Thursday, April 23, 2026
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18 करोड़ का खर्चा आया: देश मे भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी 2 इमारत गिराने में,जानिए इसके मालिक और कहानी एतिहासिक धोखाधड़ी की

नोएडा सुपरटेक ट्वीन टावर में बिल्डर को निर्माण की लागत 933 रुपये प्रति वर्ग फुट आई थी और कुल निर्मित क्षेत्र 7.5 लाख वर्ग फुट है यानी करीब 70 करोड़ रुपये इसे बनाने पर खर्च हुए। वहीं इसे जमींदोज करने का सौदा भी कम मंहगा नहीं है।  जिसमें बहुत अधिक विस्फोटक, जनशक्ति और उपकरण लगे हैं। इसको ढहाने में 237 रुपये प्रति वर्ग फुट का खर्चा आ रहा है जो करीब 20 करोड़ होगा।

ढहाने का पैसा भी देगी कंपनी

ढहाने की कुल लागत में से, सुपरटेक लगभग 5 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है और शेष लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि मलबे को बेचकर प्राप्त की जाएगी, जो कि 4,000 टन स्टील सहित लगभग 55,000 टन होगी। इसके अलावा, इमारतों को गिराने वाली कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग ने आसपास के क्षेत्र में किसी भी क्षति के लिए 100 करोड़ रुपये का बीमा कवर भी हासिल किया है।

1.13 करोड़ थी 3 BHK की कीमत

सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट में एक 3बीएचके अपार्टमेंट की लागत लगभग 1.13 करोड़ रुपये थी। दोनों इमारतों में करीब 915 फ्लैट थे, जिससे कंपनी को करीब 1,200 करोड़ रुपये की कमाई होती। कुल 915 फ्लैटों में से लगभग 633 की बुकिंग हो चुकी थी और कंपनी ने घर खरीदारों से लगभग 180 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। अब सुपरटेक को घर खरीदारों का पैसा 12 फीसदी ब्याज के साथ वापस करने को कहा गया है।

जानिए लागत और मलबा हटाने का समय

लगभग 3 हजार ट्रक मलबा निकलेगा

मलबे में लगभग 4 हजार टन स्टील होगा

ट्विन टावर जब गिरेगा तो मलबे के साथ 35,000 घन मीटर धूल का गुबार भी पैदा होगा

इस मलबे को ढोने के लिए ट्रक करीब 1200 से 1300 चक्कर लगाएंगे

मलबे को साफ होने में कम से कम 3 महीने का वक्त लगेगा

जो मलबा निकलेगा उसकी कीमत 13 करोड़ तक होगी

टावर को गिराने में करीब 18 करोड रुपए का खर्च आएगा

टावर्स को गिराने से पहले आसपास के इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है। इंसानों के साथ साथ जानवरों का भी ख्याल रखा जा रहा है। सुपरटेक टावर्स के ढहने से निकलने वाला मलबा नोएडा में अलग-अलग जगहों पर डंप किया जाएगा। लेकिन इन टावर्स को गिराना इंजीनियर्स के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होने वाला है।

200 करोड़ से ज्यादा की लागत में बने इन टावर्स को गिराने में करीब 20 करोड़ का खर्च आने की बात कही जा रही है। ऐसे में एक सवाल हर किसी के मन में कौंध रहा है कि आखिर इसे बनाने वाला शख्स कौन है? इन ट्विन टावर्स का मालिक कौन है और कैसे उसने इतनी बड़ी इमारत खड़ी कर दी?

तो आज हम आपको ट्विन टावर के मालिक के बारे में सबकुछ बताएंगे…

twin tower 

कौन है ट्विन टावर का मालिक? 
ये ट्विन टावर सुपरटेक कंपनी ने बनाया था। सुपरटेक कंपनी के मालिक का नाम आरके अरोड़ा है। आरके अरोड़ा ने 34 कंपनियां खड़ी की हैं। ये कंपनियां सिविल एविएशन, कंसलटेंसी, ब्रोकिंग, प्रिंटिंग, फिल्म्स, हाउसिंग फाइनेंस, कंस्ट्रक्शन तक के काम करती हैं। यही नहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आरके अरोड़ा ने तो कब्रगाह बनाने तक की कंपनी भी खोली है।

आरके अरोड़ा 

कैसे अरोड़ा ने शुरू की कंपनी? 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरके अरोड़ा ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर सात दिसंबर 1995 को इस कंपनी की शुरुआत की थी। कंपनी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना विकास प्राधिकरण क्षेत्र, मेरठ,

दिल्ली-एनसीआर समेत देशभर के करीब 12 शहरों में रियल स्टेट के प्रोजेक्ट लॉन्च किए। देखते ही देखते अरोड़ा ने रियल स्टेट में अपना नाम बना लिया। इसके बाद अरोड़ा ने एक के बाद एक 34 कंपनियां खोलीं। ये सभी अलग-अलग कामों के लिए थीं।

सुपरटेक लिमिटेड शुरू करने के चार साल बाद 1999 में उनकी पत्नी संगीता अरोड़ा ने सुपरटेक बिल्डर्स एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली थी। इसके अलावा आरके अरोड़ा ने अपने बेटे मोहित अरोड़ा के साथ मिलकर पॉवर जेनरेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिलिंग सेक्टर में भी काम शुरू किया। इसके लिए सुपरटेक एनर्जी एंड पॉवर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई।

twin tower – 

32 मंजिल की इमारत खड़ी कैसे हो गई?
कहानी 23 नंवबर 2004 से शुरू होती है। जब नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर-93ए स्थित प्लॉट नंबर-4 को एमराल्ड कोर्ट के लिए आवंटित किया। आवंटन के साथ ग्राउंड फ्लोर समेत 9 मंजिल तक मकान बनाने की अनुमति मिली। दो साल बाद 29 दिसंबर 2006 को अनुमति में संशोधन कर दिया गया। नोएडा अथॉरिटी ने संसोधन करके सुपरटेक को नौ की जगह 11 मंजिल तक फ्लैट बनाने की अनुमति दे दी। इसके बाद अथॉरिटी ने टावर बनने की संख्या में भी इजाफा कर दिया। पहले 14 टावर बनने थे, जिन्हें बढ़ाकर पहले 15 फिर इन्हें 16 कर दिया गया। 2009 में इसमें फिर से इजाफा किया गया। 26 नवंबर 2009 को नोएडा अथॉरिटी ने फिर से 17 टावर बनाने का नक्शा पास कर दिया।

दो मार्च 2012 को टावर 16 और 17 के लिए एफआर में फिर बदलाव किया। इस संशोधन के बाद इन दोनों टावर को 40 मंजिल तक करने की अनुमति मिल गई। इसकी ऊंचाई 121 मीटर तय की गई। दोनों टावर के बीच की दूरी महज नौ मीटर रखी गई। जबकि, नियम के मुताबिक दो टावरों के बीच की ये दूरी कम से कम 16 मीटर होनी चाहिए।

अनुमति मिलने के बाद सुपरटेक समूह ने एक टावर में 32 मंजिल तक जबकि, दूसरे में 29 मंजिल तक का निर्माण भी पूरा कर दिया। इसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा और ऐसा पहुंचा कि टावर बनाने में हुए भ्रष्टाचार की परतें एक के बाद एक खुलती गईं। ऐसी खुलीं की आज इन टावरों को जमींदोज करने की नौबत आ गई।

twin tower 

इसे गिराने में आठ साल क्यों लग गए?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुपरटेक सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट में सात साल चली लड़ाई के बाद 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के अंदर ट्विन टावर को गिराने का आदेश दिया। इसके बाद इस तारीख को आगे बढ़ाकर 22 मई 2022 कर दिया गया। हालांकि, समय सीमा में तैयारी पूरी नहीं हो पाने के कारण तारीख को फिर बढ़ा दी गई।

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