जिले की साइबर सेल और इंदिरापुरम पुलिस ने बैंगलूरू से संचालित लोन के नाम पर देश भर के लोगों से ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में एटीएम व आधार कार्ड, मोबाइल, बैंक पासबुक, वोटर आईडी कार्ड, पेटीएम मशीन, मुहरें, लैपटॉप और कार बरामद की है। पुलिस का दावा है कि गैंग के सदस्य देश भर के लोगों को बड़ी संख्या में एक साथ मैसेज भेजते थे। लोगों के मोबाइल में एप लोन डाउनलोड कराने के बाद उनके मोबाइल का सारा एक्सेस हासिल कर लेते थे। उसके बाद मोबाइल की गैलरी में मौजूद फ ोटो व वीडियो को अश्लील बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के करीब 5 सौ बैंक खाते ट्रेस किए हैं। जिनमें 100 करोड़ से ज्यादा की ट्रांजेक् शन मिली है। साथ ही इन बैंक खातों में मिले 35 लाख रुपयों को पुलिस ने फ्रीज करा दिया है। पुलिस का दावा है कि गैंग के मुख्य सरगना बैंगलूरू में बैठकर ठगी का सारा खेल खेलने में लगे हैं। यह 500 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं।
एसपी क्राइम डा. दीक्षा शर्मा ने बताया कि बीते कुछ समय से लोन एप के जरिए ठगी और ब्लैकमेलिंग की शिकायतें जिले में बढ़ रही थीं। इस गैंग को ट्रेस करने के लिए एसएसपी मुनिराज जी द्वारा जिले की साइबर सेल को लगाया गया था। करीब तीन महीने की जांच.पड़ताल के बाद पुलिस इस गैंग को ट्रेस करने में कामयाब हो सकी। पुलिस ने गैंग के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जबकि गैंग के सरगना समेत अन्य आरोपी बैंगलूरू में बताए गए हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान वेस्ट दिल्ली निवासी उस्मान व उसके भाई फु रकान उर्फ सोनू, प्रतापगढ़ निवासी सुनील कुमार यादव और पीलीभीत निवासी बलराम गंगवार के रूप में हुई है। उस्मान 8वीं व सुनील कुमार यादव बीए पास है। जबकि बलराम गंगवार ग्रेजुएट तथा फु रकान 12वीं पास है। एसपी क्राइम ने बताया कि चारों आरोपी बैंगलूरू से संचालित गैंग को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने इनके 500 बैंक खाते ट्रेस किए हैं। एक खाते में ही 20 करोड़ की ट्रांजेक्शन मिली है।
टेलीग्राम गु्रप के जरिए आरोपियों से संपर्क में रहते थे सरगना
एसपी क्राइम दीक्षा शर्मा ने बताया कि बैंगलूरू में बैठे गैंग के सरगना गिरफ्तार आरोपियों से टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संपर्क में रहते थे। पकड़े गए आरोपियों को पता नहीं कि उनके गैंग का सरगना कौन हैं और कहां रहता है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गैंग में उनकी भूमिका बैंक खाते उपलब्ध कराने की थी। इसके लिए वह अपने जानकार और रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाया करते थे। जानकारों को कुछ दिन दिल्ली में ठहराते और वहां का रेंट एग्रीमेंट तैयार कराकर आधार कार्ड में पता बदलवा देते थे। इसके अलावा छोटी.मोटी दुकान खोलकर उसमें फ र्जी फ र्म खोल लेते थे। फ र्जी फ र्म व कंपनी दिखाते हुए बैंकों में करंट अकाउंट खुलवा लेते थे। खातों के एटीएम कार्ड, चेकबुक व पासबुक आरोपी अपने पास ही रखते थे। एसपी के मुताबिक पुलिस ने जो 500 खाते ट्रेस किए हैं वह सभी दिल्ली के पते पर हैं और यह 15 अलग.अलग बैंकों में खोले गए हैं।
1 खाते के 1 लाख और ट्रांसफर आई रकम में 40 फीसद था हिस्सा
साइबर सेल के नोडल अधिकारी एवं सीओ इंदिरापुरम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि पकड़े गए आरोपी गैंग के सरगना को करंट खाता उपलब्ध कराने के बदले में एक लाख रुपए लेते थे। जबकि सेविंग खाता उपलब्ध कराने की एवज में 50 हजार रुपए लेते थे। इसके अलावा खातों में ट्रांसफर आने वाली ठगी की रकम में से 40 फ ीसदी हिस्सा लेते थे। इस रकम को वह अपने शौक पूरा करने तथा शाही जिंदगी जीने में खर्च किया करते थे।
सीओ का दावा है कि यह ब्लैकमेलर गैंग देशभर के हजारों लोगों से करीब 500 करोड़ रुपए की ठगी कर चुका है।
साइबर सेल में आ चुकी हैं गैंग से संबंधित 80 शिकायतें
सीओ अभय मिश्र ने बताया कि जिले की साइबर सेल में एप लोन से ठगी व ब्लैकमेलिंग की 80 से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 22 मामले कनेक्ट कर लिए गए हैं। अन्य घटनाओं के बारे में भी जांच पड़ताल जारी है। सीओ ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया व व्हॉट्सएप पर एप के जरिए चंद मिनटों में लोन देने का मैसेज भेजते थे। इसके लिए एक लिंक भी भेजा जाता था। बिना गारंटी लोन का संदेश देखकर पीडि़त लिंक क्लिक करके एप डाउनलोड करते थे। एप की टर्म एंड कंडीशन स्वीकार करने की आड़ में आरोपी पीडि़त के मोबाइल का एक्सेस अपने हाथ में लेकर ब्लैकमेलिंग का धंधा शुरू कर देते थे। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वह किसी मोबाइल पर आए किसी भी लिंक को देखभाल कर क्लिक करें। छोटी सी गलती आपको आर्थिक और सामाजिक नुकसान पहुंचा सकती है।






