Monday, February 23, 2026
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सोनिया गांधी ने कैसे बनवाया वोटर कार्ड?

भारत का नागरिक बनने से पहले वोटर कैसे ब

 

दिल्ली की एक अदालत ने कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सोनिया गाँधी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट में दायर अर्जी में दावा किया गया है कि उनका नाम नई दिल्ली से 1980 वोटर लिस्ट में जोड़ा गया, फिर 1982 में हटा दिया गया। नोटिस नागरिकता लेने से पहले वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने को लेकर है। सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी की शादी 25 फरवरी 1968 को हुई थी। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने 1983 में देश की नागरिकता ली।

अर्जी में कहा गया है कि सोनिया गाँधी का नाम 3 साल पहले वोटर लिस्ट में जोड़ दिया गया था। इस संबंध में एक अर्जी मजिस्ट्रेट कोर्ट में खारिज की गई थी, जिसके खिलाफ रिवीजन अर्जी दायर की गई थी। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देने से मना कर दिया था।

फर्जी दस्तावेज का किया गया होगा इस्तेमाल- याचिकाकर्ता

याचिका में कहा गया है कि पहली बार नाम जोड़ने में फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया होगा। क्योंकि उस वक्त उनके पास देश की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज नहीं थे। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि ये अपराध है इसलिए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाए।

स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने ने क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन पर सीनियर एडवोकेट पवन नारंग की शुरुआती दलीलें सुनीं और सोनिया गाँधी और दिल्ली पुलिस से जवाब माँग लिया। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी, 2026 को होगी।

अपनी अर्जी में त्रिपाठी ने कहा है कि सोनिया गाँधी का नाम 1980 में नई दिल्ली चुनाव क्षेत्र के इलेक्टोरल रोल में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। अर्जी में जानकारी दी गई है कि सोनिया गाँधी का नाम 1980 में जोड़ा गया, 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में जोड़ा गया।

इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि कोर्ट याचिकाकर्ता की माँग के अनुसार जाँच शुरू नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति की नागरिकता से जुड़े मामले केंद्र सरकार के खास अधिकार क्षेत्र में आते हैं और किसी व्यक्ति को इलेक्टोरल रोल में शामिल करने या बाहर करने की योग्यता तय करने का अधिकार भारत के चुनाव आयोग (ECI) के पास है।

कोर्ट ने माँगा सोनिया गाँधी से जवाब

नागरिक बने बगैर वोटर लिस्ट में नाम होने के फर्जीवाड़े को लेकर कोर्ट ने सोनिया गाँधी के खिलाफ दाखिल रिवीजन पिटीशन पर नोटिस जारी किया और जवाब माँगा। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है।

सोनिया गाँधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिक बनीं। 1980 में सोनिया गाँधी का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया गया। जबकि 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। याचिका में वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का भी जिक्र किया गया है। अब सवाल यह है कि 1980 में नागरिकता किस आधार पर दी गई।

क्या है सोनिया गाँधी के वोटर लिस्ट का मामला

सोनिया गाँधी का नाम पहली बार 1980 में मतदाता सूची में दिखाई दिया था, उस वक्त उनके पास इटली की नागरिकता थी। इसके तीन साल बाद वो भारत की नागरिक बनीं। 1980 में गाँधी परिवार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आधिकारिक निवास 1, सफदरजंग रोड में रहता था। 1980 में गाँधी परिवार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आधिकारिक निवास 1, सफदरजंग रोड में रहता था।

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