Wednesday, February 25, 2026
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देश का सबसे सनसनीखेज खुलासा: दस्तावेज आपरेशन 2047,इस्लामिक मुल्क भारत,निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शामिल जिहादी और सत्ता के भूखे खानदान

फुलवारी शरीफ टेरर मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद छानबीन में कई चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आ रहे हैं. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने मिशन-2047 के लिए बिहार में दो स्‍तर की प्‍लानिंग की है. PFI पहले चरण के तहत प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में स्थित मस्जिदों को साधने की साजिश रची है, ताकि अपना ‘संदेश’ बिहार के अंदरुनी हिस्‍सों में फैलाया जा सके. दूसरे चरण के तहत शारीरिक शिक्षा को रखा गया है. इसके तहत युवाओं को मार्शल आर्ट, तलवारबाजी आदि सिखाने की प्‍लानिंग है. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वापस जाने वाले युवाओं को अपने गांवों और इलाकों में ज्‍यादा से ज्‍यादा युवाओं को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिए जाने की बात कही गई है, ताकि उनलोगों को संगठन से जोड़ा  जा सके. पीएफआई की साज‍िशों का पता चलने से केंद्रीय एजेंसियों के साथ ही बिहार पुलिस भी सतर्क हो गई है.

पटना और बिहार के अन्य जिलों में बेनकाब हुए PFI और पाकिस्तानी साजिश की जांच अब NIA के हाथों में चली गई है, इस पूरे मामले में  जांच की गति बेहद तेज हो गई है लेकिन जिस तरह से राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ और बिहार के अन्य जिलों से आतंक का मॉड्यूल बेनकाब हुआ है वह बेहद चौंकानेवाला है.

खतरनाक थे आतंकियों को मंसूबे
इस सब में सबसे हैरान और चिंताग्रस्त कर देने वाली बात बाद यह है कि आतंकी साजिश में भारत को तबाह करने का तो पूरा खाका तैयार किया ही गया है खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने का आतंकियों का मंसूबा पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है.

पीएम मोदी के खिलाफ भी आंतकी रच रहे थे साजिश

11 जुलाई को राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से अतहर परवेज और मोहम्मद जलालुद्दीन की गिरफ्तारी हुई, तब पुलिस से लेकर मीडिया तक को लगा कि यह दो लोगों की गिरफ्तारी उनके आतंकी कनेक्शन तक ही सिमटी हुई है. इसके बाद जैसे-जैसे पिछले 1 सप्ताह में इस मामले की जांच आगे बढ़ी वैसे-वैसे भारत के खिलाफ, देश के नागरिकों के खिलाफ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बड़ी साजिशों का खुलासा होने लगा.

पाकिस्तान की तरफ से रची गई थी यह साजिश, हुआ खुलासा

शुरुआती दौर में पुलिस ने PFI के संदिग्ध चरित्र को लेकर मामले की जांच शुरू की, लेकिन ज़ी बिहार झारखंड ने पहले ही बता दिया था कि यह सिर्फ साजिश नहीं बल्कि एक फुलप्रूफ पुख्ता प्लान है जिसके मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठे हुए हैं और यह सारा मॉड्यूल राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ से संचालित हो रहा है. शुरुआती दौर में ही इस बात की तस्दीक कर दी गई थी कि फुलवारी शरीफ में देश विरोधी साजिश तो हो ही रही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर भी यहां पर किसी तरह की साजिश की बू आ रही है. नूपुर शर्मा को लेकर जो साजिश चल रही थी हमने पहले ही बता रखा था और यह भी बताया था कि पाकिस्तान से इस पूरे मामले का कनेक्शन है लेकिन शुरुआती दौर में पुलिस ने सारी बातों को नकार दिया. बाद में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई इस खबर पर मुहर भी लगती गई. प्रधानमंत्री के खिलाफ साजिश भी बेनकाब हुई,नूपुर शर्मा के खिलाफ साजिशों का पर्दाफाश हुआ और पाकिस्तान का सारा भांडा फोड़ हो गया.

पीएम मोदी के बिहार के दौरे के वक्त हुआ इस आतंकी मॉड्यूल का खुलासा
दरअसल पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब 12 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक दिवसीय पटना दौरा था. जहां पर वह विधानसभा में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए पहुंचने वाले थे. लिहाजा सारी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर थीं और पटना पुलिस भी अलर्ट पर थी. इसी दौरान 11 जुलाई को फुलवारी शरीफ के एएसपी मनीष कुमार को इलाके के नया टोला मोहल्ले में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलती है. इसके बाद एएसपी फोन पर एक टीम गठित करते हैं और नया टोला में मोहम्मद जलालुद्दीन के अहमद पैलेस स्थित आवास पर पहुंचते हैं और वहां पर जब सारी चीजों की छानबीन होती है तो पता चलता है कि नया टोला में आतंक का नया मॉड्यूल तैयार हो रहा था.
पाकिस्तान के कई आंतकी संगठनों से जुड़े हैं इन आतंकियों के तार
अहमद पैलेस से मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज की गिरफ्तारी होती है. इसके बाद उनकी शिनाख्त पर अरमान मलिक की भी गिरफ्तारी होती है और उसके बाद खुलासा होता है साल 2047 के साजिश का, इसी कड़ी में जब पुलिस पूरी छानबीन कर रही होती है तो पुलिस को एक नंबर संदिग्ध प्रतीत होता है और जब पुलिस जांच करती है तो यह नंबर पाकिस्तान से कनेक्टेड मिलता है. इस नंबर पर जो शख्स संपर्क में पाया जाता है उसका नाम मोहम्मद मरगूब अहमद दानिश होता है. शुरुआती दौर में तो दानिश पुलिस को बरगलाने की कोशिश करता है और खुद को मानसिक तौर पर बीमार साबित करने की कोशिश करता है लेकिन इसकी साजिश तो और भी खतरनाक निकलती है. यह पाकिस्तान के ‘गजवा-ए-हिंद’ से लेकर कट्टरपंथी संगठन ‘तहरीके लब्बैक’ से भी जुड़ा हुआ होता है.

बिहार के 19 जिले पीएफआई से प्रभावित
परत दर परत मामले खुलते जाते हैं और कई सारे साजिशों का भंडाफोड़ होता है और तब जाकर पता चलता है कि बिहार के 19 जिले पीएफआई से प्रभावित हो चुके हैं. जहां पर मार्शल आर्ट और अन्य परंपरागत हथियारों की ट्रेनिंग के नाम पर आतंक की फैक्ट्री चलाई जा रही है. जिसमें युवकों को यह ट्रेनिंग दी जाती है कि चाकू कहां मारने से 2 मिनट में मौत हो जाएगी, सर पर डंडा कहां पड़ेगा तो आदमी पल भर में दम तोड़ देगा और हत्या के लिए कहां पर वार होगा तो आदमी सांस भी नहीं ले सकेगा. यह तो बात हो गई परंपरागत हथियारों की लेकिन बंद कमरे में भटके युवाओं को आयरन की भी ट्रेनिंग बकायदा ह्यूमन एनाटॉमी पर दी जाती थी कि कहां गोली मारने पर सटीक निशाना लगेगा और कहां गोली मार देने से आदमी की मौत चंद सेकेंड में हो जाएगी.

PFI को कई देशों से हो रही थी साजिश के लिए फंडिंग
पूरे मामले की छानबीन में हमें यह पता चला कि दोहा की एक संस्था जिसका नाम रास लाफेल है वह PFI की फंडिंग किया करती है और पैन इंडिया मूवमेंट चलाने का भी पर्दाफाश हुआ है. जिसके तहत यह संस्था पूरे देश में फैले 12 लोगों की टीम के जरिए मुस्लिम बहुल स्कूल और कॉलेजों में टैलेंट सर्च के नाम पर बच्चों और युवाओं को चयनित करते और फिर उन्हें ब्रेनवाश के जरिए देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करते थे.

आपरेशन 2047

बिहार पुलिस के हत्थे चढ़े दो संदिग्ध लोगों की पूछताछ में होश उड़ाने वाले खुलासे हुए हैं। देश में सक्रिय प्रतिबंधित संगठन ‘मिशन इस्लाम 2047’ पर काम कर रहे हैं। मीडिया में यह शब्द आने के साथ ही लोगों की देश दुनिया के लोगों में दिलचस्पी बनी हुई है कि आखिर ‘मिशन इस्लाम 2047’ क्या है। इससे भारत को क्या नुकसान होने वाला है। इसके पीछे कौन लोग काम कर रहे हैं। इसकी फंडिंग कहां से हो रही है। इस मिशन के नाम में 2047 क्या है। ऐसे कई सवाल हैं जो लोगों जेहन में उठ रहे हैं। उठना भी लाजिमी है, क्योंकि यह सीधे तौर से देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मसला है। आइए बारी-बारी से बिन्दुवार सारे सवालों का जवाब समझने की कोशिश करते हैं।

कहां से आया ‘मिशन इस्लाम 2047’ का नाम
बिहार पुलिस ने पटना के फुलवरीशरीफ में छापेमारी कर देश विरोधी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया। पुलिस ने नयाटोला में चलाए जा रहे एक कार्यालय में छापेमारी कर दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। यहां से पुलिस को कई आपत्तिजनक सामान बरामद हुए हैं। पुलिस को तलाशी के दौरान पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के मिशन 2047 का भी भंडाफोड़ हुआ है। फुलवरीशरीफ के सहायक पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर की गई छापेमारी के बाद कई दस्तावेज, झंडा, पैंपलेट, बुकलेट बरामद हुए है, जो मिशन से जुड़ा है। ये दस्तावेज 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने से जुड़े हुए हैं।

‘मिशन इस्लाम 2047’ से कौन लोग जुड़े हैं?
पटना पुलिस ने बातचीत में बताया कि ‘मिशन इस्लाम 2047’ में काफी लोगों के जुड़े होने की संभावना है। उनका कहना है कि जांच पक्रिया पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। पुलिस कार्रवाई में गिरफ्तार लोगों की पहचान झारखंड पुलिस से सेवानिवृत्त दारोगा मोहम्मद जलालुद्दीन और अतहर परवेज के रूप में की गई है। यही बात पटना पुलिस को ज्यादा अलर्ट मोड में आने को मजबूर कर रही है। विभाग के आला अफसरों का कहना है कि पुलिस सेवा में रहने के बाद भी अगर कोई ‘मिशन इस्लाम 2047’ जैसे कार्य कर रहे संगठन से जुड़ा है तो यह चिंता का विषय है। पटना पुलिस का कहना है कि ऐसे संगठन से पुलिस महकमे के लोगों की संलिप्तता खतरे की घंटी है।

‘मिशन इस्लाम 2047’ का क्या है मकसद?
प्रतिबंधित संगठनों ने भारत को ध्यान में रखकर ‘मिशन इस्लाम 2047’ तैयार किया है। इसका मुख्य मकसद 2047 तक भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाना है। मिशन को सफल बनाने के लिए कई स्तर की प्लानिंग की गई है। उदाहरण के तौर पर देश के अलग-अलग कोने से ऐसे लोगों का चयन करना जो इस तरह की सोच को सपोर्ट करते हैं। ऐसे लोगों का चयन कर उन्हें विशेष ट्रेनिंग देना। ट्रेंड लोग समाज में जाकर अपने तर्कों से लोगों की सोच बदलने का काम करेंगे। ट्रेनिंग के दौरान दो समुदायों के बीच विद्वेष फैलाने का काम करना है।

‘मिशन इस्लाम 2047’ के तहत कैसे चलाए जा रहे थे ट्रेनिंग सेंटर
फुलवारीशरीफ के एएसपी मनीष कुमार अफसर ने बताया कि 6 और 7 जुलाई को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग के नाम पर फुलवारीशरीफ में कैंप लगाया गया था। इस ट्रेनिंग कैंप में चरमपंथी सोच के लोग कैंप में आए लोगों को तलवार, चाकू की ट्रेनिंग दी गई। इस दौरान उन्हें दो समुदायों के बीच विद्वेष फैलाने वाले शब्द और नारे सिखाए गए। पुलिस का कहना है कि पूरे क्रियाकलाप की CCTV फुटेज भी मौजूद है।

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