दोस्तों ज्ञानी जैल सिंह का नाम तो आप लोगों ने सुना ही होगा भारत के पूर्व राष्ट्रपति भी थे और उन्हें सरकार की तरफ से Z+की सुरक्षा भी मिली हुई थी अब हुआ ये की उन महाशय ने दिल्ली मे घोषणा कर दी की कल मैं चंडीगढ़ पहुंच कर बोफोर्स धोटाले का सारा राज खोलने वाला हूं,,,,,,
अब ज्ञानी जैल सिंह जी दिल्ली से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए तो हुआ ये की दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर उनके सामने से एक ट्रक आया और दनदनाता हुआ ज्ञानी जैलसिंह की कार को कुचलते हुए आगे निकल गया और वहीं उनका रामनाम सत्य हो गया,,,,,,
और उस दुर्घटना की कोई जांच नहीं हुई,,,,,
एक बार जब राजेश पायलट ने सोनिया गांधी की सलाह को ना मानते हुए ये घोषणा कर दी की कल मैं कांग्रेस के अध्यक्ष पद हेतु नामांकन भरूँगा,,,,,
बस फिर क्या था, सामने से एक बस आई और उनकी कार को कुचलती हुई आगे चली गई और उनका वही पर रामनाम सत्य हो गया,,,,,
श्रीमन्त माधवराव शिन्दे (सिंधिया) इनको भला कौन नही जानता होगा लोकसभा चुनाव के पहले लोकप्रिय वा कर्मठ कांग्रेसी नेता थे और लगातार 9वीं बार लोकसभा के लिए चुने गए थे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता भी थे,,,,,,
तो दोस्तों हुआ ये की सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष को कहा की मैं यूपी प्रचार करने आ रही हूँ लेकिन उस समय प्रदेश अध्यक्ष निर्भीक और निडर था तो उसने साफ कह दिया की आप अपनी जगह माधवराव जी को भेज दीजिए,,,,,
क्योंकि यहां वही वोट दिलवा सकते हैं बस फिर क्या था इधर माधवराव जी के पास आर्डर आया की आप अपने निजी प्लेन से ना जाकर इस दूसरे प्लेन से जाएंगे,,,,,,,
और उस समय घटना के चश्मदीद रहे एक किसान ने भी बताया था की प्लेन में पहले विस्फोट हुआ था और उसके बाद आग लगी थी और विमान में सवार आठों लोगों का मौके मर ही रामनाम सत्य हो गया,,,,,,,
लेकिन इसकी कोई जांच नही हुई और उसी के थोड़े समय के बाद ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी रामनाम सत्य हुए पाए गए,,,,,
और इसी क्रम मे आगे चल कर 1965 की लड़ाई की विजेता प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी, डॉ होमी जहांगीर भाभा के साथ साथ करीब 2500 से भी ज्यादा इसरो और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और टॉप इंजीनियरों का भी बहुत ही संदेहपूर्ण स्थिति में रामनाम सत्य हो गया,,,,,
जिसकी भी कोई जांच तक नही की गई,,,,
और तो और राजीव गांधी ने अपने सम्पूर्ण जीवन काल मे कुल 181 रैलिया की थीं जिनमें से पूरी 180 रैलियों मे सोनिया गांधी भी उसके साथ रहती थी बस उस 181वीं रैली मे वो राजीव गांधी के साथ नही थी और आपकी जानकारी के लिए बता दूं की उसी रैली मे उनका रामनाम सत्य भी हो गया,,,,,,
और ऐसा नही है की राजीव गांधी उस समय अकेले म•••रे थे,, नही वहां मौजूद 14 अन्य लोगों भी म••रे थे लेकिन इसमे जो सबसे खास बात हुई वो ये हुई की उन 14 म•रने वालों मे एक भी कोंग्रेसी नेता नहीं था नेता छोड़ो कोई पार्टी का कार्यकर्ता भी नही था मतलब जो भी म••रे वो आम लोग ही थे,,,,
लेकिन एक बात समझ मे नही आई की ऐसा कैसे हो सकता है की प्रधानमंत्री रैली कर रहा हो और पार्टी का अन्य कोई नेता या कर्मचारी वहां मौजूद ही ना हो,,,,,,,
कहने का मतलब राजीव गांधी के साथ बड़ा, छोटा कोई कांग्रेसी नेता नहीं म••रा और ना ही सोनिया गांधी जो की हर सभा में राजीव गांधी जी के साथ रहतीं थीं और उस दिन होटल में सरदर्द के कारण रुक गईं थी,,,,,,
अब मै ये नही कह रहा हूं की ये सब संयोग नही हो सकता,,,,
भाई लेकिन बात कुछ हजम नही होती,,,,,
और फिर बाद में जब प्रियंका गांधी ने अपने पिता राजीव के कातिलों को कोर्ट में माफ करने की भी अपील कर दी थी,,,,
तब से बात और नही हजम हो रही,,,,,,
अब सीधी भाषा मे ये समझ लीजिए की जब से ये चमचों की राजमाता इस परिवार की सौभाग्यशाली बहू बनकर आई हैं तब से आज तक गांधी परिवार के एक भी सदस्य को प्राकृतिक मृत्यु का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है,,,,,सब झटके मे ही गये,,,,,,
इंदिरा गांधी के समधी मतलब संजय गांधी के ससुर कर्नल आनंद अपने ही फार्म हाउस के पास थोड़ी दूरी पर गो••ली लगने से रामनामसत्य हुए पाये गये थे,,,,,,
और संजय गांधी,,, अब बताओ भला हवाई जहाज से भी कोई नीचे गिरता है लेकिन संजय गांधी गिर गये थे और उनका वहीं रामनाम सत्य हो गया,,,,,,
अब आयरन लेडी का कैसे रामनाम सत्य हुआ ये तो सब जानते ही हैं,,,,मतलब बताने की जरूरत नही है,,,,,
अब आगे आते प्रियंका गांधी के ससुर राजेन्द्र वाड्रा दिल्ली के एक गेस्ट हाउस मे लपेटे हुए पाये गये तथा ननद का जयपुर दिल्ली हाइवे में कार दुर्घटना में रामनाम सत्य हो गया और देवर मुरादाबाद के एक होटल में रामनाम सत्य हुआ पाया जाता है,,,,,
राजेश पायलट को भी एक सड़क दुर्घटना में लपेट दिया जाता है और माधवराव सिंधिया का तो पता ही है मतलब जहाज दुर्घटना में लपेट दिए जाते है,,,,,,
अब इन सब बातों मे जो सबसे खास बात है वो ये है की जब संसद पर हमला होता है तो मां बेटे दोनो अनुपस्थित थे मतलब दोनो ने एक साथ छुट्टी मार दी और संसद नही गये,,,,,,,
अब मेरा कहने का मतलब ये कतई नही है की ये सब कांड किसी साजिश तहत हुए,,,, लेकिन संयोग बहुत ही गजब के बने थे,,,,,,
राष्ट्रीय सनातन संदेश (सहयोग)
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