 जुलाई 2008 को लगभग 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में अहमदाबाद पुलिस ने 20 प्राथमिकी दर्ज की थी, जबकि सूरत में 15 अलग से FIR दर्ज की गईं थी।
उस समय के प्रदेश के DGP आशीष भाटिया के नेतृत्व में 28 जुलाई 2008 को तेज-तर्रार अधिकारियों की टीम बनाई गई थी। इस टीम ने 19 दिनों में विस्फोट कांड से जुड़े 30 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में बाकी आतंकियों को भी जेल भेज दिया गया था। घटना के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अहमदाबाद गए थे।
पुलिस का दावा था कि ये सभी आरोपित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े हैं। इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने साल 2002 में हुए गोधरा दंगे का बदला लेने के लिए सीरियल बम ब्लास्ट किए थे। अहमदाबाद में धमाकों से पहले इन्हीं आतंकियों ने राजस्थान के जयपुर और उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी धमाकों को अंजाम दिया था।

 

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