Tuesday, May 5, 2026
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मुसलमानों की बम्पर वोटिंग,कंधे पर बैठा कर लाये बुजुर्गों को,पहले से कमेटियां गठित कर ली थी घर घर दस्तक की

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले चरण की वोटिंग खत्म हो चुकी है. इस चुनावी मैच में योगी आदित्यनाथ Eighty-Twenty के फॉर्मुले के साथ मैदान में उतरे थे. 80 प्रतिशत हिन्दू वोटर्स और 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स. इस फॉर्मुले की मदद से उन्होंने वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश की. और अखिलेश यादव जाट प्लस मुस्लिम वोटों की सोशल इंजीनियरिंग के साथ मैदान में उतरे थे. और इस बार अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के गठबंधन ने बीजेपी के उम्मीदवारों को कुछ हद तक बांध दिया है. और ऐसा लगता है कि वो खुल कर नहीं खेल पाए हैं.

11 ज़िलों की 58 सीटों पर 60.17 प्रतिशत वोटिंग

पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 ज़िलों की 58 सीटों पर 60.17 प्रतिशत वोटिंग हुई है. ये शाम 6 बजे तक के आंकड़े हैं और वोटिंग सात बजे तक हुई है. इसलिए ये आंकड़ा अभी बदल भी सकता है. पिछली बार इन्हीं सीटों पर 63.5 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. यानी 2017 की तुलना में इस बार कम वोट डाले गए हैं. दूसरी बात, जिन 11 ज़िलों में वोटिंग थी, उनमें से सात ज़िले ऐसे हैं, जहां मुस्लिम वोटर्स की संख्या 25 प्रतिशत या उससे ज्यादा है. इनमें मुजफ्फरनगर ज़िला भी है, जहां लगभग 41 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. और यहां 2017 की तुलना में एक से दो प्रतिशत तक ज्यादा वोटिंग हुई है.

पिछली बार बीजेपी को 53 सीटों पर मिली थी जीत

पिछली बार बीजेपी को इन 58 में से 53 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि समाजवादी पार्टी को 2, बीएसपी को 2 और राष्ट्रीय लोक दल को एक सीट पर जीत मिली थी. लेकिन इन सीटों पर वोटिंग का पैटर्न बिल्कुल अलग दिखा. वोटिंग के दौरान Zee News की टीम इन सीटों पर मौजूद थी और हमारा अनुमान ये है कि इन सीटों पर मुस्लिम वोटर्स ने ज़बरदस्त तरीक़े से मतदान किया है. जबकि हिन्दू वोटर्स में उत्साह कम देखा गया.

सीएम योगी का फॉर्मुला Eighty-Twenty

योगी आदित्यनाथ का फॉर्मुला Eighty-Twenty का था. यानी बीजेपी 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स को छोड़ कर बाकी 80 प्रतिशत हिन्दू वोटर्स को एकजुट करने पर ज़ोर दे रही थी. लेकिन अखिलेश यादव ने 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स को एकजुट रखा और 80 प्रतिशत हिन्दू वोटर्स को सोशल इंजीनियरिंग के तहत अलग भागों में बांट दिया और इसके लिए ज़बरदस्त तरीक़े से सोशल इंजीनियरिंग की. उदाहरण के लिए मुजफ्फरनगर में 41 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है लेकिन इस ज़िले की 6 विधान सभा सीटों पर अखिलेश यादव ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया.

शायद जाट वोटर्स को तोड़ने में असफल रही बीजेपी

हमारा अनुमान है कि मुस्लिम वोटर्स ने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और जयंत चौधरी के राष्ट्रीय लोक दल के पक्ष में एकजुट होकर वोटिंग की है. यानी हो सकता है कि कुछ मुट्ठीभर मुस्लिम वोटर्स दूसरी पार्टियों के पास गए हों. लेकिन अधिकतर मुसलमानों ने गठबन्धन को वोट दिया है. मुसलमानों के अलावा इन सीटों पर जाट समुदाय के वोटों का भी अच्छा प्रभाव है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुल 71 में से 29 सीटें ऐसी हैं, जिन पर अगर मुस्लिम और जाट वोटर्स किसी पार्टी को एकजुट होकर वोट करें तो उस पार्टी के उम्मीदवार की जीत निश्चित मानी जाती है. और जैसा कि हमने आपको बताया मुस्लिम वोटर्स ने तो एकजुट होकर मतदान किया ही है. साथ ही बीजेपी जाट वोटर्स को भी तोड़ने में शायद असफल रही है. ग्राउंड ज़ीरो पर रिपोर्टिंग के दौरान हमने जो देखा, ये हम उसके हिसाब से अनुमान लगा रहे हैं.

65% जाट वोटर्स ने अखिलेश-जयंत को वोट दिया!

इसके मुताबिक़ लगभग 65 प्रतिशत जाट वोटर्स ने अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की पार्टी को वोट दिया है. और 35 प्रतिशत जाट वोटर्स बीजेपी के साथ गए हैं. यानी ऐसा लगता है कि अखिलेश यादव मुस्लिम और जाट वोट बैंक की सोशल इंजीनियरिंग करने में कामयाब रहे. ये भी कह सकते हैं कि मुस्लिम वोटर तो पहले चरण की वोटिंग में एकजुट रहा लेकिन हिन्दू वोटों का विभाजन हो गया. और अगर वाकई में ऐसा ही हुआ है तो ये अखिलेश यादव के लिए काफ़ी अच्छी ख़बर है.

दबाव में आकर बीजेपी ने विधायकों के टिकट नहीं काटे

बीजेपी विधायकों द्वारा पार्टी छोड़ने से बीजेपी दबाव में आ गई और उसने इन सीटों पर कई विधायकों के टिकट नहीं काटे. यानी योगी और बीजेपी के ख़िलाफ़ तो कोई लहर नहीं थी. लेकिन कुछ विधायकों के ख़िलाफ़ लहर देखी गई है. पहले चरण की 58 सीटों में से बीजेपी ने केवल 14 विधायकों के टिकट काटे हैं.

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