केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज बड़ा फैसला लेते हुए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया को बैन कर दिया। पीएफआई पर ये प्रतिबंध पांच साल के लिए लगाया गया है। बताया जा रहा है कि ये प्रतिबंध पीएफआई से जुड़े दूसरे संगठनों पर भी लागू होगा।
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का गठन 17 फरवरी 2007 को हुआ था। ये संगठन दक्षिण भारत के तीन मुस्लिम संगठनों का विलय करके बना था। इनमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिथा नीति पसराई शामिल थे। पीएफआई का दावा है कि इस वक्त देश के 23 राज्यों यह संगठन सक्रिय है। देश में स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट यानी सिमी पर बैन लगने के बाद पीएफआई का विस्तार तेजी से हुआ है। कर्नाटक, केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में इस संगठन की काफी पकड़ बताई जाती है। इसकी कई शाखाएं भी हैं। गठन के बाद से ही पीएफआई पर समाज विरोधी और देश विरोधी गतिविधियां करने के आरोप लगते रहते हैं।
PFI को फंड कैसे मिलता है?
पिछले साल फरवरी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PFI और इसकी स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के पांच सदस्यों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दायर की थी। ED की जांच में पता चला था कि PFI का राष्ट्रीय महासचिव के ए रऊफ गल्फ देशों में बिजनेस डील की आड़ में पीएफआई के लिए फंड इकट्ठा करता था। ये पैसे अलग-अलग जरिए से पीएफआई और CFI से जुड़े लोगों तक पहुंचाए गए।
जांच एजेंसी के मुताबिक लगभग 1.36 करोड़ रुपये की रकम आपराधिक तरीकों से प्राप्त की गई। इसका एक हिस्सा भारत में पीएफआई और सीएफआई की अवैध गतिविधियों के संचालन में खर्च किया गया। सीएए के खिलाफ होने प्रदर्शन, दिल्ली में 2020 में हुए दंगों में भी इस पैसे के इस्तेमाल की बात सामने आई थी। पीएफआई द्वारा 2013 के बाद पैसे ट्रांसफर और कैश डिपॉजिट करने की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि भारत में पीएफआई तक हवाला के जरिए पैसा आता है।

यह है मोहम्मद अली जिन्ना, जो महासचिव, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का जनरल सेक्रेट्री है। अभी अरेस्ट है। CAA के विरोध को भड़काने में इसका बड़ा रोल रहा है। हालांकि PFI अपने ऊपर लगे वित्तीय आरोपों की रिपोर्टों को खारिज करती रही है। रिपोर्ट्स में कहा गया था कि PFI से जुड़े 73 बैंक खातों के माध्यम से CAA के विरोध के लिए 120 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।
27 सितंबर को PFI ने tweet किया था-प्रिवेंटिव कस्टडी(Preventive Custody) के नाम पर बीजेपी शासित राज्यों में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हो रही हैं। यह और कुछ नहीं बल्कि पीएफआई को निशाना बनाने के केंद्र सरकार के विच-हंट(संदिग्धों की धरपकड़- witch-hunt targeting) के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध के अधिकारों की रोकथाम है।

PFI के जिन 13 प्रमुख चेहरों को अरेस्ट किया गया, उनमें नेशनल एग्जिक्यूटिव कमेटी मेंबर एएस इस्माइल भी शामिल है। जिन लोगों को अरेस्ट किया गया वे हैं-ओएमए सलाम अध्यक्ष, ईएम अब्दुल रहमान उपाध्यक्ष, अनीस अहमद महासचिव, वीपी नजरुद्दीन सचिव, अफसार पाशा सचिव, मोहम्मद साकिब सचिव, मोहम्मद अली जिन्ना एनईसी सदस्य, प्रोफेसर पी कोया एनईसी सदस्य, वकील मोहम्मद यूसुफ एनईसी सदस्य, अब्दुल वाहिद सैत एनईसी सदस्य, ए एस इस्माइल एनईसी सदस्य, मोहम्मद आसिफ एनईसी सदस्य और डॉ.मोहम्मद मिनारुल शेख एनईसी सदस्य।

PFI के संस्थापक सदस्य पहले स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी (SIMI) के नेता रहे हैं। PFI का कनेक्शन जमात-उल-मुजाहिद्दीन (JMB) से भी रहा है। ये दोनों संगठन पहले से ही बैन हैं।
PFI के इंटरनेशनल टेरोरिस्ट इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानी आईसआईएस (ISIS) के साथ संबंध सामने आए थे।

PFI पर बैन लगाने के लिए केंद्रीय सरकार ने विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967(Unlawful Activities (Prevention) Act यानी UAPA) की धारा 3 की उप-धारा 1 के अधीन शक्तियों का प्रयोग किया गया।
PFI के सहयोगी संगठन रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI),ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (AIIC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन, रिहैब फाउंडेशन पर भी बैन।
NIA, ED और राज्यों की पुलिस ने 22 और 27 सितंबर को PFIऔर उससे जुड़े संगठनों पर छापेमारी की थी। पहली छापेमारी में 106 और दूसरे राउंड की छापेमारी में 250 PFI नेता-कार्यकर्ता अरेस्ट किए गए।

कर्नाटक के गृहमंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा-मैं इसका स्वागत करता हूं। केंद्र सरकार ने सांप्रदायिक पीएफआई और उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की है जो देश में आतंकवादी कृत्यों को सहायता और बढ़ावा दे रहे थे।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने कहा-कई राज्यों में आतंकवादी घटनाएं (PFI द्वारा) हुईं, राष्ट्र को विघटित किया और हिंसा फैलाई। इसलिए हम इस कदम का स्वागत करते हैं।
पीएफआइ के सदस्य पूरी दिल्ली में युवाओं को प्रशिक्षण दिलाने के साथ ही उन्हें इस्लाम के नाम पर गुमराह कर रहे हैं। कार्रवाई के दौरान जो दस्तावेज बरामद किए गए हैं। उनमें भी राजधानी में हिंसा फैलाने की साजिश रचे जाने की पुष्टि हुई है।
देश की एकता और समरसता के लिए खतरा बन चुके पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (PFI) की जड़ों को तलाशने के लिए दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने बेहद गोपनीय तरीके से ‘ऑपरेशन मिड नाइट’ को अंजाम दिया। यह कार्रवाई दिल्ली के उन छह जिलों में की गई, जहां पीएफआइ ने अपनी जड़ों को काफी मजबूत कर लिया था।
रात भर अलर्ट रही सभी जिलों की पुलिस
हालांकि इस कार्रवाई पर दिल्ली के सभी जिलों की पुलिस हर समय नजर रखे हुए थी। यही नहीं संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था, ताकि हिंसा फैलाने की हर कोशिश को नाकाम किया जा सके।
22 सितंबर को ईडी ने पीएफआइ के दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष मोहम्मद परवेज अहमद, महासचिव इलियास अहमद और आफिस सचिव अब्दुल मुकीत को गिरफ्तार किया था। तीनों को अबुल फजल एन्क्लेव स्थित इनके घरों से गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों के मुताबिक इनसे पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों को पता चल कि पीएफआइ राजधानी को हिंसा की आग में झोंकने के प्रयास में जुटी हुई है।
गृह मंत्रालय की थी नजर, पुलिस आयुक्त ने खुद संभाली कमान
दिल्ली में किसी संगठन के खिलाफ ये अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई थी। ऐसे में ऑपरेशन मिड नाइट पर गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल नजर बनाए हुए थे। इस ऑपरेशन की कमान पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने खुद संभाल रखी थी।
गृह मंत्रालय को दी जा रही थी पल-पल की रिपोर्ट
शाहीनबाग, जामियानगर उत्तर पूर्वी दिल्ली जैसे संवेदनशील इलाकों में कार्रवाई की वह पल-पल की रिपोर्ट अधिकारियों से ले रहे थे और इसे गृह मंत्रालय को दे रहे थे। इसलिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जिला पुलिस व अन्य यूनिटों के साथ मिलकर सोमवार की रात डेढ़ बजे ही सभी इलाकों को कब्जे में ले लिया था और फिर ये कार्रवाई सुबह पांच बजे तक चलती रही।
आइए आपको बताते हैं कि पीएफआई क्या है और इस संगठन का मंसूबा क्या है…
देश के 20 राज्यों में है संगठन की यूनिट
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया 22 नवंबर 2006 को तीन मुस्लिम संगठनों के मिलन से बना था, जिसमें केरल का नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट, कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और तमिलनाडु का मनिता नीति पसरई शामिल है, जबकि PFI खुद को गैर-लाभकारी संगठन बताता है। फ़िलहाल, PFI में कुल कितने सदस्य हैं, इसकी जानकारी संगठन नहीं देता है। हालांकि, दावा किया जाता है कि 20 राज्यों में उसकी यूनिट है। शुरुआत में PFI का हेडक्वार्टर केरल के कोझिकोड में स्थित था, लेकिन बाद में इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।
PFI के अपने नियम और कायदे-कानून
बता दें कि पीएफाई की अपनी ही यूनिफॉर्म भी है और इसके अपने नियम, कायदे-कानून हैं. हर साल 15 अगस्त को PFI फ्रीडम परेड का आयोजन करता है, लेकिन साल 2013 में केरल सरकार ने इस परेड पर रोक लगा दी थी। वो इसलिए क्योंकि PFI की यूनिफॉर्म में पुलिस की वर्दी की तरह ही सितारे और निशान बने होते हैं।
हिंदुस्तान में इस्लामी शासन का लक्ष्य
गौरतलब है कि बीते दिनों फुलवारी शरीफ के नया टोला से गिरफ्तार किए गए देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त आरोपितों के पास से मिली बुकलेट एक खतरनाक मिशन की ओर इशारा कर रहे हैं। इसमें 2047 में भारत की सेना से लेकर सरकार तक में कब्जा जमाकर देश में इस्लामिक संविधान लागू करने की मंशा है। इस तरह के सात पन्नों का बुकलेट और कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं। एफआइआर में इसका उल्लेख है। मिले दस्तावेज में 2047 तक के मिशन के बारे में बताया गया है।
राष्ट्र बनाना है। इस दस्तावेज में ये भी लिखा है कि 10% मुस्लिम भी साथ दें, तो कायरों को घुटनों पर ला देंगे। इसके लिए इनके पास 4 लेयर का पूरा प्लान है।’
7. महाराष्ट्र एनआईए (Maharashtra NIA) ने खुलासा किया था कि पीएफआई ने बीजेपी के टॉप लीडर्स व आरएसएस को निशाना बनाने की साजिश रची थी। दशहरा पर आरएसएस मुख्यालय व बीजेपी नेताओं को निशाना बनाने की फिराक में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India) था। पूरी तैयारियां थीं।
8. 22 सितंबर की रेड में ईडी ने कोझिकोड से PFI वर्कर शफीक पायथे को गिरफ्तार किया था। ईडी ने बताया कि पीएफआई ने पटना में 12 जुलाई को पीएम मोदी की रैली में हमला की साजिश रची थी, इसकी फंडिंग में शफीक पायथे भी था। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार पीएफआई के साजिशकर्ता यह चाहते थे कि अक्टूबर 2013 की घटना की पुनरावृत्ति हो। दरअसल, 2013 में पटना के गांधी मैदान में बीजेपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात नरेंद्र मोदी की रैली में सिलसिलेवार बम ब्लास्ट हुए थे।
9. जांच एजेंसी एनआई के पास इस बात का भी इनपुट था कि कई राज्यों में पिछले कुछ महीनों से PFI बड़े स्तर पर ट्रेनिंग कैंप लगा रही है। तेलंगाना पुलिस की कोर्ट डायरी के मुताबिक, पीएफआई मुस्लिम बहुल इलाकों में लड़कों का ब्रेनवॉश करना, मार्शल आर्ट के जरिए नए लड़कों को आतंक की ट्रेनिंग, कुंगफू और कराटे सिखाकर आतंकियों को तैयार करना, कश्मीर मॉडल के तहत लड़कों को पत्थर चलाने की ट्रेनिंग देना जैसे कामों में शामिल हैं।
10. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया एक कट्टर इस्लामिक संगठन है। यह खुद को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकार के लिए आवाज उठाने वाला बताता है, लेकिन देश के कई राज्यों में हुए दंगों में इस संगठन का कनेक्शन पाया गया है। पीएफआई को लेकर कहा जाता है कि इस संगठन का केरल मॉड्यूल ISIS के लिए काम करता था। केरल से इसके कई मेंबरों ने सीरिया और इराक में ISIS को ज्वॉइन किया था।
11. पीएफआई की स्थापना 1993 में बने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट से ही हुई है। 1992 में बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम से एक संगठन बना था। इसके बाद 2006 में नेशनल डेमाक्रेटिक फ्रंट का विलय पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) में हो गया। हालांकि, ऑफिशियल इस संगठन की शुरुआत 17 फरवरी, 2007 में हुई। यह संगठन केरल से ही संचालित होता है लेकिन पूरे देश में इसके लोग फैले हुए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक पीएफआई देश के 23 राज्यों में सक्रिय है।
12. पीएफआई को स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेट ऑफ इंडिया यानी सिमी का ही विकल्प माना जाता है। 1977 में बने सिमी को 2006 में बैन कर दिया गया। उसके बाद मुसलमानों, आदिवासियों और दलितों के हक की बात करने के लिए इस संगठन की स्थापना हुई, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ये एक कट्टर इस्लामिक संगठन है, जिसका नाम देशभर में हुए कई दंगों में सामने आ चुका है। इसकी संदिग्ध गतिविधियों के चलते कई बार इसे बैन करने की मांग उठ चुकी है।
13. PFI को खाड़ी देशों के अलावा भारत के ही कई मुस्लिम कारोबारियों से इन गैर कानूनी गतिविधियों को चलाने के लिए फंडिंग हो रही थी। इसी के चलते छापेमारी में NIA के साथ ED को भी शामिल किया गया।
14. 2016 में बेंगलुरु के आरएसएस नेता रुद्रेश की हत्या दो अज्ञात बाइक सवारों ने की थी। शहर के शिवाजीनगर में हुए इस मर्डर में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था और ये चारों पीएफआई से जुड़े थे।
15. पीएफआई पर उत्तरी कन्नूर में एक ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप भी लग चुका है। 2013 में कन्नूर पुलिस ने बताया था कि इस कैंप से तलवार, बम, देसी पिस्टल और आईईडी ब्लास्ट में काम आने वाली चीजें बरामद हुई थीं। दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर मप्र में खरगोन दंगों और उदयपुर में टेलर का सिर कलम करने जैसे मामलों में भी PFI की ही भूमिका सामने आई थी।











