2014 से पहले एक थी बेहद शरीफ भाजपा, जिसे केवल 1 वोट से संसद भवन में गिरा दिया गया था, और सोनिया जी के होंठों पर मंद-मंद मुस्कराहट थी। अटल बिहारी वाजपेयी जी हाथ हिला-हिलाकर अपनी चिर-परिचित शैली में व्यस्त थे।
जब तक भाजपा अटल जी की विचारधारा पर चलती रही, वो प्रभु श्रीराम के बताये मार्ग पर चलती रही। मर्यादा, नैतिकता और शुचिता द्वारा इनके लिये कड़े मापदंड तय किये गये थे। परन्तु कभी भी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सके।
फिर 2014 में नरेंद्र मोदी जी का पदार्पण होता है जो गुजरात से निकल कर दिल्ली पहुंचते हैं ! राज्य का मुखिया होने से लेकर देश का मुखिया बनने की दौड़ में भाजपा में सब से आगे ! और फिर शुरु होता है खेल साम-दाम-दंड-भेद का | अटल जी आडवाणी जी मुरली मनोहर जोशी जी जैसे नेताओं के नेतृत्व में जो भाजपा श्री राम के बताये मार्ग के अनुसार चल रही थी नरेंद्र मोदी जी ने उस भाजपा को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरण चिन्हों पर चलने वाली भाजपा को कर्मयोगी श्री कृष्ण की राह पर ले आते हैं। श्री कृष्ण अधर्मी को मारने में किसी भी प्रकार की गलती संकोच नहीं करते हैं। छल हो तो छल से, कपट हो तो कपट से, अनीति हो तो अनीति से, अधर्मी को नष्ट करना ही उनका ध्येय होता है।
इसीलिये वो अर्जुन को केवल कर्म करने की शिक्षा देते हैं। बिना सत्ता के आप कुछ भी नहीं कर सकते हैं। इसलिये भाजपा के कार्यकर्ताओं को चाहिये कि कर्ण का अंत करते समय कर्ण के विधवा विलापों पर ध्यान ना दें। केवल ये देखें कि अभिमन्यु की हत्या के समय उनकी
नैतिकता कहां चली गई थी?
कर्ण के रथ का पहिया जब कीचड़ में धंस गया, तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा, पार्थ! देख क्या रहे हो इसे समाप्त कर दो?
संकट में घिरे कर्ण ने कहा, यह तो अधर्म है देवकीनंदन।
भगवान श्री कृष्ण ने कहा, अभिमन्यु को घेर कर मारने वाले और द्रौपदी को भरे दरबार में वेश्या कहने वालों के मुख से आज धर्म-अधर्म की बातें करना शोभा नहीं देती हैं।
आज राजनीतिक गलियारा जिस तरह से संविधान की बातें करता है, तो लगता है जैसे हम पुनः महाभारत युग में आ गये हैं। विश्वास रखो, महाभारत का अर्जुन नहीं चूका था। आज का अर्जुन भी नहीं चूकेगा।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारतः।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम॥
चुनावी रण में अमित शाह जी जो कुछ भी जीत के लिये, पार्टी के लिये कर रहे हैं, वह सब उचित है साम-दाम-दंड-भेद राजा या क्षत्रिय द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियां हैं, जिन्हें उपाय-चतुष्टय (चार उपाय) कहा जाता है। राजा को राज्य की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने के लिये सात नीतियां वर्णित हैं। उपाय-चतुष्टय के अलावा तीन अन्य हैं; माया, उपेक्षा तथा इन्द्रजाल।
राजनीतिक गलियारे में आज ऐसा विपक्ष नहीं है, जिसके साथ नैतिक खेल खेला जाये। सीधा धोबी पछाड आवश्यक है, इस तूफानी जैसे को तैसा के तरीके से। मैंने अपने जीवन काल में भाजपा को जीतते हुए भी देखा है हारते हुये भी देखा है अभी हाल फिलहाल में बिहार जीता, बल्कि अगर ये कहूं कि जीता नही रगड़ के धूल में मिला दिया है भाजपा समूचे विपक्ष को वो भी तब जब कि बड़े बज़े (कथित) बुद्धिजीवी पत्रकार या और भी कई तरह के विशिष्ट व्यक्तियो द्वारा हर तरह से विपक्ष के साथ खड़े रहने के और तमाम बीजेपी विरोधी दलो के द्वारा झूठ प्रोपेगैंडा अफवाह फैलाने के बावजूद । मैं भाजपा मोदी जी व शाह जी को बंगाल जीतते हुये देख रही हूं |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, भाजपा व समस्त कार्यकर्ताओं को बंगाल फतह की अग्रिम हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ 💐🌹
मेरी पहचान भोजपुरी लोकगायिका की है…लेकिन कलाकार के साथ साथ मैं भारत देश की नागरिक भी हूं…और हर आम इंसान की तरह मेरे ऊपर भी वो सारे नियम कानून अधिकार लागू होते हैं जो एक आम इंसान पर लागू होते है…देश के किसी भी हालत में हम भी उतने ही प्रभावित होंगे…जितना एक आम इंसान…तो विचार और बातें कहने सुनने का भी हमें बराबर अधिकार है….इसलिए कोई भी मुझे ये न समझाएं कि आप लोकगायिका है आपको कुछ कहने लिखने से पहले सोचना चाहिए…..वो क्या है न भाई कोई भी आतंक और बुरी परिस्थिति मेरे लोकगायिका होने से मेरे दरवाजे से लौट नहीं जाएगी…..इसलिए बहुत दिन से एक बात दिमाग में चल रही थी…रूस के राष्ट्रपति पुतिन के दौरे के बाद लोग पहले की राजनीति और अभी की राजनीति की तुलना करने लगे सबका अपना दृष्टिकोण है
मेरा भी है…..और वो यही है…….
तनुप्रियंका #भोजपुरी_लोकगायिका






