कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में एक बड़े भाई का पर्याय हैं इसको हर छोटा बड़ा कांग्रेसी भी स्वीकार करता है,अपने लोगो पर जान छिड़कने वाले और विपक्षियों को भी भरपूर सम्मान देने वाले श्री विजयवर्गीय सूझबूझ और राजनैतिक समझ इंदौर ने फिर महसूस किया है।विधायक को महापौर टिकट नही वाले नियम में विधायक रमेश मेंदोला का टिकट नही हो पाया तो बॉस ने कैसे फील्डिंग सेट की पूरा इंदौर नही प्रदेश कायल हो गया,जानिए पूरी तथाकथा।
इंदौर में बीजेपी ने पुष्यमित्र भार्गव को टिकट दिया है, जिन्हें जिताने की जिम्मेदारी बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की है. उज्जैन में कैलाश विजयवर्गीय ने बाबा महाकाल के दर्शन के बाद पुष्यमित्र भार्गव को लेकर बड़ा बयान दिया.
ये पूछिए कितने लाख वोटों से जीत रहे हैं
कैलाश विजयवर्गीय से जब इंदौर में बीजेपी के महापौर प्रत्याशी की जीत को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ”हमनें इंदौर में इतना काम किया है कि जनता का प्यार हमारे साथ है, उन्होंने कहा कि आप जीत की बात कर रहे हैं आपको यह पूछना चाहिए कि इस बार कितने लाख वोट से जीतेंगे. इंदौर में बीजेपी की जीत निश्चित है.”
इंदौर महापौर के भाजपा प्रत्याशी के चयन में कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर बाजी मारी। इसके पहले उन्होंने 2005 में सुमित्रा ताई से टक्कर ले कर डॉ उमाशशि शर्मा का टिकट फाइनल करवाया था। तब ताई अंजू मखीजा के लिए इस हद तक अड़ी थी कि एक बार संभागीय समिति की बैठक छोड़ कर चली गई थीं। बाद में उमा शशि का टिकट होने के बाद उनका चर्चित बयान था कि मैं खूंटे से बंधी गाय हूं। जैसा कि सभी जानते थे कि कैलाश विजयवर्गीय की पहली पसंद विधायक रमेश मेंदोला रहेंगे। उन्होंने रमेश मेंदोला के लिए खूब प्रयास भी किया लेकिन जब भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने विधायकों और सांसदों को टिकट नहीं देने की बात कही तो कैलाश विजयवर्गीय ने प्लान बी के तौर पर पुष्यमित्र भार्गव को आगे किया। पुष्यमित्र भार्गव से कैलाश विजयवर्गीय के संबंध काफी पुराने हैं।
उनके कारण ही श्री भार्गव को भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लिया गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंदौर विभाग की पहली पसंद डॉ निशिकांत खरे ही थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उनके नाम पर सहमत थे। मुख्यमंत्री ने शंकर लालवानी से इंदौर के स्थानीय नेताओं से चर्चा कर सहमति बनाने के लिए कहा था लेकिन कैलाश विजयवर्गीय अड़ गए। इंदौर के स्थानीय भाजपा नेता भी डॉ निशिकांत खरे के नाम पर सहमत नहीं थे। इसका कारण डॉ निशिकांत खरे का सभी से अच्छा व्यवहार नहीं होना है। आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में डॉक्टर खरे जिस तरह से और जिस एटीट्यूट के साथ चर्चा करते थे उससे भाजपा के नेता पहले से ही नाराज थे। कृष्ण मुरारी मोघे ने तो डॉक्टर खरे के कारण आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में आना बंद कर दिया था।
डॉक्टर खरे लोगों से कम खुल पाते हैं । डॉक्टर खरे का पूरे इंदौर में ठीक से परिचय भी नहीं है।जब डॉक्टर खरे के नाम पर सहमति बनती नहीं दिखी तो संघ के मालवा प्रांत ने पुष्यमित्र भार्गव के नाम पर सहमति दे दी। पुष्यमित्र भार्गव का परिवार संघ से जुड़ा रहा है। श्री भार्गव बचपन से संघ के स्वयंसेवक हैं। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में लंबे समय काम किया है। 2 साल तक गुवाहाटी में रहकर उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लिए पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया। एबीवीपी के कारण उनके पास युवाओं की अच्छी टीम है। प्रतिभाशाली वकील होने के कारण बार एसोसिएशन में भी उनका अच्छा नेटवर्क है। 40 वर्षीय पुष्यमित्र भार्गव की उम्मीदवारी से युवाओं में अच्छा संदेश जाएगा।
उन्होंनेएलएलएम व एम फिल तक पढ़ाई की है। इस कारण से शिक्षित मध्यमवर्ग उन्हें आसानी से स्वीकार कर लेगा। कैलाश विजयवर्गीय ने कोर समिति की पहली बैठक में कहा था कि महापौर पद के प्रत्याशी ऐसा होना चाहिए जो केंद्र सरकार से मदद ले सके। भाजपा प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव का व्यक्तित्व इसी तरह का है। धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने के कारण वे केंद्रीय अधिकारियों से आसानी से संवाद कर सकते हैं। केंद्र के अनेक विभागों में आईएएस अफसर दक्षिण भारत के होते हैं जिन्हें हिंदी नहीं आती। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मदद लेने के लिए भी अंग्रेजी पर प्रभुत्व होना आवश्यक है।पुष्यमित्र भार्गव ब्राह्मण समाज से हैं।
इस कारण से कांग्रेस को ब्राह्मण समाज से अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। मेयर पद का चुनाव इस बार और अधिक दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस और संजय शुक्ला भाजपा प्रत्याशी पुष्यमित्र मित्र भार्गव को हल्के में नहीं ले सकते। उनकी उम्मीदवारी का जिस तरह से सभी वर्गों ने स्वागत किया है उससे साफ जाहिर है कि कांग्रेस और भाजपा में बराबरी की टक्कर होने वाली है। कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला ने आज कमलनाथ की मौजूदगी में नामांकन पत्र दाखिल किया। जबकि पुष्यमित्र भार्गव ने अतिरिक्त महाधिवक्ता पद से त्यागपत्र देकर विधिवत राजनीति में कदम रखा और देवी अहिल्या की प्रतिमा तथा रंजीत हनुमान के दर्शन किए।
विजयवर्गीय ने सभी नेताओं के साथ की बैठक
खास बात यह है कि बीजेपी के प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव को जिताने की जिम्मेदारी बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की है, ऐसे में उन्होंने जीत के लिए मंथन शुरू कर दिया है. आज उन्होंने इंदौर के मेयर प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव और नगरीय निकाय चुनाव को लेकर ली बैठक. इस बैठक मंत्री तुलसी सिलावट, शंकर लालवानी, कविता पाटीदार सहित पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हुए हैं. जिन्हें आगे की रणनीति
भाजपा ने प्रदेश के सबसे बड़े नगर निगम इंदौर में इस बार युवा प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव पर दाव लगाया है. उनके सामने कांग्रेस के संजय शुक्ला है, जो इंदौर-1 विधानसभा सीट से विधायक भी है. लेकिन पुष्यमित्र भार्गव पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे हैं, खास बात यह है कि उन्होंने महापौर का प्रत्याशी बनते ही एक पद से इस्तीफा भी दिया है.
एडीशनल एडवोकेट जनरल के पद से दिया इस्तीफा
दरअसल, बीजेपी के महापौर प्रत्याशी पुष्यमित्र भार्गव एडिशनल एडवोकेट जनरल भी है, जैसे ही उनके नाम की घोषणा हुई तो उन्होंने सबसे पहले एडिशनल एडवोकेट जनरल पद छोड़कर विधि विभाग के प्रमुख सचिव को इस्तीफा भेज दिया. बताया जा रहा है कि भार्गव पहली बार सीधे महापौर का चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है.
अब तक के सबसे युवा प्रत्याशी
बीजेपी के पुष्यमित्र भार्गव इंदौर में अब तक के सबसे युवा प्रत्याशी है, 41 साल के भार्गव को आरएसएस की पसंद बताया जा रहा है, पेशे से वकील भार्गव एलएलबी और एलएलएम कर चुके हैं. वे एबीवीपी में भी कई अहम पदों पर भूमिका निभा चुके हैं. उन्होंने असम में भी लंबे समय तक एबीवीपी के लिए काम किया है.बताया जा रहा है कि इंदौर में महापौर पद के लिए कई प्रत्याशी थे, लेकिन आखिर में पुष्यमित्र भार्गव के नाम पर सहमति बनी.
इंदौर के मुकाबले पर सबकी नजर
इंदौर में महापौर पद के प्रत्याशी के लिए सबकी नजरे टिकी हुई हैं. क्योंकि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा नगर निगम है, खास बात यह है कि इंदौर लगातार स्वच्छता की रेकिंग में पांच बार से नंबर वन बनता आ रहा है. इस उपलब्धि में इंदौर नगर निगम के महापौर की भूमिका भी सबसे अहम मानी जाती है. इसलिए इस बार इंदौर के महापौर चुनाव पर सबकी नजर है क्योंकि कांग्रेस ने इस बार पहले ही से ही संजय शुक्ला के टिकट दे दिया था. वे भी लगातार प्रचार में जुटे हैं






