🚨 मेमुना बेगम उर्फ इंदिरा खान का रहस्यमयी राजयोगी: और शाह कमीशन के धमाकेदार खुलासे!
धीरेंद्र ब्रह्मचारी और इंदिरा खान गांधी के बीच अंतरंग और गहरा रिश्ता था, जो योग गुरु के रूप में शुरू हुआ और विवादास्पद #राजनीतिक प्रभाव तक पहुंच गया।
#इंदिरा सरकार के पतन के बाद इमर्जेंसी के कारनामों की जांच के लिये शाह #कमीशन की नियुक्ति हुई जिसने धीरेंद्र ब्रह्मचारी के कई काले चिट्ठों को उजागर किया, खासकर निजी हवाई जहाज की खरीद और सेना के जमीनों पर #आश्रमों के निर्माण से जुड़े।
#इमरजेंसी के दौरान (1975-77) में धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने अमेरिका से एक Cessna 182 हवाई जहाज खरीदा और इसे बिना कस्टम ड्यूटी चुकाए #भारत लाए, जबकि उस समय आयात पर भारी शुल्क लगता था।
#विमान को “दान में मिला” बता कर कस्टम ड्यूटी ना चुकाने का का रास्ता मेमुना बेगम से निकालवाया गया।
शाह कमीशन ने ना केवल यह पाया कि ‘कृषि छिड़काव दान’ बताकर ड्यूटी-मुक्त #आयात किया गया, बल्कि यह भी खुलासा हुआ कि दिल्ली और जम्मू में धीरेन्द्र ब्रह्मचारी के आश्रम #सरकारी जमीन पर बनाये गये थे।
सबसे सनसनीखेज तो यह था कि उनका #जम्मू का आश्रम सेना की 50 एकड़ भूमि पर, उसकी आपत्ति के वाबजूद अवैध रूप से निर्मित किया गया था।
#तत्कालीन रक्षा मंत्री बंसी लाल ने हस्तक्षेप करते हुये सेना की आपत्ति को दरकिनार कर दिया।
#रणनीतिक रूप से सम्वेदनशील इस भूमि पर बिना अनुमति प्राइवेट हवाई पट्टी का भी निर्माण किया गया था।
कमीशन ने जहाज के लॉगबुक जांचे तो पाया कि, 213 उड़ानों में से अधिकांश संजय गांधी और राजीव गांधी के निजी #उड़ानों से जुड़ीं थीं; जबकि दर्जनों उड़ानें रायबरेली-अमेठी की चुनावों में इस्तेमाल की गई थीं।
1977 में आयी मोरारजी देसाई #सरकार ने जहाज जब्त कर लिया, लेकिन 1980 में इंदिरा ने सरकार में वापसी करते ही अपने पहले फैसले में ही विमान धीरेन्द्र ब्रह्मचारी को लौटा दिया।
हालांकि जल्द ही इंदिरा और धीरेन्द्र ब्रह्मचारी में अनबन हो गयी और दोनों अलग हो गये।
कुछ वर्षों बाद जम्मू के उसी मंटलाई आश्रम की पट्टी पर लैंडिंग के दौरान ब्रह्मचारी की विमान दुर्घटना में पायलट सहित रहस्यमय मौत ( या हत्या) हो गयी। 🤔
सोशल मीडिया से






