कोरोना महामारी के भीषण दौर में भी अस्पतालों की लूट कम होने का नाम नहीं ले रही है। शहर के एपल अस्पताल को प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए 217 रेमडेसिविर इंजेक्शन किन मरीजों को लगाए गए, पता ही नहीं चल रहा है। इसे लेकर प्रशासन ने शुक्रवार को एपल अस्पताल का गीतिक मेडिकल स्टोर सील कर दिया। यहां दवा की कालाबाजारी हो रही थी।
अस्पतालों की मनमानी को लेकर कलेक्टर मनीषसिंह ने एआइसीटीएल के सिटी बस कार्यालय में शुक्रवार को अस्पताल संचालकों की बैठक बुलाई। कलेक्टर ने एपल अस्पताल के प्रतिनिधि से पूछा कि आपके अस्पताल को मिले रेमडेसिविर इंजेक्शन किसको लगाए गए, तो इसका जवाब नहीं मिल पाया। कलेक्टर ने एपल अस्पताल के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
राऊ के श्री मिनेश अस्पताल की शिकायत मिली कि मरीजों से बेड के एक-एक दिन के लिए 12 से 15 हजार रुपये वसूल किए जा रहे हैं। यह इतनी राशि है कि किसी बड़े होटल का कमरा भी इतना महंगा नहीं होगा। इसी तरह राज मोहल्ला स्थित साईं अस्पताल में मरीजों से अधिक पैसा वसूलने और अधिक बिलिंग करने की शिकायतें सामने आई। कलेक्टर ने दोनों अस्पतालाें को बंद करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में करीब 30 अस्पतालों की ओर से उनके प्रतिनिधि आए थे। अधिकांश अस्पतालों के मालिक या डायरेक्टर बैठक में मौजूद न रहने के कारण कलेक्टर ने शाम 6 बजे रेसीडेंसी कोठी पर एक बार फिर बैठक बुलाई है। उधर कलेक्टर के निर्देश पर एपल अस्पताल कार्रवाई के लिए गए दल ने वहां की दवा दुकान की जांच की। जब मेडिकल स्टोर संचालक से पूछा कि किन-किन मरीजाें को रेमडेसिविर लगाया तो वह सूची उपलब्ध नहीं करा पाया। कार्रवाई के लिए पहुंचे तहसीलदार सुदीप मीणा, ड्रग इंस्पेक्टर लोकेश गुप्ता, प्रेम डोंगरे और अनुमेहा ने दवा दुकान सील कर दी और कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।





