50+ बच्चों से दरिंदगी, 47 देशों में भेजे अश्लील वीडियो-फोटो: UP के बाँदा में कोर्ट ने पति-पत्नी को सुनाई फाँसी की सजा, डार्क वेब से चलाते थे नेटवर्क

उत्तर प्रदेश के बाँदा में पॉक्सो कोर्ट ने पति-पत्नी दोनों को बच्चों के यौन शोषण से जुड़े एक मामले में फाँसी की सजा सुनाई है। साल 2020 में उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से सामने इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। सरकारी नौकरी में तैनात एक इंजीनियर और उसकी पत्नी गरीब परिवारों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फँसाते, उनका यौन शोषण करते और अश्लील वीडियो-फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचा करते थे। 5 साल तक चले मुकदमे के बाद कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई।
सरकारी इंजीनियर और उसकी पत्नी की खौफनाक दुनिया
बाँदा का रहने वाला रामभवन चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था। वह अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ SDM कॉलोनी में रहता था। दोनों गरीब परिवारों के बच्चों को मोबाइल, खिलौने, पैसे और गेम दिखाने का लालच देकर अपने घर बुलाते थे।
इसके बाद 5 से 16 साल तक के बच्चों के साथ यौन शोषण किया जाता था और लैपटॉप व वेब कैमरे से उनके अश्लील वीडियो व फोटो बनाए जाते थे। विरोध करने पर बच्चों के साथ मारपीट और धमकी दी जाती थी ताकि वे किसी से कुछ न कह सकें।
डार्क वेब से इंटरपोल तक पहुँची दरिंदगी की परतें
अक्टूबर 2020 में इंटरपोल के जरिए CBI को सूचना मिली कि भारत से एक व्यक्ति बच्चों के अश्लील वीडियो बनाकर अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुँचा रहा है। जाँच में तीन मोबाइल नंबर और एक पेन ड्राइव सामने आई, जिसमें 34 बच्चों के वीडियो और सैकड़ों फोटो मौजूद थीं।
तकनीकी जाँच के बाद इन नंबरों को ट्रेस किया गया, तो पूरा मामला रामभवन और उसकी पत्नी तक पहुँच गया। इसके बाद 18 नवंबर 2020 को CBI ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान उनके घर से नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, वेब कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
चीन, अमेरिका, अफगानिस्तान समेत 47 देशों में भेजे फोटो-वीडियो
गिरफ्तारी के बाद CBI ने करीब 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें मेडिकल रिपोर्ट, पीड़ित बच्चों के बयान और डिजिटल सबूत शामिल थे। जाँच में सामने आया कि दोनों ने 50 से अधिक बच्चों का शोषण किया था और उनके वीडियो-फोटो चीन, अमेरिका, ब्राजील, अफगानिस्तान समेत 47 देशों में बेचे गए।
इस मामले में 74 गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया। बच्चों के इलाज की व्यवस्था दिल्ली एम्स में कराई गई। करीब पाँच साल तक चले ट्रायल के दौरान हर सुनवाई ने इस कांड की भयावहता को और उजागर किया। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में मानते हुए पति-पत्नी दोनों को फाँसी की सजा सुनाई। जज ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि पीड़ित प्रत्येक बच्चे को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।






