Friday, April 24, 2026
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योगी आदित्यनाथ ने खत्म किया एक और वर्चस्व,शिवपाल यादव का बेटा सदस्य भी नही बन पाया,40 साल का बदला इतिहास

उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के हाथ में केवल सहकारी समितियों की आखिरी ताकत बची थी जिसे बीजेपी ने अपने कब्जे में लेकर उनको करारा झटका दिया है। ऐसा माना जा रहा था कि शिवपाल यादव को बीजेपी से बढ़ रही नजदीकियों का लाभ मिल सकता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और बीजेपी का प्रत्याशी पीसीएफ का नया चेयरमैन चुन लिया गया। इसे शिवपाल को एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल पीसीएफ में पिछले 40 सालों से मुलायम परिवार का दबदबा था जो इस बार बीजेपी ने खत्म कर दिया है। योगी सरकार की तारीफ करने वाले शिवपाल अपने बेटे की कुर्सी नहीं बचा पाए।

लंबे समय से था शिवपाल परिवार का दबदबा

लंबे समय से था शिवपाल परिवार का दबदबा

शिवपाल सिंह यादव की भाजपा से नजदीकियों को देखते हुए माना जा रहा है कि वह अपने परिवार की किसी महिला सदस्य को महासंघ में अध्यक्ष के रूप में शामिल करा सकते हैं। विधान परिषद से लेकर विधान परिषद और पंचायत तक सभी तरह के चुनावों में अपना दबदबा कायम रखने वाली भारतीय जनता पार्टी ने पीसीएफ में चुनाव के माध्यम से अपनी सत्ता काबिज कर ली है। शिवपाल सिंह यादव का लंबे समय से पीसीएफ में प्रभाव रहा है।

शिवपाल यादव के बेटे को बीजेपी ने नहीं दिया भाव

शिवपाल यादव के बेटे को बीजेपी ने नहीं दिया भाव

फेडरेशन के अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष है और उनके पुत्र आदित्य यादव का 14 जून को दूसरा कार्यकाल समाप्त हो गया। अध्यक्ष बनने के लिए महासंघ के 14 सदस्यीय बोर्ड में शामिल होना जरूरी है। हालांकि पीसीएफ से शिवपाल सिंह यादव के वर्चस्व को खत्म करने की कोशिश में जुटी बीजेपी ने उनके बेटे आदित्य यादव को भी बोर्ड में शामिल नहीं होने दिया। इसके साथ ही आदित्य के तीसरी बार चेयरमैन बनने की संभावनाएं खत्म हो गई थीं। इसके साथ ही सहकारिता में शिवपाल सिंह यादव का दबदबा भी खत्म हो गया है।

बीजेपी से निकट संबंधों का लाभ लेना चाहते थे शिवपाल

बीजेपी से निकट संबंधों का लाभ लेना चाहते थे शिवपाल

हालांकि शिवपाल सिंह यादव महासंघ में अपना दखल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। फेडरेशन के सूत्रों का कहना है कि 11 सीटों पर बीजेपी के सदस्य निर्विरोध चुने गए हैं, लेकिन महिला कोटे के लिए अभी भी 3 सीटों की संभावना है। शिवपाल सिंह यादव चाहते हैं कि उनके परिवार की एक महिला सदस्य को इन 3 सीटों पर जगह मिले। महिला सदस्यों के बीच उनकी पत्नी का नाम भी चर्चा में है। चूंकि सरकार इन 3 सीटों पर सदस्यों को नामित करती है और पिछले कुछ समय से शिवपाल के भाजपा के साथ घनिष्ठ संबंध देखे जा रहे हैं। माना जा रहा था कि इन्हीं नजदीकियों की वजह से शिवपाल सिंह यादव को इसका लाभ मिल सकता है लेकिन चुनाव में बाल्मिकी त्रिपाठी की जीत के साथ बची खुची संभावनाएं भी समाप्त हो गईं हैं।

चुनाव में 11 सदस्य निर्विरोध चुने गए

चुनाव में 11 सदस्य निर्विरोध चुने गए

लखनऊ से विश्राम सिंह राठौर और राज बहादुर सिंह, कानपुर से आनंद किशोर द्विवेदी, प्रयागराज से अमरनाथ यादव, गोरखपुर से रमाशंकर जायसवाल, मेरठ से कुंवर पाल, बरेली से राकेश गुप्ता, बलिया से बाल्मीकि त्रिपाठी, अलीगढ़ से अनुराग पांडे, झांसी से पुरुषोत्तम पांडेय वहीं रमेश मुरादाबाद से निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। क्षेत्रीय सहकारी संघ (पीसीएफ) की स्थापना किसानों के हितों के लिए की गई थी। हालांकि, वर्तमान में पीसीएफ का काफी विस्तार हुआ है। अब पीसीएफ किसानों के साथ-साथ आम जनता के लाभ के लिए कई क्षेत्रों में काम कर रहा है। पीसीएफ किसानों की उपज की खरीद के साथ-साथ विपणन और अन्य सुविधाएं और सेवाएं प्रदान करता है। PCF की स्थापना 11 जून 1943 को हुई  थी।

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