Tuesday, April 16, 2024
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एक एनकाउंटर जिसपर सोनिया गांधी के आंसू नही रुके थे,165 मौत के आरोपी को मिली सज़ा ए मौत

दिल्ली पुलिस साधारण पोशाक में सेल्समैन बनकर बाटला हाउस पहुंची थी। शुरुआत में स्थानीय लोगों को कुछ पता नहीं चला था, लेकिन बाद में आतंकियों के साथ एनकाउंटर की खबर से देश भर में हड़कंप मच गया था। आरिज खान ने भी पुलिस पर गोलियां चलाई थीं। अपने दो साथियों के मारे जाने के बाद आरिज और शहजाद वहां से फरार होने में सफल हो गए थे। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी आरिज एनकाउंटर के बाद एक महीने तक विभिन्न प्रदेशों में छिपता रहा। इसके बाद वह नेपाल भाग गया। वहां अब्दुल सुभान कुरैशी के साथ पहचान छिपाकर रह रहा था। वहीं नेपाली युवती से शादी भी कर ली थी। कुछ समय बाद दोनों सऊदी अरब चले गए। बाद में दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2018 में भारत-नेपाल सीमा से आरिज को गिरफ्तार किया था।

विस्फोटक बनाने में माहिर
मुजफ्फरनगर के एक कालेज से बीटेक डिग्रीधारी आरिज खान विस्फोटक बनाने में माहिर है।

 

धमाकों से दहल गई थी दिल्ली
दरअसल, 13 सितंबर, 2008 को एक के बाद एक करोलबाग, कनाट प्लेस और ग्रेटर कैलाश में हुए बम धमाके में 30 लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हुए थे। मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को आतंकियों के दिल्ली में ही छुपे होने की सूचना मिली थी। जांच के बाद पता चला था कि बम धमाके को इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों ने अंजाम दिया है।

राजनीतिक स्तर पर हुआ विरोध
एनकाउंटर के बाद पुलिस ने आतंकियों को मदद पहुंचाने वाले कई स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया था। इसका राजनीतिक स्तर पर काफी विरोध हुआ था। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्रों ने भी एनकाउंटर को फर्जी बताकर पुलिस का विरोध करना शुरू कर दिया था। संसद में भी एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग उठी थी।
अपने रुख पर डटी रही पुलिस

तमाम विरोध के बावजूद दिल्ली पुलिस अपने रुख पर डटी रही। उसका स्पष्ट मानना था कि दिल्ली में हुए सीरियल ब्लास्ट में आरिज खान की अहम भूमिका थी। आइएम आतंकी मुहम्मद सैफ व खालिद उर्फ कोडी कर्नाटक के उडुपी से विस्फोटक लेकर दिल्ली आए थे। आरिज उन्हें लेने गया था। आरिज व साजिद ने लाजपत नगर मार्केट समेत विभिन्न बाजारों से विस्फोट का सामान खरीदा और बम धमाके से पहले सभी जगहों की रेकी की थी। बाद में बम तैयार कर बम धमाके कराए थे।

आतंकियों में मोहन चंद शर्मा का था खौफ
दिल्ली पुलिस के जांबाज इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नाम से आतंकी खौफ खाते थे। 2005 में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के कुछ आतंकियों ने हमला किया था। इस मामले की जांच में मोहन चंद शर्मा ने उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम की काफी मदद की थी। पता चला था कि इस घटना को पाकिस्तानी आतंकी आसिफ उर्फ कारी उर्फ सैफुल्ला ने अंजाम दिया था और वह दिल्ली में भी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था, लेकिन मोहन चंद शर्मा की टीम ने दोनों को दिल्ली में दबोच लिया।

आरिज की सजा पर खामोश नसीरपुर
वहीं आजमगढ़ संवाददाता ने बताया कि आरिज को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी के बाद उसका पूरा गांव स्तब्ध है। जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर बिलरियागंज क्षेत्र के नसीरपुर गांव में सबकुछ सामान्य तो दिखा लेकिन लोगों के चेहरे का भाव जरूर बदला था। एक ही जवाब मिला कि कुछ मत पूछिए, हमको कोई जानकारी नहीं है।
गांव के लोगों के मुताबिक आरिज तीन भाइयों में बड़ा है और बीटेक करने मुजफ्फरनगर गया था। वहां कैसे और किन परिस्थितियों में बुरी सोहबत में पड़ा, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। आरिज के दो छोटे भाई दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं। पिता का इंतकाल हो चुका है। मां पहले शहर में रहती थीं, इस समय कहां हैं, नहीं पता। आरिज के पिता जफरे आलम पांच भाइयों में सबसे छोटे थे और दिल्ली में काम करते थे। दूसरे नंबर के भाई फखरे आलम बिलरियागंज में डाक्टर हैं। गांव वालों के अनुसार तीसरे नंबर के भाई बदरे आलम आइएएस थे।

 

 

 

बाटला हाउस एनकाउंटर: IM आतंकी आरिज खान को फाँसी की सजा, दिल्ली की कोर्ट ने सुनाया फैसला

बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन (IM) के आतंकी आरिज खान को मौत की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस बताया। साथ ही आरिज पर 11 लाख का आर्थिक दंड भी लगाया।

इससे पहले अदालत ने आरिज की सजा पर फैसला शाम 4 बजे तक सुरक्षित रख लिया था। पुलिस ने अदालत से निरीक्षक मोहन चंद शर्मा की हत्या के मामले में आरिज खान को मौत की सजा देने का अनुरोध किया था। बीती सुनवाई में अदालत ने इस मामले में उसे दोषी करार दिया था। आरिज खान को दिल्ली पुलिस ने 2018 में गिरफ्तार किया था।

अदालत ने आरिज खान को आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307 के तहत दोषी करार दिया है। 2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर केस के बाद से ही आरिज फरार था और 2018 में नेपाल से गिरफ्तार किया गया। आतंकी आरिज खान को बाटला हाउस एनकाउंटर में जान गँवाने वाले इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की हत्या के लिए दोषी पाया गया है।

अस्‍पताल में इंस्‍पेक्‍टर शर्मा ने तोड़ा था दम

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पाँच आतंकी बाटला हाउस के एक फ्लैट में किराए पर मकान लेकर रह रहे हैं। 19 सितंबर 2008 की सुबह इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा आतंकियों को पकड़ने के लिए टीम लेकर बाटला हाउस में बिल्डिंग नंबर एल-18 के फ्लैट नंबर 108 में पहुँचे। उसी वक्त आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उन्हें तीन गोलियाँ लग गईं। बाद में इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस दौरान दो आतंकियों को मार गिराया गया था।

कौन है आतंकी आरिज खान?

साल 2008 में दिल्ली-जयपुर-अहमदाबाद और यूपी की अदालतों में जो धमाके हुए थे, उनके मुख्य साजिशकर्ताओं में आरिज का नाम था। इन सभी धमाकों में कुल 165 लोगों की जान गई थी, जबकि 535 लोग घायल हुए थे। धमाकों के बाद तब आरिज पर 15 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था और उसक खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस निकाला था।
बाटला हाउस वही एनकाउंटर है जिसको लेकर फरवरी 2012 में आजमगढ़ की एक रैली में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि जब उन्होंने एनकाउंटर की तस्वीरें सोनिया गाँधी को दिखाई, तब उनकी आँखों में आँसू आ गए।

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