Tuesday, February 24, 2026
Uncategorized

बाला साहेब ठाकरे ने इसीलिए कभी उद्धव को आगे नही किया था,सत्ता के लालच में गिरे औंधे मुंह,शरद पवार को फायदा ही फायदा,जाते जाते खुद को कट्टर हिन्दू दिखाने की कोशिश

 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इसकी घोषणा राज्य की जनता को संबोधित करते हुए की. साथ ही ठाकरे ने साफ किया कि मेरे पास जो शिवसेना है, वो कोई छिन नहीं सकता है. मैं विधानपरिषद सदस्य पद से भी इस्तीफा दे रहा हूं.

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ठीक बाद राज्य की जनता को संबोधित करते हुए अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसले का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि हमारे अच्छे कामों को नजर लगी. हमने शहरों का नाम बदलने का फैसला लिया. उद्धव ठाकरे ने इस दौरान सोनिया गांधी और शरद पवार की तारीफ की.

 

उद्धव ठाकरे ने कहा कि न्याय देवता ने फैसला दिया है, फ्लोर टेस्ट के लिए कहा है. राज्यपाल का भी धन्यवाद. लोकतंत्र का पालन होना चाहिए. हम उसका पालन करेंगे. शिवसेना प्रमुख ने बागियों पर निशाना साधते हुए कहा कि आपको सामने आकर बात करनी थी. सूरत और गुवाहाटी जाकर नहीं. जिसको सबकुछ दिया वो नाराज हैं.
कैबिनेट में दिए थे संकेत
उद्धव ठाकरे ने आज कैबिनेट की बैठक में ही इस्तीफे के संकेत दे दिए थे. उन्होंने बैठक खत्म होने के बाद कहा था कि आपने ढाई साल मेरा सहयोग किया. आभारी हूं. इन ढाई साल में मुझसे गलती हुई हो, अपमान हुआ हो तो माफ़ी चाहता हूं. उन्होंने बागियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कई लोगों ने दगा भी किया. मंत्रालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने छत्रपति शिवाजी और संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर की प्रतिमाओं के सामने नमन किया.
कैबिनेट बैठक में अपने सहयोगियों का धन्यवाद करने के बाद उद्धव ठाकरे सीएम कार्यालय पहुंचे. यहां उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के सभी स्टाफ को एक साथ बुलाकर धन्यवाद दिया. मुख्यमंत्री ने पिछले ढाई साल मेंसहयोग की भावना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया.

महाराष्ट्र में जारी सियासी संग्राम (Maharashtra Political Crisis) के बीच सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court) से उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने फ्लोर टेस्ट (Floor Test) के खिलाफ उद्धव सरकार (Uddhav Thackeray) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि तय समय पर ही फ्लोर टेस्ट (Floor Test) होगा. इसका मतलब यह हुआ कि उद्धव सरकार को गुरुवार को विश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा. गुरुवार सुबह 11 बजे से शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि विधायकों की अयोग्यता का मामला लंबित होने से फ्लोर टेस्ट नहीं रुक सकता.

इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद NCP नेताओं नवाब मलिक और अनिल देशमुख को कल महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दे दी है.

इससे पहले सुनवाई  के दौरान प्रभु ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई अपनी याचिका में महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार को गुरुवार (30 जून) को बहुमत साबित करने के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल के निर्देश को अवैध करार दिया. सुप्रीम कोर्ट ने सुनील प्रभु से सवाल किया कि अगर किसी सरकार ने सदन में बहुमत खो दिया है और विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन वापस लेने वालों को अयोग्य घोषित करने के लिए कहा जाता है, तो क्या राज्यपाल को फ्लोर टेस्ट का इंतजार करना चाहिए? प्रभु का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की अवकाश पीठ के समक्ष दलील दी कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करने के लिए बाध्य हैं.

उन्होंने कहा कि राज्यपाल मंत्रियों की सलाह पर काम कर सकते हैं या नहीं कर सकते हैं, लेकिन वे किसी भी हाल में विपक्ष की सलाह पर काम नहीं कर सकते हैं. सिंघवी ने कहा कि अगर गुरुवार को बागी विधायकों को वोट देने की अनुमति दी जाती है, तो अदालत उन विधायकों को वोट देने की अनुमति देगी, जिन्हें बाद में अयोग्य घोषित किया जा सकता है, जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है.

इस पर, बेंच ने सिंघवी से पूछा कि मान लीजिए कि एक सरकार को पता है कि उन्होंने सदन में बहुमत खो दिया है और अध्यक्ष को समर्थन वापस लेने वालों को अयोग्यता नोटिस जारी करने के लिए कहा जाता है. फिर उस समय, राज्यपाल को फ्लोर टेस्ट बुलाने की प्रतीक्षा करनी चाहिए या फिर वह स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकते हैं? पीठ ने पूछा, ‘राज्यपाल को क्या करना चाहिए? क्या वह अपने विवेक का प्रयोग कर सकते हैं?’ सुनील प्रभु ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र के राज्यपाल के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को गुरुवार को बहुमत साबित करने के लिए कहा गया है.

शिवसेना की इस याचिका में दलील दी गई है कि अभी बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्य ठहराए जाने की कार्रवाई पूरी नहीं हुई है, ऐसे में बहुमत साबित करने का निर्देश पारित नहीं किया जाना चाहिए.

क्या होता है फ्लोर टेस्ट (What is Floor Test)

फ्लोर टेस्ट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से यह जाना जाता है कि मौजूदा सरकार या मुख्यमंत्री के पास पर्याप्त बहुमत है या नहीं? यानी कि क्या कार्यपालिका (Executive) को विधायिका (Legislature) का विश्वास प्राप्त है. यह एक संवैधानिक व्यवस्था है जिसके तहत गवर्नर एक मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कह सकता है. आसान भाषा में समझें तो सत्तारुढ़ पार्टी या मुख्यमंत्री पर जब बहुमत को लेकर सवाल उठाया जाता है, तो बहुमत का दावा करने वाले पार्टी या गठबंधन के नेता को विश्वास मत हासिल करना होता है. इसके तहत उन्हें विधानसभा में मौजूद और मतदान करने वालों के बीच अपना बहुमत साबित करना पड़ता है.

Leave a Reply