25 प्रोफेसर नियुक्त किए जिनमें 16 ईसाई? जानिए- क्या है DU के सेंट स्टीफंस कॉलेज का भर्ती विवाद, क्यों DUTA अध्यक्ष ने कहा- गैर-ईसाइयों की होती है अनदेखी

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से संबद्ध सेंट स्टीफंस कॉलेज एक बार फिर विवादों में है। कॉलेज में हाल ही में 25 शिक्षकों की नई नियुक्तियाँ की गई और अब दावा किया जा रहा है कि इनमें से 16 ईसाई/अल्पसंख्यक हैं। ये मामला इसलिए भी तूल पकड़ गया, क्योंकि ये नियुक्तियाँ करीब दर्जनभर हिंदू शिक्षकों को कॉलेज से निकालने के ठीक बाद में की गईं। इनमें से कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद कोर्ट ने शिक्षकों को निकालने के आदेश पर रोक लगा दी।
यह मामला सिर्फ शिक्षक नियुक्तियों तक सीमित नहीं है बल्कि कॉलेज प्रशासन पर यूनिवर्सिटी के नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से फैसले लेने, लंबे समय से कार्यरत गैर-ईसाई ऐड हॉक शिक्षकों को बाहर करने और नए प्रिंसिपल की नियुक्ति में भी नियमों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं। इस पूरे विवाद पर दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (DUTA) ने भी खुलकर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। DUTA के अध्यक्ष वीके नेगी ने कहा कि कॉलेज में गैर-ईसाइयों को प्राथमिकता नहीं दी जाती है।
सेंट स्टीफंस में 25 में से 16 सिर्फ ईसाई शिक्षकों की भर्ती
यह विवाद सेंट स्टीफंस कॉलेज में हुई नई शिक्षक नियुक्तियों का है, जिसमें आरोप लगे कि कॉलेज प्रशासन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और UGC की गाइडलाइन्स को नजरअंदाज करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की। DUTA ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अनारक्षित सीटों में से प्रत्येक पर 70 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी की नियुक्ति प्रक्रिया से कहीं अधिक है। यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया के अनुसार, प्रत्येक सीट पर अधिकतम 40 उम्मीदवारों को ही शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है।
इसके बाद 9 मई 2026 को सेंट स्टीफंस कॉलेज की ओर से चुने गए सहायक प्रोफेसरों की लिस्ट जारी की गई जिससे विवाद और बढ़ गया। अधिसूचना के मुताबिक, 25 अनारक्षित सहायक प्रोफेसरो पदों में से 16 ईसाई हैं। इससे कॉलेज पर अल्पसंख्यक के अधिकार के नाम पर मनमानी करने के आरोप बढ़ गए। DUTA अध्यक्ष वीके नेगी ने इसे गैर-ईसाई के प्रति कॉलेज का विरोध बताया।

इन नियुक्तियों के बाद उन 12-15 ऐड-हॉक (अस्थायी) शिक्षकों में आक्रोश फैल गया, जिन्हें निकालकर कॉलेज में नई नियुक्तियाँ की गई थीं। इनमें से अधिकतर हिंदू हैं। ये शिक्षक साल 2019 से कॉलेज में कार्यरत थे। इनमें से 6 शिक्षकों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। साथ ही दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी कॉलेज को भर्ती प्रक्रिया को आगे न बढ़ाने का निर्देश दिया।
दिल्ली हाई कोर्ट में शिक्षकों ने रखी माँग
2018 से 2021 के बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रक्रिया के तहत भर्ती किए गए इन 6 शिक्षकों ने नई नियुक्तियों पर आपत्ति जताई और दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में शिक्षकों ने माँग की कि उनकी नौकरी को शुरुआत से ही पक्की माना जाए, उनकी सेवा लगातार मानी जाए, वेतन तय किया जाए, सीनियरिटी दी जाए और जो सुविधाएँ रेगुलर कर्मचारियों को मिलती हैं, वो उन्हें भी दी जाएँ।
कोर्ट में इन शिक्षकों ने कहा कि चयन सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज ने हर पद के लिए करीब 70 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया, जबकि यूनिवर्सिटी के तय नियम इससे अलग थे।
याचिका में कहा गया, “इस प्रक्रिया से कट-ऑफ स्तर नीचे कर दिया गया, ताकि कम अकादमिक अंक और कम पढ़ाने का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को मौका मिल सके। इससे ज्यादा पढ़े-लिखे, लंबे समय से पढ़ा रहे और कई सालों से कॉलेज में लगातार काम कर रहे शिक्षकों को चयन प्रक्रिया में सही और बराबरी का मौका नहीं मिल पाया।”






