Thursday, February 26, 2026
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मुसलमान को पहचानिए टोपी से

टोपी से पहचाने कौन किस फिरके का है टोपी देखे

इस्लाम में जाति भेद

आईये मैं आपको “हाय अल्लाह मुसलमानों में भी मुसलमान” की कहानी सुनाते है।

चित्र में आप दो टोपी धारियों को देख रहे हैं,

उनकी टोपियों में अंतर है।

उनकी टोपियों का यह अंतर मात्र टोपियों की बुनावट बनावट का अंतर नहीं है, अपितु उनकी विचारधारा और विश्वास का अंतर है।

टोपियों का यह अंतर उनके अलग अलग फिरकों और पहचान को प्रदर्शित करता है।

बैठे हुए आदमी की टोपी ऊँची गोल टोपी है। यह बरेलवी फिरके की निशानी है।

बरेलवी को इस्लाम मे कब्र पूजक कहा जाता है।

खड़े आदमी ने सिर पे बिलकुल चिपकी हुई, छेददार गोल टोपी पहन रखी है। यह देवबंदी फिरके की निशानी है।

ऐसे ही काली टोपी /काला साफा कलंदरी फिरके को प्रकट करता है।

हरी टोपी /साफा हनफी फिरके को प्रकट करता है।

हरी काली मिश्रित टोपी/साफा किसी खास दरगाह के सज्जादानशीं (सेवादार /मुख्य पुजारी)होने का संकेत है।

मोटी मोड़दार टोपी या (शेख अब्दुल्ला, सज्जाद लोन टाईप टोपी) शिया होने का संकेत देता है।

मोटी मोड़दार टोपी या काला साफा प्लस काला चोंगा (अर्ध हिजाब)

शिया धर्म गुरू होने का संकेत है।

देवबंदी फिरके के अलावा सभी फिरके कहीं न कहीं सूफिज्म से पूर्णतः या अंशतः प्रभावित हैं।

खोजा मुस्लिम:

खोजा गुजरात का एक व्यापारी समुदाय है जिसने कुछ सदी पहले इस्लाम स्वीकार किया था। इस समुदाय के लोग शिया और सुन्नी दोनों इस्लाम मानते हैं।

इस समुदाय का बड़ा वर्ग गुजरात और महाराष्ट्र में पाया जाता है। पूर्वी अफ्रीकी देशों में भी ये बसे हुए हैं।

दाऊदी बोहरा:

बोहरा का एक समूह, जो दाऊदी बोहरा कहलाता है, इस्माइली शिया फ़िक़ह को मानता है और इसी विश्वास पर क़ायम है। अंतर यह है कि दाऊदी बोहरा 21 इमामों को मानते हैं।

बोहरा भारत के पश्चिमी क्षेत्र ख़ासकर गुजरात और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं जबकि पाकिस्तान और यमन में भी ये मौजूद हैं। यह एक सफल व्यापारी समुदाय है जिसका एक धड़ा सुन्नी भी है।

इस्ना अशरी:

सुन्नियों की तरह शियाओं में भी कई संप्रदाय हैं लेकिन सबसे बड़ा समूह इस्ना अशरी यानी बारह इमामों को मानने वाला समूह है। दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत शिया इसी समूह से संबंध रखते हैं। इस्ना अशरी समुदाय का कलमा सुन्नियों के कलमे से भी अलग है।

इस्माइली शिया:

शियों का यह समुदाय केवल सात इमामों को मानता है और उनके अंतिम इमाम मोहम्मद बिन इस्माइल हैं और इसी वजह से उन्हें इस्माइली कहा जाता है।

शियाओं का दूसरा बड़ा सांप्रदायिक समूह ज़ैदिया है, जो बारह के बजाय केवल पांच इमामों में ही विश्वास रखता है। इसके चार पहले इमाम तो इस्ना अशरी शियों के ही हैं लेकिन पांचवें और अंतिम इमाम हुसैन (हज़रत अली के बेटे) के पोते ज़ैद बिन अली हैं जिसकी वजह से वह ज़ैदिया कहलाते हैं।

इसके अलावा सल्फ़ी, वहाबी और अहले हदीस भी कट्टरपंथी मुस्लिम हैं।

भारत में मुसलमानों के जितने फिरके एक साथ निवास करते हैं इतने दुनियां में कहीं और नहीं मिलेंगे।

ज्यादातर मुस्लिम देशों में एक या दो फिरके (सम्रदाय) ही निवास करते हैं।

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