Monday, February 2, 2026
Uncategorized

सनसनीखेज खुलासा:50 से ज्यादा हिंदू लड़कियां,औरतें अमीर घरों की,..5 मुसलमानों के 5 हेल्थ क्लब/ जिम,7 मुसलमान कोचों की गैंग

50+ लड़कियों के अश्लील वीडियो, हिंदुओं युवतियों का धर्मांतरण और आर्थिक-शारीरिक शोषण का जाल: पढ़ें- मिर्जापुर में AI के इस्तेमाल से चल रहे ‘जिम जिहाद’ की पूरी कारस्तानी

कारस्तानी

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में सामने आया ‘जिम जिहाद’ का मामला किसी एक जिम या एक आरोपित तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक ऐसा संगठित नेटवर्क है, जो वर्षों से फिटनेस और जिम की आड़ में चुपचाप काम कर रहा था। 2 हिंदू युवतियों की शिकायत ने जिस जिम जिहाद की परतें खोल दी हैं, उसने यह साफ कर दिया कि जिम जैसी सामान्य जगहों को भी इस्लामी कट्टरपंथियों ने योजनाबद्ध तरीके से धर्मांतरण, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण के अड्डों में बदल दिया है।

कैसे खुला जिम जिहाद का नेटवर्क?

इस मामले का खुलासा मंगलवार (20 जनवरी 2026) को हुआ जब मिर्जापुर देहात कोतवाली में 2 युवतियों की अलग-अलग तहरीरें दर्ज हुईं। शुरुआत में मामला आम शोषण जैसा दिखा लेकिन जैसे ही पुलिस ने आरोपितों के मोबाइल फोन खँगाले, पूरी तस्वीर सामने आ गई। जाँच में 50 से अधिक लड़कियों के अश्लील वीडियो और चैट मिले। इसके बाद 25 से 30 महिलाओं ने बिना अपनी पहचान उजागर किए पुलिस से संपर्क किया और धर्मांतरण तथा ब्लैकमेलिंग से जुड़ी जानकारी दी।

हिंदू लड़कियों ने पुलिस को बताया कि नारघाट महुवरिया इलाके में संचालित कम से कम 5 जिमों में मालिक और ट्रेनर वर्कआउट के बहाने पहले उनसे दोस्ती करते थे और फिर उन्हें धीरे-धीरे अपने जाल में फँसाया जाता था।

पीड़िताओं के अनुसार, ट्रेनर पहले भरोसा जीतते, नजदीकियाँ बढ़ाते और फिर AI का इस्तेमाल कर अश्लील फोटो और वीडियो तैयार करते थे। इन्हीं, फोटो-वीडियो के जरिए लड़कियों को ब्लैकमेल किया जाता था, उनसे पैसे वसूले जाते थे और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता था। विरोध करने पर वीडियो वायरल करने और जान से मारने की धमकी दी जाती थी।

बी-फिट जिम जाने वाली एक पीड़िता ने तहरीर में बताया कि वहाँ उसकी मुलाकात शेख अली नाम के ट्रेनर से हुई। ट्रेनिंग के दौरान उसने पहले दोस्ती बढ़ाई और फिर प्यार का नाटक कर भरोसा जीता। इसके बाद उसके साथ अश्लील हरकतें की गईं और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बना लिए गए जिनके जरिए लगातार ब्लैकमेल किया गया और पैसों की माँग की जाती रही।

पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपी ने उसके नाम पर लोन भी कराया। आर्थिक शोषण के साथ-साथ उसका धर्मांतरण भी कराया गया। उससे बुर्के में फोटो खिंचवाई गईं, घर पर पाँचों वक्त नमाज पढ़ने को कहा गया और दरगाह ले जाकर कलमा पढ़वाकर धर्मांतरण कराया गया। जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी गाली-गलौज पर उतर आया और जान से मारने के साथ-साथ वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा

शिकायत के बाद पुलिस ने जाँच के लिए 4 टीमों का गठन कर दिया। जाँच के बाद 21 जनवरी को पुलिस ने बी-फिट जिम के ट्रेनर मोहम्मद शेख अली और फैजल खान को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल की जाँच में बड़े खुलासे हुए। इसमें KGN-1 जिम के मालिक जहीर और KGN-3 जिम के मालिक शादाब का नाम सामने आया, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जाँच में यह भी पता चला कि KGN-2 और आयरन फायर जिम के तार भी इसी मामले से जुड़े हुए हैं।

एक परिवार, पाँच जिम और पूरा जिहादी नेटवर्क

जाँच में यह तथ्य सामने आया कि 5 में से 4 जिम एक ही परिवार के लोग चला रहे थे। KGN-1 जहीर के पास था, KGN-2.0 उसका भाई अशफाक उर्फ लकी खान चलाता था। आयरन फायर जिम फरीद अहमद के नाम पर था जबकि KGN-3.0 उसका जीजा शादाब संचालित करता था। जहीर का बड़ा भाई इमरान पहले जिम संचालन में शामिल रहा है और उसके पुराने मामलों की हिस्ट्रीशीट भी खंगाली जा रही है।

ड्यूटी के बाद जिहाद करता था कॉन्स्टेबल इरशाद

इस मामले में और भी गंभीर मोड़ तब आया जब भदोही जीआरपी में तैनात हेड कॉन्स्टेबल इरशाद खाँ की भूमिका भी इस जिहादी नेटवर्क में सामने आई। पुलिस के अनुसार, आयरन फायर जिम का वास्तविक संचालन उसकी निगरानी में होता था। कागजों पर मालिक फरीद अहमद था लेकिन इरशाद वर्षों से इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। वह ड्यूटी खत्म करने के बाद जिम पहुंचता था और पूरे जिहाद के इस नेटवर्क पर नजर रखता था।

अमीर घरों की महिलाओं को बनाते थे निशाना, 6 गिरफ्तार

इस मामले में अब तक मोहम्मद शेख अली, फैजल खान, जहीर, शादाब, फरीद अहमद और जीआरपी हेड कॉन्स्टेबल इरशाद खाँ को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, इमरान और अशफाक उर्फ लकी फरार हैं। दोनों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, यह गैंग बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। इनके निशाने पर खास तौर पर अमीर और प्रभावशाली परिवारों की महिलाएँ होती थीं। गैंग का एक सदस्य पहले महिला से नजदीकियाँ बढ़ाने और उसे अपने जाल में फँसाने की कोशिश करता था। अगर वह इसमें कामयाब नहीं होता, तो गैंग का दूसरा सदस्य आगे आता था और अलग तरीके से संपर्क साधता था।

पुलिस जाँच में यह भी सामने आया है कि जिन महिलाओं पर उन्हें शक होता था या जिन्हें आसानी से फँसाया जा सकता था तो उन्हें बहाने से दूसरे जिम में भेज दिया जाता था ताकि वहाँ गैंग के बाकी सदस्य उन्हें फँसा सकें। इस तरह गैंग अलग-अलग लोगों और स्थानों का इस्तेमाल कर महिलाओं को निशाना बनाता था। पुलिस ने बताया है कि आरोपित कई महिलाओं को फ्री जिम ट्रेनिंग का भी लालच देते थे। ट्रेनिंग के दौरान तस्वीरें ले ली जातीं और नंबर एक्सचेंज के बहाने ट्रेनिंग टिप्स और फिर निजी बातचीत शुरू की जाती। इन महिलाओं को बुर्का पहनाकर घुमाया जाता और इस्लाम अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।

जिम की फंडिंग की भी हो रही जाँच

ASP सिटी नितेश सिंह ने बताया है कि जिम की फंडिंग की भी जाँच चल रही है। पुलिस के मुताबिक, जिमों के सेटअप में लाखों रुपये लगाए गए थे। साथ ही, वहाँ काम करने वाले ट्रेनरों को केवल 10 से 15 हजार रुपए महीने का वेतन मिलता था, इसके बाद भी ट्रेनर रईसी में रहते है। महँगे मोबाइल फोन, ब्रांडेड कपड़े और जूते इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जिमों की फंडिंग किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।

पुलिस के मुताबिक, अब तक जाँच में 50 से अधिक लड़कियों के साथ ब्लैकमेलिंग के सबूत मिले हैं। बताया जा रहा है कि इस जिम की फंडिंग करने वालों में कई प्रतिष्ठित व्यवसायी और जनप्रतिनिधियों के नाम सामने आ रहे हैं।

जिम सील, जाँच जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए DM पवन कुमार गंगवार ने धारा 163 के तहत आदेश जारी कर पाँचों जिमों के संचालन पर 27 फरवरी 2026 तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सभी जिम पूरी तरह सील कर दिए गए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि दोबारा न हो सके। पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और संपर्कों की जाँच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह नेटवर्क और किन इलाकों तक फैला हुआ है।

Leave a Reply