17 फरवरी को अमावस्या के दिन 64 वर्षों बाद दुर्लभ संयोग के साथ वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण दोपहर 3:26 बजे से शुरू होकर शाम 7:57 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 4 घंटे 32 मिनट होगी। चरम स्थिति शाम 5:42 बजे पर रहेगी, जब सूर्य ‘रिंग ऑफ फायर’ की तरह दिखाई देगा।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य का कुंभ राशि में राहु के साथ युति में होना और चंद्रमा का शतभिषा नक्षत्र में होना इस ग्रहण को विशेष बना रहा है। बताया जा रहा है कि ऐसा योग आखिरी बार 1962 में बना था।
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। भारत में यह दृश्य नहीं होगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं रहेगा।
सूर्य ग्रहण जैसे खगोलीय घटनाएं वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत रोचक होती हैं। इन्हें देखने के लिए हमेशा प्रमाणित सोलर फिल्टर या सुरक्षित उपकरणों का उपयोग करना चाहिए, क्योंकि सीधे सूर्य को देखने से आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
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