एक साल से ज्यादा वक्त तक किसान दिल्ली के बॉर्डर पर जमे रहे। उनकी मांग तीन कृषि कानून वापस लेने की थी। इस आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत की भागीदारी भी रही। राकेश टिकैत इस आंदोलन से किसानों के बड़े नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे। लेकिन क्या ये टिकैत के लिए सिर्फ बड़े किसान नेता के तौर पर पहचान बनाने का कार्यक्रम था ? इसका जवाब है नहीं। उनका इरादा कुछ और था। अब ये इरादा खुलकर सामने आ गया है। टिकैत बंधु यानी राकेश और उनके बड़े भाई नरेश टिकैत ने किसान आंदोलन को समर्थन इस वजह से दिया था, ताकि यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी यानी सपा और राष्ट्रीय लोकदल यानी आरएलडी के लिए माहौल तैयार किया जा सके और बीजेपी के खिलाफ वोट जाए।
अब तक इसके सिर्फ कयास लगते रहे थे, लेकिन अब नरेश टिकैत का ताजा बयान इन कयासों को सही साबित कर रहा है। नरेश टिकैत ने ताजा बयान में पश्चिमी यूपी के सभी किसानों से अपील की है कि वो सपा-आरएलडी गठबंधन के प्रत्याशियों को जिताएं। नरेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष और उनके भाई राकेश टिकैत इसके बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। नरेश टिकैत ने अपनी अपील में कहा कि गठबंधन के उम्मीदवार जहां भी लड़ रहे हैं, उनकी जीत के लिए वो लोगों से अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह से हो, इन सबको जिताना जरूरी है।
इससे पहले जब किसान आंदोलन खत्म हुआ था और राकेश टिकैत अपने घर सिसौली लौट रहे थे, तो मेरठ-बुलंदशहर हाइवे पर तमाम पोस्टर लगे थे। इन पोस्टरों में राकेश टिकैत के अलावा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और आरएलडी के चीफ जयंत चौधरी की भी फोटो थी। राकेश टिकैत ने इस बारे में पूछे जाने पर दोनों से अपने रिश्तों को ठुकरा दिया था, लेकिन अब उनके बड़े भाई नरेश टिकैत का बयान साफ कर रहा है कि दोनों भाइयों ने किसानों के आंदोलन के नाम पर सियासी गणित बैठाने की कोशिश की थी।





