Friday, May 24, 2024
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कांग्रेस सदमे में,पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा में शामिल

 

रेड्डी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। दो जून, 2014 को तेलंगाना राज्य के गठन से पहले वह संयुक्त आंध्र प्रदेश के अंतिम मुख्यमंत्री थे। रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी न तो विश्लेषण कर रही है कि गलती क्या है और न ही वे सही करना चाहते हैं।

नयी दिल्लीः भाजपा में शमिल होने के बाद आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम किरण कुमार रेड्डी ने कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी यही सोचती हैं कि मैं ही सही हूं और देश की जनता सहित बाकी सब गलत हैं। कांग्रेस के पूर्व नेता ने कहा कि इसी विचारधारा कि वजह से मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया। अविभाजित आंध्र प्रदेश के अंतिम मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी शुक्रवार को भाजपा में शामिल हो गए।

पूर्व पार्टी पर निशाना साधते हुए रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान के गलत फैसलों की वजह से राज्य दर राज्य पार्टी टूट रही, यह एक राज्य की बात नहीं। कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि एक पुरानी कहानी है कि मेरा राजा बहुत बुद्धिमान है वह अपने आप नहीं सोचता और न ही किसी का सुझाव मानता है। आप सबको पता चल गया होगा कि मैं क्या कहना चाहता हूं।

एन. किरण कुमार रेड्डी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी की मौजूदगी में रेड्डी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।  किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोगों के मत को नहीं समझ पा रही है। कांग्रेस पार्टी न तो विश्लेषण कर रही है कि गलती क्या है और न ही वे सही करना चाहते हैं। बकौल रेड्डी-  वह यही सोचते हैं कि मैं ही सही हूं और देश की जनता सहित बाकी सब गलत हैं। इसी विचारधारा कि वजह से मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।

गौरतलब है कि गुरुवार को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। अनिल एंटनी ने भी कांग्रेस पार्टी पर दो-तीन लोगों के हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।  इसी साल मार्च महीने में रेड्डी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

सितंबर, 1959 में जन्मे रेड्डी ने 25 नवंबर, 2010 से 01 मार्च, 2014 तक अविभाजित आंध्र प्रदेश के 16वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। दो जून, 2014 को तेलंगाना राज्य के गठन से पहले वह संयुक्त आंध्र प्रदेश के अंतिम मुख्यमंत्री थे।

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