Wednesday, April 22, 2026
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भारत की चमत्कारी दवा

Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

डॉ. परवेश मलिक
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर विकराल रूप ले चुकी है। हर दिन लाखों नए संक्रमित मरीज मिल रहे हैं और हजारों की जान जा रही है। इस बार सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि कोरोना मरीज का ऑक्सीजन लेवल नीचे गिर जा रहा है, जिससे उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगती है और ऐसे में तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण ही कई मरीजों की मौत भी हो रही है। ऐसे में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने एक दवा बनाई है, जिसे कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचाने में कारगर माना जा रहा है। आइए जानते हैं इस दवा कL
मिल चुकी है इस दवा को मंजूरी
देश के ड्रग्स कंट्रोलर की ओर से डीआरडीओ द्वारा बनाई गई कोरोना की इस दवा को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल चुकी है। इस दवा को एक लैब की सहायता से बनाया गया है, जिसका नाम 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) रखा गया Lइस दवा से क्या फायदा?
डीआरडीओ की ओर से यह दावा किया गया है कि यह दवा (2-डीजी) कोरोना मरीजों के अस्पताल में रहने के समय को कम करती है और ऑक्सीजन लेवल को भी सही रखती है। दावे के मुताबिक, जिन कोरोना मरीजों पर इसका ट्रायल किया गया, उनमें तेजी से रिकवरी देखी गई और साथ ही मरीजों की ऑक्सीजन पर निर्भरता भी कम हो गई।

पिछले साल शुरू हुआ था इस दवा का ट्रायल
पिछले साल डीआरडीओ ने इस दवा के चिकित्सकीय प्रयोग के लिए पहल की थी। अप्रैल 2020 में इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस (आईएनएमएएस) और डीआरडीओ ने सेंटर फॉर सेल्यूलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के साथ मिलकर प्रयोग किया था और ये पाया था कि यह दवा कोरोना संक्रमण को बढ़ने से रोकती है

पहले चरण के ट्रायल के नतीजों के आधार पर ही देश के दवा नियंत्रक ने 2-डीजी के दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए मई 2020 में मंजूरी दी थी। इसमें कोरोना के 110 मरीजों पर इस दवा का ट्रायल किया गया और उनपर यह सुरक्षित पाई गई। फिर नवंबर 2020 में इसके तीसरे चरण के ट्रायल को मंजूरी मिली, जिसके बाद दिसंबर 2020 से मार्च 2021 के बीच 220 कोरोना मरीजों पर यह ट्रायल किया गया।

कैसे काम करती है यह दवा?
डीआरडीओ के मुताबिक, जब कोरोना संक्रमित मरीज को यह दवा दी जाती है, तो यह शरीर में प्रवेश करते ही वायरस द्वारा संक्रमित कोशिकाओं के अंदर जाकर जमा हो जाती है और वायरस सिंथेसिस और एनर्जी प्रोडक्शन को रोककर वायरस को बढ़ने से रोकती है।

कैसे ले सकते हैं यह दवा?
डीआरडीओ के मुताबिक, यह दवा एक पाउडर के रूप में सैशे में आती है, जिसे पानी में घोलकर कोरोना मरीजों को दिया जा सकता है। ऑक्सीजन की कमी के चलते गंभीर स्थिति का सामना कर रहे कोरोना मरीजों के लिए यह दवा बेहद कारगर साबित हो सकती है।

डीआरडीओ के मुताबिक, ये दवा एक जेनेरिक मॉलिक्यूल है और ग्लूकोज का ही एक अनुरूप है। ऐसे में इसे बड़ी तादाद में आसानी से निर्मित किया जा सकता है। भारत में इस कोरोना रोधी दवा का निर्माण डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज करेगी। हालांकि यह दवा कब उपलब्ध होगी और इसकी कीमत क्या होगी, इसका खुलासा अभी नहीं किया गया है।

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