Monday, February 2, 2026
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मोदी ने 3 घंटे में वो कर दिया, कोई नेहरू,कोई इंदिरा,कोई राजीव कोई मनमोहन नहीं कर पाया

मात्र 3 घंटे में हुई इस ‘Deal’ से पलटा दुनिया का खेल! भारत बना खाड़ी देशों का ‘परमाणु कवच’, US-PAK रह गए चौकन्ने!

दुनिया की कूटनीति में कई बार बड़े फैसले महीनों या सालों की लंबी बातचीत के बाद होते हैं, लेकिन 2026 में भारत-UAE के बीच हुई यह डील पूरे विश्व के लिए बेहद चौंकाने वाली रही।

मात्र 3 घंटे की मुलाकात ने मिडिल ईस्ट का पूरा की पूरा पावर बैलेंस बदल कर रख दिया और पाकिस्तान समेत कई देशों के लिए नया परिदृश्य तैयार कर दिया।

ये डील है ‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’

दिल्ली में UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) की प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक के दौरान एक ऐसा समझौता हुआ, जिसने अरब दुनिया की सुरक्षा की दिशा ही बदल दी। यह डील सिर्फ न्यूक्लियर पावर प्लांट संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे रणनीतिक विशेषज्ञ ‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’ के रूप में देख रहे हैं।

UAE के बाराक न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भारत की निगरानी का अधिकार मिलना इस बात का सबसे बड़ा संकेत है कि अब खाड़ी देशों की सुरक्षा का एक बड़ा भाग भारत के भरोसे होगा। इस प्लांट को अब भारत की कंपनी NPCIL (न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) ऑपरेट करेगी। यह प्लांट अरब दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है, और इसके लिए अब तक दक्षिण कोरिया और अमेरिका जिम्मेदार थे।

भारत की ये ‘डील’ नई सुरक्षा गारंटी

विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील सिर्फ तकनीकी साझेदारी नहीं है, बल्कि एक नई सुरक्षा गारंटी भी है। भारत के विशेषज्ञ UAE की सुरक्षा प्रणाली, वैज्ञानिक और ऑपरेशनल कंट्रोल में सीधे योगदान देंगे। यदि कोई तीसरा देश इस संयंत्र को निशाना बनाता है, तो इसे भारत के हितों पर हमला माना जाएगा। यही वजह है कि इसे ‘वर्चुअल न्यूक्लियर अंब्रेला’ कहा जा रहा है।

पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा

इस डील से पाकिस्तान की पुरानी रणनीति पूरी तरह असफल हो गई है। बीते महीनों में पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ म्यूचुअल डिफेंस डील कर अरब दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया था। लेकिन, भारत ने मात्र 3 घंटे की बैठक में ही मिडिल ईस्ट की सुरक्षा की दिशा बदल दी। UAE ने पूरी तरह से साफ़ कर दिया कि अब वह अपने सुरक्षा और ऊर्जा संसाधनों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहेगा बल्कि भारत को अपना रणनीतिक साझेदार चुना है।

खासतौर यह डील आगामी वक़्त में तेल के बाद की विश्व की तस्वीर भी बदल सकती है। UAE क्लीन एनर्जी, डेटा, AI और तकनीक पर फोकस कर रहा है। ऐसे में भारत का चुनाव उसके लिए एक स्मार्ट और विश्वसनीय विकल्प साबित हुआ। यह डील केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ज्ञान और तकनीकी हस्तांतरण का नया अध्याय भी शुरू करती है।

अमेरिका और चीन की बढ़ी टेंशन

इस समझौते के बाद अमेरिका और चीन की भी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिका हमेशा से चाहता था कि खाड़ी के देश उसकी सुरक्षा छतरी के नीचे रहें, जबकि चीन अपनी तकनीक के जरिए क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा था। लेकिन भारत ने खुद को एक सुरक्षित, विश्वसनीय और रणनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी वक़्त में इस डील के तहत मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम्स की तैनाती भी हो सकती है। यह ‘सुरक्षा कवच’ भारत और UAE के बीच भाई-भाई जैसा मजबूत रिश्ता स्थापित करेगा। जहां पहले सिर्फ व्यावसायिक और सैन्य साझेदारी थी, अब यह साझेदारी भविष्य की सुरक्षा और तकनीकी विश्वास का प्रतीक बन चुकी है।

बता दे, 3 तीन घंटे की यह मुलाकात भारत के लिए मिडिल ईस्ट में एक नई सुरक्षा और रणनीतिक भूमिका की शुरुआत है। पाकिस्तान और अन्य देशों के लिए यह एक साफ़ संदेश है कि अब अरब दुनिया की सुरक्षा भारत के भरोसे भी है और यह विश्वास केवल हथियारों या सैन्य ताकत पर नहीं, बल्कि तकनीकी और रणनीतिक क्षमता पर आधारित है।

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