Thursday, March 26, 2026
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नबालिग मुसलमान लड़कियों की बिक्री कर रहे,मुल्ले मौलवी,कोई रोक

मुल्ले मौलवी कर रहे दलाली और घेराबंदी कर रहे नाबालिग लड़कियों की

चीन और पाकिस्तान के बीच सीपेक 62 अरब डॉलर की परियोजना है.
चीन अपने अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपेक) परियोजना का इस्तेमाल कर रहा है. ऐसे समय में जब पाकिस्तान अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए संघर्ष कर रहा है, चीन उसकी मदद करने के बजाय स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, जो हो रहा है उसमें कुछ भी हैरान करने वाला नहीं है.

वास्तव में, अब सीपेक जैसे बुनियादी ढांचे को बनाने के पीछे चीन की कुटिल मंशा अधिक साफ होती जा रही है. इसी प्रोजेक्ट का फायदा उठाकर चीन अब इस्लामिक देश से महिलाओं की तस्करी कर रहा है. 2019 में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी लोग पाकिस्तान आते हैं और दूसरे धर्म की नाबालिग लड़कियों से शादी करते हैं और उन्हें वापस अपने देश ले जाते हैं.

शादी का झांसा देकर मानव तस्करी
दुनिया के जानकारों की मानें, तो चीन शादी के नाम पर मानव तस्करी कर रहा है और पाकिस्तान ने इसे रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया है. इस्लामिक देश को चीन का कर्ज चुकाना है, इस बात को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान इस मुद्दे पर चुप है, यहां तक ​​कि लड़कियों की तस्करी में भी मदद कर रहा है. माना जा रहा है कि चीनी लोग फर्जी कारोबारी दस्तावेजों के दम पर लड़कियों को अपने देश ले जा रहे हैं. रिपोर्ट्स का कहना है कि इन लड़कियों को करीब 3500 डॉलर से लेकर 5000 डॉलर तक की रकम दी जाती है.

क्या है सीपेक प्रोजेक्ट
गौरतलब है कि सीपेक 62 अरब डॉलर की परियोजना है जिसके तहत पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह को पश्चिमी चीन के शिनजियांग सूबे से जोड़ा जा रहा है. यह चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा है. इस परियोजना के लिए वर्ष 2015 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पाकिस्तान दौरे के दौरान समझौता किया गया था. परियोजना के तहत पाकिस्तान में अरबों डॉलर की लागत से बिजली संयंत्र और औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं.

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