मध्यप्रदेश में भारी बारिश के बीच भोपाल मंडीदीप के नजदीक करोड़ों की सड़क धंसने के मामले में सरकार जागी और बड़ा एक्शन लिया है। NH-46 के पुल का निर्माण करने वाली नई दिल्ली की CDS India Limited कंपनी, कंसल्टेंट इंजीनियर को ब्लेक लिस्टेड करने के साथ MPRDC के इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है। आपको बता दें वन इंडिया हिंदी की टीम ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। ऐसी तस्वीरों को देखकर यही सवाल उठ रहा है कि क्या पानी में धंस रहा है विकास?
559 करोड़ की लागत से बना था पुल
सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए पानी की तरह करोड़ों रुपए फूंके तो जाते है, लेकिन उनकी विशेषतौर पर हकीकत बारिश के दिनों में ही सामने आती है कि वह अपनी मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर कितने खरे उतरे? राजधानी भोपाल होशंगाबाद को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे NH-46 पर मंडीदीप के पास धंसा पुल इसी की बानगी है। जिस ढंग से पुल का एक हिस्सा बुरी तरह धंसा, पुल के निर्माण में 559 करोड़ की लागत आई थी। लोग यही सवाल कर रहे है कि करोड़ों की लागत वाला पुल जिसकी मजबूती का निर्माण कंपनी ने भी दावा किया होगा, वह एक बारिश भी सहन नहीं कर पाया।
कंपनी ब्लेक लिस्टेड, इंजीनियर सस्पेंड
इस पुल का निर्माण नई दिल्ली की सीडीएस इंडिया लिमेटेड कंपनी (CDS India Limited) ने किया था। कंसल्टेंट कंपनी राजस्थान की (Theme Engineering Services Pvt. Ltd.) थीम इंजीनियरिंग सर्विस प्राइवेट लिमेटेड थी। इनके पुल निर्माण से संबंधित हर काम की निगरानी रखने का जिम्मा MPRDC के इंजीनियर्स पर था। लेकिन इस बारिश में इन सभी के कामों की पोल खुल गई। सरकार को भी इनके खिलाफ एक्शन लेने मजबूर होना पड़ा। मप्र सरकार ने पुल बनाने वाली कंपनी, कंसल्टेंट कपनी को ब्लेक लिस्टेड करते हुए MPRDC के इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया है। सरकार ने कंपनी को अपने खर्चे पर चार महीने के अन्दर दोबारा पुल बनाने का निर्देश भी दिया है।
MLA सुरेन्द्र पटवा ने भी की थी घटिया निर्माण की शिकायत
भोपाल से जबलपुर इस नेशनल हाईवे जो पहले NH-12 कहलाता था, इसके निर्माण के वक्त गुणवत्ता को लेकर कई नेताओं ने भी सवाल उठाए थे। भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा ने भी जिम्मेदार विभाग के आला अफसरों से शिकायतें की थी। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
पुल निर्माण की गुणवता में भारी बारिश के वक्त उसकी क्षमता का भी ख्याल रखा जाता है। पुल की लाइफ कितनी होगी इसकी लागत के हिसाब से पहले ही मापदंड तैयार रहते है। उसके बाबजूद यह पुल इस बार बारिश नहीं झेल पाया।
40 मीटर पुल का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त
बताया जा रहा है कि पुल का लगभग 40 मीटर का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। जिसमें 20-20 मीटर की दो रिटेनिंग वॉल के साथ पुल का हिस्सा पानी में धंसा। जानकार कह रहें है कि काम पूरा होने के बाद NOC देते वक्त MPRDC ने किस तरह की जिम्मेदारी निभाई? कलियासोत ब्रिज के जिस हिस्से रिटेनिंग वॉल गिरी, उसकी डिजाइन को लेकर सवाल उठ रहे है। ये तो गनीमत थी कि रात के वक्त पुल का यह हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, जब यहाँ ट्रेफिक का दबाब कुछ कम हो है, यदि दिन के वक्त अचानक ऐसी स्थिति निर्मित होती, तो यहाँ से गुजरने वाले वाहनों के साथ बड़ी दुर्घटना भी हो सकती थी।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने की जांच की मांग
बारिश के बीच कलियासोत नदी पर बने पुल के ढहने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। विपक्ष को भी बैठे बिठाए सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुल निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है। उन्होंने ट्वीट किया और लिखा कि ‘मध्यप्रदेश में भोपाल-होशंगाबाद को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे का यह मंडीदीप का पुल पहली बारिश ही नहीं झेल पाया। क़रीब एक वर्ष पूर्व ही करोड़ों की लागत से बना यह पुल, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इसके निर्माण की जाँच होना चाहिये व इसके दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही होना चाहिये’।
अस्थाई तौर पर नए ब्रिज से दोनों ओर का ट्रेफिक बंद
कलियासोत नदी पर सामने आए इस मामले के बाद MPRDC में हडकंप मचा है। विभाग के बड़े अफसरों के गले पर भी निलंबन की तलवार लटकी है। हालाँकि सुरक्षा के मद्देनजर अभी इस पुल से वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अस्थाई तौर पर भोपाल-होशंगाबाद के दोनों ओर से इस ब्रिज को बंद कर पुराने पुल पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है।






