आरोपी जुनैद और सुहेल का चाल-चलन खराब था। इस बात का अंदाजा दोनों बहनों को नहीं था। घटना के बाद आरोपियों की कहानियां सामने आ रही हैं। गांव वाले भी तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। ऐसी बात सामने आई कि पड़ोस के गांव के कुछ शोहदे योजनाबद्ध तरीके से इस तरह काम करते हैं। वे लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाते हैं। हकीकत जब सामने आती है तो बदनामी के डर से चुप रहती हैं। बुधवार को हुई घटना से पूर्व शोहदों के इस गिरोह को मालूम था कि लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया जाएगा। इसलिए बात जब बिगड़ गई तो कुछ मिनट के अंदर ही दो और आरोपी वहां पहुंच गए। हत्या के साक्ष्य मिटाने में जुनैद, सुहेल और मंझीलका की मदद की। पुलिस सूत्रों का भी यही कहना है कि आम लड़के इतनी जल्दी, इस तरह की घटना को अंजाम नहीं दे सकते।
आईजी-एसपी के बयान से नाराज दिखे परिजन
बुधवार को एसपी संजीव सुमन और आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह के प्रथमदृष्टया आत्महत्या की बात कहने पर बृहस्पतिवार को परिजनों ने नाराजगी जताई। परिजनों ने कहा कि आरोपी उनके घर के सामने से बेटियों को अगवा करके ले गए, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि बहला फुसलाकर लड़कियों को ले जाया गया, जबकि खुद आईजी रेंज लक्ष्मी सिंह ने देर रात बातचीत के दौरान कहा था कि वह जो लिखकर देंगे, जो कहेंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
जुनैद, सुहेल के इशारे पर घर से निकली थीं दोनों बहनें
पुलिस के मुताबिक, जुनैद और सुहेल के इशारे पर बुधवार की दोपहर बाद दोनों बहनें घर से निकली थीं। ग्रामीणों के हवाले से यह भी दावा किया कि दोनों बहनें जुनैद और सुहेल से अक्सर मिलती थीं और बृहस्पतिवार को भी तय जगह पर मिलने गई थी।
पीड़ित परिजनों ने जहां मुख्य आरोपी छोटू को कठघरे में खड़ा किया और अगवा कर ले जाने का आरोप लगाया, वहीं पुलिस का दावा है कि छठा अभियुक्त छोटू घटनास्थल पर था ही नहीं। वह लड़कियों को आरोपियों से मिलवाने में साजिशकर्ता के तौर पर शामिल रहा है। हालांकि, परिजनों ने भी बेटियों को अगवा करने वालों की पहचान से इन्कार किया और उन्होंने घटनास्थल पर छोटू की मौजूदगी को नकारा।






