Monday, March 4, 2024
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खत्म हो रहा हिंदू,टुकड़े टुकड़े और जमकर बनाया जा रहा मुसलमान ,ईसाई

खत्म होता हिंदू…

पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक राज्य में बड़े पैमाने पर हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ है। ओबीसी की लिस्ट में ज्यादातर मुस्लिम जातियों को शामिल किया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को मिलने वाले फायदों का लाभ बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम भी उठा रहे हैं।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने गुरुवार (8 जून 2023) को ये खुलासे किए। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर हिंदुओं ने इस्लाम कबूल किया है। बांग्लादेश से आए मुस्लिमों को भी ओबीसी की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि आयोग की टीम ने इसी साल 25 फरवरी को राज्य का आधिकारिक दौरा किया था। जाँच के दौरान पश्चिम बंगाल की सरकारी संस्था कल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट से हिंदुओं के बड़े पैमाने पर इस्लाम कबूलने की जानकारी मिली।

अहीर ने कहा, “ओबीसी सूची में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जो वास्तव में ओबीसी नहीं हैं। आयोग को ऐसी शिकायतें मिली हैं और ऐसा देखा भी गया है कि कई लोग ऐसे हैं जो बांग्लादेश से आए हुए हैं। म्यांमार से आए हुए रोहिंग्या को भी इस सूची में शामिल किया गया है।” नीचे लगे वीडियो में आप 17 मिनट के बाद से अहीर के इस बयान को सुन सकते हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में ओबीसी की लिस्ट में हिंदुओं से अधिक मुस्लिमों की जाति हैं। यह तब है राज्य में स्पष्ट रूप से हिंदुओं की आबादी अधिक है। आयोग को इस सूची को लेकर शिकायतें मिली हैं। एनसीबीसी के अनुसार राज्य में ओबीसी लिस्ट में 179 जातियों को रखा गया है। इनमें 118 मुस्लिम और 61 हिंदू जाति हैं।

 

अहीर ने बताया कि पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार की ओबीसी सूची में स्पष्ट रूप से खिलवाड़ किया गया है। सूची की ए कैटेगरी में करीब 90% मुस्लिम हैं। इसी तरह बी कैटेगरी में भी आधे से अधिक मुस्लिम हैं। इसके बारे में पूछे जाने पर राज्य सरकार का कहना है कि इनमें से ज्यादातर पहले हिंदू ही थे।

अहीर ने यह भी बताया कि बंगाल सरकार ने कुरैशी मुस्लिम जाति को ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल करने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को एक प्रस्ताव भेजा है। लेकिन पश्चिम सरकार सरकार खुद इनको अलग जाति नहीं मानती। बंगाल की ओबीसी लिस्ट में कुरैशी मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है।

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