Monday, June 24, 2024
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सनसनीखेज खुलासा: 1 लाख से ज्यादा कन्वर्शन मिशनरियों ने भाजपा के खिलाफ काम किया, न प्रधानमंत्री कार्यालय को ना गृह मंत्रालय को सुध

भाजपा का 272 का आंकड़ा नही छूने के पीछे कई कारण रहे,
विशेषकर उत्तर प्रदेश में 17 प्रत्याशियों की जानकारी पहले से थी कि ये पासिंग मार्क्स से नीचे चल रहे हैं,
इन सबसे अलग हटकर एक बड़ा षड्यंत्र सामने आया है,सबको ये तो जानकारी है कि जहां कांग्रेस की सरकार बनती है वहां ईसाई मिशनरियों को खुली छूट मिलती है,पंजाब में तो सिखों को बड़ी तादाद में ईसाई बनाया गया है,कांग्रेस के तत्कालीन मंत्रियों को ऐसे समारोह में जाने की पाबंदी भी थी वो भी समय से और मंच से तारीफ भी,
इस लोकसभा चुनाव में जो सनसनीखेज खुलासा हुआ है वो यह कि,
1. मिशनरियों का पूरा एक समूह देश भर में फैलाया गया,
2.इनकी संख्या एक लाख से ज्यादा थी
3.आम आदमियों में घुल मिल जाना विशेषकर दलित बस्तियों में,
4.वहां के चौराहे, चौक और चबूतरे पर संविधान खत्म,आरक्षण खत्म,मनु स्मृति लागू और ब्राह्मण,ठाकुर,बनियों को गाली देने का काम
5.अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति वर्ग को हर स्तर एहसास कराना की तुम हिन्दू नही।
6.इन एक लाख में 17 हज़ार महिलाएं .

 

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आ चुके हैं। बीजेपी की अगुवाई में एनडीए ने लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया है। लगातार 10 साल सत्ता में रहने के बावजूद एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत का प्राप्त होना जनमानस का स्पष्ट संदेश है। इस बीच, बीजेपी ने कई राज्यों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने मध्य प्रदेश में अपना चुनावी प्रदर्शन बेहतर से भी बेहतरीन किया है। ऐसे कई राज्यों में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एनडीए को तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में मदद की है। आइए, आपको बताते हैं कि किन-किन राज्यों में बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
मध्य प्रदेश : भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सभी 29 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है। लोकसभा चुनाव के इतिहास में सबसे बड़ी जीत इस बार इंदौर में मिली है। इंदौर में बीजेपी प्रत्याशी शंकर लालवानी ने 11.75+ लाख वोटों से जीत हासिल किया है। यही नहीं, इस बार बीजेपी ने कॉन्ग्रेस और कमलनाथ परिवार का गढ़ मानी जाने वाली छिंदवाड़ा की सीट भी फतह कर ली है।
अरुणाचल प्रदेश : भारत में सूर्य की किरणें जिस राज्य में सबसे पहले पड़ती हैं, वो राज्य है अरुणाचल प्रदेश। इस राज्य में 2 लोकसभा सीटें हैं और दोनों लोकसभा सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को प्रचंड जीत हासिल हुई है। अभी दो दिन पहले ही 2 जून 2024 को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में भी बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश में क्लीनस्वीप करते हुए 2 तिहाई से भी अधिक सीटों पर जीत हासिल की थी।
त्रिपुरा : कभी कम्युनिष्टों का गढ़ रहा त्रिपुरा अब भगवा ध्वज उठाए हुए है। त्रिपुरा की दोनों लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। यहाँ विपक्षी दल कोई खास चुनौती तक पेश नहीं कर पाए।

उत्तराखंड : देवभूमि उत्तराखंड में 5 लोकसभा सीटें हैं। उत्तराखंड की पाँचों लोकसभा सीटों पर एक बार फिर से बीजेपी ने क्लीवस्वीप किया है। बीजेपी के हरेक उम्मीदवार को प्रचंड जीत मिली है। कॉन्ग्रेस पार्टी का कोई उम्मीदवार किसी भी सीट पर टक्कर देने की स्थिति में नहीं दिखा। यही वजह रही कि चुनाव प्रचार के दौरान भी कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं ने उत्तराखंड से दूरी बनाए रखी, मानों उन्हें पता हो कि हर बार की तरह इस बार भी जनता कॉन्ग्रेस को भाव नहीं देने वाली।
हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश राज्य की विधानसभा में कॉन्ग्रेस की सरकार है। इसके बावजूद हिमाचल की सभी 4 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ ही मंडी की सीट से कंगना रनौत तक ने बड़े अंतर से जीत हासिल की है। हिमाचल प्रदेश में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन को सुधारा है।
अंडमान & निकोबार द्वीप समूह : देश के सुदूर दक्षिण-पूर्वी द्वीपीय केंद्रशासित प्रदेश की एकमात्र लोकसभा सीट पर बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है। अंडमान & निकोलबार द्वीप समूह पर भी भगवा लहरा रहा है।
दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी ने पिछले दो चुनावों में भी क्लीन स्वीप किया था। दिल्ली में बीजेपी द्वारा क्लीनस्वीप की हैट्रिक लगा दी गई है। यहाँ बीजेपी को रोकने के लिए कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर जोर लगाया। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो जनता से यहाँ तक अपील की थी कि अगर उन्हें जेल जाने से बचाना है, तो आम आदमी पार्टी को जिताना होगा। इसके बावजूद दिल्ली में विपक्षी दलों की सभी कोशिशों को ध्वस्त करते हुए बीजेपी ने सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज की है।

3 राज्यों में शानदार जीत, बस एक कदम पीछे रह गई बीजेपी

गुजरात : लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के विजय रथ को गुजरात में रोकने की कोशिश कर रहे कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी ने यहाँ भी हाथ मिला। इसके बावजूद दोनों ही दलों को असफलता का मुँह देखना पड़ा। गुजरात में बीजेपी ने गुजरात की 26 में से 25 लोकसभा सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस को बनासकाँठा(सुरक्षित) सीट से एकमात्र जीत मिली, वहीं 2 सीटों पर लड़ी आम आदमी पार्टी को निराशा ही हाथ लगी।
छत्तीसगढ़ : बीजेपी ने छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से 10 पर प्रचंड जीत हासिल की। कॉन्ग्रेस को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली। कोरबा सीट से कॉन्ग्रेस की प्रत्याशी को जीत मिली, बाकी की सभी 10 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भूपेश बघेल को भी हार झेलनी पड़ी।
ओडिशा में बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन : भारतीय जनता पार्टी ने ओडिशा में शानदार प्रदर्शन किया है। विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत तो मिला ही, लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में बीजेपी ने 19 सीटों पर जोरदार जीत दर्ज की है। ओडिशा में कॉन्ग्रेस और बीजेडी को महज 1-1 सीटों पर जीत मिली है।

 

देश के 2024 लोकसभा चुनावों का परिणाम स्पष्ट हो गया है। भारतीय जनता पार्टी इन चुनावों में देश की सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। उसकी सीटें इस बार 240-45 रही हैं। NDA गठबंधन को देश ने स्पष्ट बहुमत दिया है। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस की सीटें भी इस बार बढ़ी हैं, वह इस बार 98 सीट पाने में सफल रही है। भाजपा समर्थक जहाँ स्पष्ट बहुमत ना पाने पर चिंतित हैं तो वहीं कॉन्ग्रेस 100 सीट भी ना पाकर जोड़तोड़ की राजनीति में लग गई है।

भाजपा की सीट घटीं पर जीत अब भी बड़ी

भाजपा की इस लोकसभा चुनाव में सीटें घट गई हैं। वह 303 से 240 पर आ गई है, यह सत्ता में दस वर्ष रहने के बाद हुआ है। यह बात सही है कि यह परिणाम उसके अनुमानों के अनुसार नहीं रहा। उसे जहाँ अकेले दम पर बड़े बहुमत की उम्मीद थी, वहीं उसके गठबंधन को बहुमत मिला। लेकिन सत्ता में दस वर्षों तक रहने वाली किसी पार्टी के लिए यह प्रदर्शन खराब नहीं कहा जा सकता। भाजपा का यह प्रदर्शन अभूतपूर्व है और वह तीसरी बार सत्ता में लौटने में सफल रही है। यह कारनामा कर पाना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

यदि आप 2014 को याद करें तो कॉन्ग्रेस 206 सीटों से 44 सीटों पर आ गई थी। वह विपक्ष का दर्जा नहीं ले पाई थी। ऐसे में भाजपा का सत्ता में लौटना ही बड़ी बात है। भाजपा को 2014 और 2019 जैसा बहुमत इस बार लोकसभा चुनावों में नहीं मिला लेकिन उसके गठबंधन NDA को साफ़ बहुमत जनता ने दिया है।

NDA का तीसरी बार सरकार में लौटना दिखाता है कि देश की जनता अभी भी उसमें विश्वास रखती है और सरकार के लिए उसे सबसे उपयुक्त मानती है। भाजपा इससे पहले 2014 और 2019 में भले ही अकेले दम पर बहुमत पाई हो लेकिन उसने सरकार को हमेशा से सहयोगियों के साथ मिलकर चलाया है। देश में चुनाव पूर्व के एक संयुक्त गठबंधन की राजनीति को भी भाजपा ने 1990 के दशक से ही बढ़ाया है।

कॉन्ग्रेस हारी पर दंभ जीत जैसा

वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस को देश ने एक बार फिर नकार दिया है। उसे देशवासियों ने भाजपा के विकल्प के रूप में मौका नहीं दिया। कॉन्ग्रेस की 2024 लोकसभा चुनावों में सीटें जरूर बढ़ी हैं लेकिन वह फिर से तीन अंकों वाली सँख्या में नहीं पहुँच सकी। मध्य प्रदेश और दिल्ली में उसका खाता नहीं खुल सका। इन सबके बाद भी कॉन्ग्रेस नेताओं की भावभंगिमा जीते हुए भाजपा नेताओं से भी अधिक जश्न वाली है। सत्ता में ना आने की समीक्षा करने की जगह राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गाँधी इसे अपनी बड़ी जीत की तरह दिखा रहे हैं।

इन चारों नेताओ की एक तस्वीर सामने आई है, जिसमें यह अपनी करारी हार को जीत तरह पेश कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के नेता 100 सीटों से भी कम जीतने के बाद भी दंभ में हैं और इसे बड़ी जीत बताने में विश्वास कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार बनाने को लेकर तक दावा कर दिया। जनता के विपक्ष में बैठने में फैसले को स्वीकार करने की बजाय उन्होंने जोड़तोड़ की राजनीति करने का संकेत अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया।

कॉन्ग्रेस की इसी दंभ भरी राजनीति के चलते वह देश के 3 राज्यों में सिमट गई है। उसे लोकसभा में भाजपा जैसी क्लीन स्वीप वाली सफलताएँ राज्यों में नहीं मिल रही और उसका संगठन भी कमजोर होते जा रहा है। लेकिन उसी परिवारवादी राजनीति की यह मजबूरी है कि वह इसे भी राहुल गाँधी की जीत की तरह पेश करे ताकि उनके नेतृत्व पर प्रश्न ना उठें।

विपक्ष की भूमिका से न्याय करे कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस को 2024 लोकसभा चुनाव में एक बार फिर विपक्ष में बैठने का आदेश मिला है। उसे 2014 और 2019 में यही जनादेश मिला था लेकिन उसने इस भूमिका के साथ न्याय नहीं किया। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में विपक्ष की बड़ी भूमिका होती है। कॉन्ग्रेस ने इस भूमिका को निभाने में कोताही बरती है और विपक्ष रहते हुए देश की तरक्की में भागीदार बनने की जगह अड़चने डालने का प्रयास किया है। कॉन्ग्रेस ने इस दौरान अपना एजेंडा चलाया है।

वह कई बार देश विरोधी ताकतों के साथ खड़ी दिखाई दी है। वह पीएम मोदी और भाजपा के विरोध में कई बार राष्ट्र विरोध तक पहुँची है। चाहे उसके नेताओं का सेना प्रमुख को गुंडा कहना हो या फिर सर्जिकल स्ट्राइक पर प्रश्न उठाना। इन घटनाओं ने उसके सशक्त विपक्ष होने की साख पर प्रश्न खड़े किए हैं। उसके इन स्टैंड के कारण वह चीन और पाकिस्तान की भाषा बोलते दिखाई दी है। उसकी जीत को लेकर भी पाकिस्तान से समर्थन आता रहा है।

तीसरी बार भी विपक्ष में बैठने के सन्देश को कॉन्ग्रेस स्वीकार करने की जगह वह अपनी विपक्ष की जिम्मेदारी से भाग रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खरगे ने साफ़ किया कि वह सहयोगियों से सरकार बनाने को लेकर बात करेंगे जो कि दिखाता है कि वह पुनः तोड़फोड़ वाली राजनीति में विश्वास कर रही है।

इसके अलावा यह भी सूचना आई कि INDI गठबंधन की तरफ से नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू से शरद पवार ने सम्पर्क साधा है। हालाँकि, इन खबरों का खंडन हुआ लेकिन राजनीति में ऐसी खबरें और उनके खंडन को पूरी तरह से सच और झूठ नहीं मानना चाहिए। राजनीति में शब्दों का कहने से अधिक एक्शन में मतलब होता है।

भाजपा की सीटें घटी हैं, यह बात सत्य है लेकिन इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि देश की जनता ने कॉन्ग्रेस को अपना विकल्प माना है। स्थानीय चुनावी कारणों से भाजपा के प्रदर्शन में अंतर जरूर आया है लेकिन जनादेश उसी के पास है। पीएम मोदी, जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गाँधी के बाद तीसरे ऐसे नेता होने जा रहे हैं जो तीन बार प्रधानमंत्री बनेंगे। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, ऐसे में कॉन्ग्रेस का अतिउल्लास दिखाना काफी भौंडा लगता है।

(सूत्रानुसार)

 

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