Tuesday, July 16, 2024
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कांग्रेस ने कदम पीछे खींचे,नही लेगी फ्लोर टेस्ट

हरियाणा में भाजपा सरकार अल्पमत में चल रही है. पूरे मसले पर सियासी खींचतान जारी है. लेकिन कांग्रेस पार्टी ने फ्लोर टेस्ट (Floor Test) की मांग से हाथ पीछे खींच लिए हैं. गुरुवार को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) और प्रदेशाध्यक्ष उदयभान सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों का दल राज्यपाल से मिला. लेकिन किसी ने फ्लोर टेस्ट की मांग नहीं की. अहम बात है कि कांग्रेस ने केवल ज्ञापन सौंपा और कहा कि भाजपा सरकार को बर्खास्त किया जाए.

दरअसल, हरियाणा में मनोहर लाल को भाजपा ने सीएम पद से हटा दिया था और जेजेपी से गठबंधन तोड़ लिया था. इसके बाद नायब सैनी सीएम बने और उन्हें निर्दलीय विधायकों ने भी समर्थन किया था. कुल 48 विधायकों का समर्थन भाजपा के पास था, लेकिन इस बीच भाजपा से निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया और फिर सरकार अल्पमत में आ गई. तब से लेकर अब तक लगातार कांग्रेस बयानबाजी कर रही है. लेकिन राज्यपाल से फ्लोर टेस्ट के लिए आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा.

चंडीगढ़ में राज्यपाल से मुलाकात के बाद भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार को नैतिकता के आधार पर खुद ही त्यागपत्र देना चाहिए और राज्यपाल को हॉर्स ट्रेडिंग रोकने के लिए विधानसभा भंग करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने ज्ञापन पर विचार करने का आश्वासन दिया है. इससे पहले, 10 मई को भी कांग्रेस पार्टी ने गवर्नर को ज्ञापन दिया था.

क्यों नहीं फ्लोर टेस्ट चाहती कांग्रेस
दरअसल, कांग्रेस के पास विधानसभा में संख्याबल नहीं है. विपक्ष को मिलाकर कुल 44 विधायक जरूर भाजपा के विरोध में हैं. लेकिन इनमें से जेजेपी में फूट है. वहीं, कांग्रेस को यह भी आशंका है कि फ्लोर टेस्ट के दौरान जेजेपी और अन्य विधायक भाजपा का समर्थन कर सकते हैं. अहम बात है कि विधानसभा चुनाव को भी ज्यादा वक्त नहीं बचा है और ऐसे में कांग्रेस जल्द बाजी नहीं करना चाहती है. तीसरी बात यह भी है कि नायब सैनी जब सीएम बने थे तो उस दौरान फ्लोर टेस्ट हुआ था और छह माह में दोबारा फ्लोर टेस्ट नहीं होगा.

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