Wednesday, April 22, 2026
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सुप्रीम कोर्ट जज का दत्तक पुत्र बताता है खुद को ये ठग,कोई भी कांड करे फोन आ जाता है,मी लार्ड के नाम से

न्यायाधीश को न्याय देने वाला और पीड़ितों को हक़ दिलाने वाला माना जाता है आज भी जज की कुर्सी को माना जाता है सच का फैसला सुनाने वाला लेकिन कल्पना करिए कि कोई जज वो भी जिला कोर्ट का नही,हाई कोर्ट का नही,यदि सुप्रीम कोर्ट का के नाम से फोन आये और “मी लॉर्ड ” की आवाज सुनाई दे कि इस ठग को इस धोखेबाज को गिरफ्तार मत कर लेना ये मेरा दत्तक पुत्र है।अधिकारियों की तो क्या मंत्रियों तक कि सिट्टी पिट्टी गुम हो जाये,पुलिस के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि 17 लोगो से ठगी करने वाले इस शख्स का का बड़ा चमत्कारिक मामला है….
1. जैसे ही कोई ठगी का आवेदन लगता है,मी लार्ड का फोन आ जाता है,जांच करो और करते रहो, कोई रिपोर्ट मत दर्ज कर लेना

2.मी लार्ड का फोन अधिकारियों तक को जाता है क्योंकि
की उपरोक्त व्यक्ति आ रहा है कार्य कर देना जैसा कहे,

अब सवाल यह है कि माननीय मी लार्ड हैं कौन,और क्या वास्तविकता में यह व्यक्ति इनका दत्तक पुत्र है?

और सबसे खास बात क्या मी लार्ड इतने फ्री बैठे रहते है कि थाने,कोर्ट या मन्त्रालय फोन लगाते रहें,
न इसको सत्यपित करने कोशिश किसी कर्मचारी या अधिकारी ने की यह ठग क्या खेल खेलता है।

यह कि उपरोक्त व्यक्ति इतना शातिर है ये पुलिस को तब पता चला जब 17 पीड़ित सड़क पर उतर आए।

वैसे हमारी तरफ से मी लार्ड की खोज जारी है जो अपने इस दत्तक पुत्र के लिए सब नियम कायदे कानून ताक पर रखकर चलते हैं।

(कोई बता नही पा रहा कौन हैं जो मी लार्ड हैं,सचमुच या कोई फर्जी)
ये है मामल
दुकान का सौदा कर 85 लाख लिए,दूसरे को बेच दी
17 लोगों के ग्रुप से पति-पत्नी ने दुकान का सौदा 1.75 करोड़ रुपए में किए। इसके बाद 85 लाख रुपए भी ले लिए । सौदा तय होने के बाद पति-पत्नी ने ये दुकान किसी और को बेच दी। इसके बाद पीड़ित पुलिस की शरण में पहुंचे। विजय नगर पुलिस ने 85 लाख की ठगी के मामले में पति-पत्नी पर केस दर्ज किया है। आरोपियों ने दुकान का सौदा करने के बाद ये दुकान दूसरे को बेच दी। फरियादी पक्ष ने विरोध किया तो एग्रीेमेंट ही फाड़ दिया। पुलिस ने शैलेष पिता रतनलाल वैष्णव निवासी प्रिकांको कॉलोनी की शिकायत पर अनिल संघवी और पत्नी चंदन संघवी निवासी स्कीम 74 के खिलाफ केस दर्ज किया है। टीआई रवींद्र गुर्जर ने बताया कि फरियादी और दूसरे अन्य 16 लोगों ने मिलकर एक ग्रुप बनाया और आरोपी से बीसीएम हाईट्स में एक दुकान का सौदा एक करोड़ 75 लाख में तय किया। इसके बाद 85 लाख रुपए भी दे भी दिए थे। इसके बाद आरोपी उन्हें रजिस्ट्री करने के नाम पर टालते रहे। इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि यही दुकान पति-पत्नी ने किसी अन्य को बेच दी है। फरियादी उनसे इस बारे में बात करने के लिए पहुंचे तो उलटा उनसे ही विवाद करना शुरू कर दिया और उनका एग्रीमेंट देखने के बहाने फाड़ दिया। पुलिस केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश कर रही है।
(सारी जानकारी पीड़ितों के बयानों के आधार पर)

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