Friday, February 27, 2026
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नमकहराम गद्दारों पर कार्यवाही, तिलमिला गये कटमुल्ले,हिन्दू लड़की के पीछे पड़े

खून का रंग तो सबका ही लाल है,
बस कुछ में नमकहलाली है,कुछ में नमकहरामी….. आशु

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ़ पाकिस्तानियों की जीत से खुश होकर कश्मीर में कई जगह लोग नाचते हुए दिखाई दिए थे। SKIMS मेडिकल कॉलेज की तो वीडियो भी आई थी जिसके कारण कश्मीर पुलिस ने मामले को यूएपीए के तहत दर्ज किया। अब शर्मनाक बात ये है कि सोशल मीडिया पर इस केस के कारण नाराज कट्टरपंथी गैर मुस्लिमों, गैर कश्मीरियों को निशाना बनाने के साथ एक छात्रा की फोटो शेयर करके उस पर पुलिस मुखबिर होने का इल्जाम मढ़ रहे हैं और आरएसएस को आतंकी समूह कह रहे हैं।

कश्मीर रिपोर्ट के पत्रकार अब्दुल्ला गाजी ने कई ट्वीट किए और अनन्या जामवाल को टैग करते हुए दावा किया कि वो पुलिस की मुखबिर हैं और SKIMS छात्रों पर हुई FIR और UAPA लगवाने की मुख्य दोषी। ट्वीट में उसने बताया कि इनकी पहचान आरएसएस सदस्य और कार्यकर्ता अनन्या जामवाल के तौर पर हुई हैं। वह एक बाहरी डोगरा हैं जो कि इसी कॉलेज से मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई कर रही हैं।

अब्दुल गाजी ने अनन्या के विरुद्ध कई ट्वीट किए हैं और उन्हें संघन कहते हुए कहा है कि वह स्थानीय कश्मीरों के विरुद्ध भारी कैंपेन चला रही थीं। गाजी का दावा है कि वह खुलेआम कश्मीरी लड़की को प्रताड़ित कर चुकी हैं। आगे कहा गया कि अनन्या एक आरएसएस चरमपंथी से जुड़ी हैं जो जम्मू की है और एक बाहरी डोगरा है, नाम मोनिका लांघे हैं जो कश्मीरियों को धमकाती हैं।

अपने आगे के ट्वीट में अब्दुल्लाह गाजी ने आरएसएस कार्यकर्ताओं को आतंकियों का समूह कहा है और ये भी लिखा है कि वो गौरक्षकों, मॉब लिंचिंग और रेप करने के लिए जाने जाते हैं। अब्दुल गाजी ने यह भी दावा किया कि उसके सूत्र कहते हैं कि कॉलेज में पढ़ने वाले आरएसएस सदस्य कश्मीरी छात्रों को फेक एनकाउंटर्स की धमकी देते हैं।

अब अब्दुल्लाह के इन्हीं ट्वीट को शेयर करते हुए अनन्या जामवाल ने खुद कहा है, “क्या ये आदमी इन आरोपों को सिद्ध कर सकता है कि ये मुझे क्यों धमकी दे रहा है।” अनन्या ने जम्मू-कश्मीर पुलिस, देश की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी, देश के गृहमंत्री, रक्षामंत्री और प्रधानमंत्री समेत कुछ लोगों को टैग करते हुए कहा है कि वो डरा हुआ महसूस कर रही हैं। वह पूछती हैं इन लोगों का मकसद क्या है।

बता दें कि इस केस में बात सिर्फ इल्जाम लगाने तक सीमित नहीं है। समुदाय विशेष के दावे के साथ ही यूनाइटिड लिबरेशन फ्रंट जम्मू-कश्मीर सक्रिय हो गया है, जिसे लश्कर का ही एक समूह बताया जाता है और पिछले दिनों जो गैर कश्मीरियों को मारने में आगे था। इस समूह ने 26 अक्टूबर को बयान जारी कर कहा है कि उन्हें खबर मिल गई है कि इन एफआईआर के पीछे किसका हाथ है। गैर स्थानीय कर्मचारी और छात्रों को चेतावनी दी जाती है कि वो ऐसी गतिविधियों में शामिल न हों।

यूएलएफ द्वारा जारी बयान

यूएलएफ के बयान के मुताबिक, “हम तत्वों को चेतावनी दे रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि ये कौन हैं। 48 घंटों का समय दिया जाता है कि माफी माँग लें। वरना अंजाम भुगतना होगा…हम इन्हें पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि ये किसी गैर कश्मीरी गतिविधि में शामिल न हों। वरना हम ये फर्क नहीं करेंगे कि कौन क्या है। जिन भी गैर स्थानीय कर्मचारी और छात्रों ने डॉक्टर और छात्रों की थाना सौरा, करण नगर..में शिकायत दी है उन्हें चेतावनी दी जा रही है। हम सब देख रहे हैं। बाद में इल्जाम मत देना जो कहर तुम पर बरपेगा।”

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