जावेद और अल्ताफ़ एक मनी एक्सचेंज कंपनी चलाते थे जिनका एक नंबरिया काम तो सिम्पल था, दुनिया में कहीं से भी पैसा मँगवाओ और हमसे ले जाओ। बदले में छोटा सा कमीशन दे दो।
अब दो नंबरिया काम था नकली नोट बनाना, हवाला रैकेट मैनेज करना और इस काले पैसे को सफ़ेद करना यानि मनी लोंडरिंग करना। इस रुपये के घोटालों में ये आदमी एक नहीं तीन-तीन बार अरेस्ट हुआ पर कोर्ट पहुँचने से पहले ही इसकी बेल हो गई क्योंकि संभवतः बड़े संगठन का इसके सिर पर हाथ था।
जावेद और अल्ताफ़ के पास हर वक़्त 1000 से 1500 करोड़ इंडियन करन्सी में मौजूद रहते थे। पर समस्या ये थी कि हमारे देश को बर्बाद करने की कोशिशों के साथ-साथ ये भाई बंधु पाक्सतां की ईकानमी की भी बजा रहे थे।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार 2009 आते-आते पूरे मुल्क का 30 से 40 पर्सेन्ट मनी एक्सचेंज ये भाई हवाला से करते थे।
हवाला समझते हैं न? इधर आपने मुझे 1 करोड़ रुपये दिए और उधर मैंने अमेरिका में बैठे आपके ताऊ के लड़के को को 1 लाख डॉलर दे दिए और बचा कमिशन जेब में रख लिया। अब इस एक करोड़ या एक लाख का, कहीं कोई ट्रेस नहीं, ये पूरी तरह टैक्स फ्री पैसा है। अब इसी पैसे को नंबर दो से एक करने के लिए भी यही दोनों बंधु काम करते थे।
अल्ताफ़ मौका रहते अमेरिका निकल लिया और वहाँ मनी लोंडरिंग करने लगा।
अब ध्यान दीजिए डेट्स पर – 11 सितंबर 2015 को अमेरिका में ड्रग्स-एंफोर्समेंट-ऐड्मिनिस्ट्रैशन को एक टिप मिली जिसके द्वारा खनानी और कालिया की कंपनी पर छापा मार और अल्ताफ़ को अरेस्ट कर लिया।
इसको – 7 नवंबर 2016 को यूएस कोर्ट से 20 साल की सज़ा और ढाई लाख डॉलर्स का जुर्माना मिला और 8 नवंबर 2016 शाम 8 बजे से … इधर भारत में हंगामा हो गया।
यहाँ क्रनालजी समझनी होगी कि खनानी को जेल से बचना है और धँधा करना है तो ड्रग्स, हथियार, पॉलिटिक्स और आईएसआई, नाम के चारों पिलर्स से साँठ-गांठ करके चलना पड़ेगा। इन साँठ-गांठ में करोड़ों के लेन-देन के वायदे भी होते हैं। इन्हीं वायदों में से एक वो रकम भी थी जो इसे उज़ैर बलोच के पॉलिटिकल मूवमेंट के लिए देनी थी।
पर नोटबंदी की वजह से हज़ार करोड़ से ऊपर की करेंसी फ़क्त कागज़ हो गई और एक महीना भी नहीं बीता था कि 4 दिसम्बर 2016 को जावेद खनानी अपनी आठ मंजिला बिल्डिंग से नीचे गिर गया। ऐसा उसके पार्टनर्स ने कहा..
हालाँकि उसकी फ़ैमिली ने कहा कि जावेद ने सुसाइड कर लिया।
पर हक़ीकतन वो आठवीं मंजिल से ऐसे फेंका गया या गिरा कि पहले बिजली की खतरनाक वायर्स से टकराया, वहाँ भयंकर स्पार्क हुआ और फिर वो ज़मीं तक पहुँचा तो तड़क चुका था। ग्राउन्ड फ्लोर पर काम करते उसके वर्कर्स तुरंत अस्पताल ले गए पर जावेद का टिकट कट चुका था।
मुश्ताक नाम का एसपी, जिसका ज़िक्र धुरंधर में 2 बार है; उसने जावेद की मौत पर एक जाँच बिठाई जिसमें हत्या, आत्महत्या और हादसा, तीनों पर इंक्वैरी करनी थी, पर ये जाँच कभी पूरी न हो सकी।
आप धुरंधर 2 में जावेद को बिजली के तारों में गिरते हुए देखेंगे, वो 26-11 को जितना खुश हुआ था, 4 दिसम्बर को उतना ही बुरा तड़पता हुआ नज़र आयेगा। बस फ़र्क इतना होगा कि उसकी मौत जो असल में दोपहर डेढ़ बजे हुई थी, वो रात के समय होती दिखाई जायेगी ताकि बिजली के तारों से निकलती चिंगारी मिल सके।
बादबाक़ी नोटबंदी ने तो जो किया सो किया, असल खेल हमारे यूपीआई ने खेला। पेमेंट ट्रांसफर तो हमारे देश के लिए भी एक जटिल प्रक्रिया थी, लेकिन पता ही न चला कि कब नोट्स का चलन बहुत पीछे हो गया और 10 रुपये के पान से लेकर 1 लाख की स्कूटी भी ऑनलाइन पेमेंट से खरीदी जाने लगी।
अब आप सोचकर बताओ कि जावेद खनानी गिरा था, कूदा था या उज़ैर ने उसे…
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