लड़की के जाते ही वेटर ₹25,000 से लेकर ₹60,000 तक का कच्चा बिल थमा देता है। लड़का विरोध करे तो 6 फीट के बाउंसर चारों तरफ से घेर लेते हैं।
अगर सोशल मीडिया या डेटिंग ऐप पर कोई खूबसूरत प्रोफाइल आपसे दो दिन की चैटिंग के बाद ही मिलने को बेताब हो जाए, तो इसे अपनी किस्मत का ताला खुलना मत समझिए। समझ लीजिए कि आधुनिक साइबर ठगों ने अपने अगले शिकार पर जाल फेंक दिया है।
कोलकाता की ताज़ा घटना इसकी बानगी भर है—23 साल का लड़का बंबल पर मिली लड़की के बुलावे पर नेताजी नगर के एक अनजान कैफे पहुंचा। लड़की ने बैठते ही कॉफी और हुक्का ऑर्डर किया। लड़का जब तक माहौल समझ पाता, लड़की दो मिनट में वॉशरूम से आती हूँ कहकर रफूचक्कर हो गई और फोन तुरंत ब्लॉक। पीछे छूट गया लड़का और टेबल पर आ गिरा हजारों का बिल। लड़के की जेब में ₹1,200 थे, तो बाउंसरों ने उसकी कलाई से Casio G-Shock घड़ी उतरवा ली और बंधक बनाकर पिता से ऑनलाइन पैसे मंगवाए।
दिल्ली के जनकपुरी-कड़कड़डूमा से लेकर मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता तक—यह कोई संयोग नहीं, बल्कि बाकायदा एक कॉर्पोरेट स्टाइल में चलने वाला ऑर्गेनाइज्ड फ्रॉड सिंडिकेट है।
डेटिंग ऐप्स (Bumble, Tinder, Hinge) पर लड़कियों की फर्जी या कमीशन-आधारित असली प्रोफाइल्स बनाई जाती हैं। बातचीत में हद से ज्यादा गर्मजोशी दिखाई जाती है और 24 से 48 घंटे के अंदर मिलने का दबाव बनाया जाता है, ताकि लड़के को सोचने या प्रोफाइल वेरिफाई करने की फुर्सत ही न मिले।
लड़की किसी भी जाने-माने मॉल, सीसीडी या स्टारबक्स में जाने से साफ इनकार कर देगी। बहाना होगा—वहां बहुत भीड़ होती है, प्राइवेसी नहीं मिलती या मेरे घर के पास एक बहुत शांत कैफे है। असल में वह कैफे किसी तंग गली या बेसमेंट में चलने वाला उस सिंडिकेट का अड्डा होता है।
टेबल पर बैठते ही लड़की बिना मेन्यू देखे सबसे महंगे शॉट्स, विदेशी शराब या एग्जॉटिक हुक्का ऑर्डर करती है। दो-चार घूंट पीते ही किसी ‘इमरजेंसी कॉल’ या ‘वॉशरूम’ का बहाना बनाकर वो बाहर निकलती है, स्कूटी/कैब पकड़ती है और लड़के को हर जगह से ब्लॉक कर देती है।
धमकाया जाता है, इज्जत उछालने और छेड़खानी का झूठा केस दर्ज कराने का डर दिखाया जाता है। पर्स, मोबाइल या सोने की चेन तक रखवा ली जाती है जब तक कि घर से या दोस्तों से यूपीआई ट्रांसफर न हो जाए।
वसूली गई रकम में से 20% से 30% कमीशन उस लड़की के बैंक खाते या कैश में जाता है, बाकी कैफे संचालक और इस पूरे नेटवर्क के बिचौलियों की जेब में। यह बाकायदा ‘टारगेट बेस्ड’ काम है, जहाँ एक लड़की दिन में 3-4 लड़कों को उसी कैफे में लाकर फंसाती है।
लड़के आवाज क्यों नहीं उठाते?
इस पूरे रैकेट की सबसे बड़ी ताकत है—लड़के की सामाजिक शर्म (Social Stigma)।
शिकार हुआ लड़का सोचता है
घरवालों को पता चला कि डेटिंग ऐप से लड़की से मिलने गया था तो क्या कहेंगे? समाज क्या सोचेगा? पुलिस उल्टा मुझे ही न लपेट ले!
अपराधी इसी झिझक की कीमत वसूलते हैं। लड़का बेइज्जती के डर से कर्ज लेकर या अपनी सेविंग्स गंवाकर चुपचाप मामला रफा-दफा कर देता है, और यही चुप्पी अगले 10 लड़कों के शिकार होने की जमीन तैयार करती है।
पहली मुलाकात हमेशा किसी खुले, भीड़भाड़ वाले मॉल के फूड कोर्ट या जाने-माने ब्रांडेड कैफे में करें। अगर सामने वाला किसी अनजान, बेसमेंट वाले कैफे की ही जिद पकड़े, तो उसी वक्त ‘ना’ बोल दीजिए।
जब तक मेन्यू पर रेट न देख लें, कुछ भी टेबल पर न आने दें। अगर वेटर बिना मेन्यू दिए चीजें परोसने लगे, तो तुरंत उठ खड़े हों।
अगर कभी ऐसे कैफे में फंस जाएं और बाउंसर घेर लें, तो डरकर पैसे मत दीजिए। सीना तानकर सीधे पुलिस को 112 पर कॉल करें। याद रखिए—इनमें से 90% कैफे बिना वैध एक्साइज या हुक्का लाइसेंस के चल रहे होते हैं। पुलिस का नाम सुनते ही इनके बाउंसर खुद रास्ता छोड़ देते हैं।
चैट हिस्ट्री, लड़की की प्रोफाइल, कैफे का लोकेशन और बिल की फोटो तुरंत सुरक्षित करें और नजदीकी थाने व cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
प्यार और दोस्ती के नाम पर शहरों में चल रही इस आधुनिक डकैती से खुद भी बचिए और अपने दोस्तों, भाइयों और ग्रुप्स में भी यह बात शेयर कीजिए। आपकी एक सतर्कता किसी युवा को मानसिक अवसाद और आर्थिक बर्बादी से बचा सकती है।
#DatingScam #BumbleScam #nonfollowers






