Sunday, August 31, 2025
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सनसनीखेज खुलासा: 50 हिंदुओं को मुसलमान बनाने का षड्यंत्र खुल गया,गरीबो को पता भी नही किस दस्तावेज पर दस्तखत कर दिए थे

देश में धर्मांतरण (Conversion) कराने वाले मौलाना मोहम्मद उमर गौतम (Mohammad Umar Gautam) को फिलीपींस (Philippines) से फंडिंग हो रही थी। उसने कुछ पैसा डायवर्ट कराने पर कानपुर में भी बैंक में डेड अकाउंट को एक्टिव कर इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। हालांकि, इस अकाउंट का वह प्रयोग नहीं कर पाया। इस अकाउंट से उसे कानपुर में पैसा मंगाना था, लेकिन इस्तेमाल एटीएम कार्ड के जरिए दिल्ली में ही किया जाता था।

एटीएस की जांच में खुलासा हुआ है कि फिलीपींस से विदेश फंड भारत में ट्रांसफर किया जा रहा था। यहां पर कई बैंक अकाउंट थे, जिनमें पैसा ट्रांसफर हो रहा था। अलग-अलग लोग इन अकाउंट्स का हिसाब रख रहे थे। दिल्ली और लखनऊ में अकाउंट होने के साथ ही उमर गौतम ने कानपुर में भी एक डेड पड़े अकाउंट को एक्टिव कराने की कोशिश की थी।

धर्मांतरण कराने वाला एक युवक अब दिल्ली में आईडीसी (इस्लामिक दावा सेंटर) के लिए काम कर रहा है। उसका एक अकाउंट 10-15 साल पहले शहर की एक सरकारी बैंक में एक्टिव था। यहां से पढ़ाई के सिलसिले में जाने के बाद युवक ने उस अकाउंट का प्रयोग नहीं किया, जिसकी वजह से खाता डेड हो गया था।

उमर गौतम को इस अकाउंट के बारे में जानकरी हुई तो साल 2019 में उसने इसे एक्टिव कराने की कोशिश शुरू की। यह अकाउंट एक्टिव भी हो गया, लेकिन उस खाते में किन्हीं कारणों से फंड को ट्रांसफर नहीं किया गया। इस अकाउंट के बारे में भी एटीएस ने जानकारी जुटा ली है और इसे भी जांच में शामिल कर लिया गया है। एटीएस इसमें अब तक के ट्रांजेक्शन का पता लगा रही है।

देशभर में धर्म परिवर्तन (Conversion) कराने वाले मौलाना मोहम्मद उमर गौतम (Mohammad Umar Gautam) और उसकी संस्था के कट्टरपंथी सदस्यों के निशाने पर कानपुर (Kanpur) भी था। ज्योति बधिर स्कूल के छात्रों के अलावा शहर के ही 50 से अधिकर गरीब और मजबूर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया गया था। अगर एटीएस आरोपियों को पकड़कर खुलासा न करती तो आरोपी इनका भी धर्मांतरण कराने में सफल हो जाते।

जांच एजेंसियां इन सभी लोगों से पूछताछ कर आरोपियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रही है। इन लोगों को गवान बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, उमर गौतम की कानपुर में गहरी पैठ रही है। उसके 8 साथियों के बारे में जांच एजेंसियों को पता चला है। इनके बारे में क्राइम ब्रांच भी जानकारी जुटाने में लगी है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ये सभी शहर के अलग-अलग इलाकों में घूम-घूमकर इस्लाम धर्म का प्रचार करते थे। जब इन्हें मजबूर व गरीब लोग मिलते तो उनको रोजगार दिलाकर शादी कराने का झांसा देते और उमर गौतम की संस्था इस्लामिक दावा सेंटर के बारे में बताते। ये लोग उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाते भी थे और धार्मिक सभाओं में भी ले जाते थे।

लेकिन इससे पहले कि इनके और मंसूबे कामयाब होते, यूपी एटीएस ने उमर गौतम के गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। अब जांच एजेंसी पता लगा रही हैं कि जिन्हे धर्मांतरण के लिए उकसाया गया, वे लोग कौन-कौन थे। कहीं इनमें से भी किसी ने धर्म परिवर्तन तो नहीं किया। हालांकि, अभी तक की जानकारी के अनुसार, ये सभी धर्मांतरण से बच गए हैं।

बता दें कि एटीएस खुलासा कर चुकी है कि उमर गौतम की संस्था को विदेश से फंडिंग होती थी। इसमें फिलीपींस से काफी पैसा भेजा गया है। कई साल पहले संस्था से जुड़े एक शख्स ने कानपुर में एक सरकारी बैंक में खाता खुलवाया था। काफी समय तक ये खाता डेड पड़ा था। उमर ने फंडिंग के लिए इस खाते को एक्टिव कराने की कोशिश की थी। एटीएम कार्ड का इस्तेमाल दिल्ली में हुआ था। जांच एजेंसियां इसे बारे में जानकारी इकट्ठा कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश में हाल ही ने धर्मांतरण मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इन पांचों ने ऐसे ऐसे खुलासे किए हैं, जिसको सुनकर प्रशासन भी भौचक्का रह गया है। दरअसल, ये लोग पूरे प्रोसेस के साथ लोगों का धर्म परिवर्तन कराते थे। धर्म परिवर्तन कराने का काम चार चरणों में होता था। इस संबंध में उमर गौतम, अब्दुल मन्नान और इरफान ख्वाजा के मोबाइल, लैपटॉप से भी अहम जानकारी मिली है। आइए आपको भी बताते हैं क्या थे इनके चार चरण।

पहला चरणः इस्लाम की तरफ लौटें ही
इस मिशन के तहत उस व्यक्ति को चुना जाता है, जो लोगों को धर्म परिवर्तन करने के लिए बरगला सके। उसको इस्लाम की अच्छाइयां उसकी भाषा में समझा सके। नोएडा की डेफ सोसाइटी के मूक बधिर बच्चों का धर्मांतरण कराने वाला टीचर इसी रिवर्ट बैक टू इस्लाम से जुड़ा था

दूसरा चरणः मुताक्की
यह धर्मांतरण का दूसरा चरण होता। इसमें इस्लाम पढ़ाने से पहले इस्लाम के प्रति अच्छी भावना पैदा की जाती है। इसमें इस मिशन में लगे व्यक्ति को ही कोड भाषा में मुतक्की कहा जाता था। यूपी एटीएस की गिरफ्त में आया बाल कल्याण मंत्रालय का पूर्व कर्मचारी और इंटरप्रेटर इरफान ख्वाजा और अब्दुल मन्नान इस मिशन मुतक्की की अहम कड़ी थे।

तीसरा चरणः अल्लाह के बंदे
इस्लाम के प्रति अच्छी भावना जिन लोगों में पैदा हो जाती है, उनको यूट्यूब के जरिए वीडियो भेजे जाते हैं। ताकि वीडियो देखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे धर्मांतरण के अभियान में लगे मौलाना और प्रभावी ढंग से उस धर्म परिवर्तन की राह में चल रहे नए व्यक्ति को प्रभावित करते हैं। जब यूट्यूब पर वीडियो देखने के बाद कोई व्यक्ति उस वीडियो को लाइक करता है तो अचानक से मैसेज बॉक्स में ‘अल्लाह के बंदे’ एक अनजान प्रोफाइल से लिख दिया जाता।

अल्लाह के बंदे शब्द उन लोगों के लिए संदेश होता जो व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए अच्छी नौकरी, पैसा, अच्छी जिंदगी, हर संभव मदद का वादा करते हैं और इसके बाद उस शख्स के पास अनजान नंबरों से फोन कॉल्स पहुंचने लगते हैं। बातचीत का सिलसिला शुरू हो जाता है। गुरुग्राम निवासी मन्नू यादव इसी तरह से अब्दुल मन्नान बना और कानपुर का आदित्य गुप्ता ने इसी के तहत धर्म परिवर्तन किया और वे इस्लाम के प्रति कट्टर होते चले गए।

चौथा चरण
यूपी एटीएस की पूछताछ और छानबीन में जिन शब्दों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ, उसमें एक शब्द था सलात। यूपी एटीएस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की तो पता चला कि ये कोड वर्ड है। जिसे नमाज की जगह इस्तेमाल किया जाता है। यूपी एटीएस को छानबीन में कई वीडियो और ऑडियो भी मिले हैं, जिसमें सलात शब्द का बहुत इस्तेमाल हुआ है। यूपी एटीएस ने करीब 100 से ज्यादा ऑडियो वीडियो खंगाले जिसमें इस शब्द का इस्तेमाल हुआ है। जिसका मतलब निकला कि पांचों वक्त की नमाज का कड़ाई से पालन हो, नमाज अदा की जाए। जब कोई सलात का कड़ाई से पालन करता है, तब जाकर उसका अंतिम चरण में इस्लामिक दावा सेंटर के जरिए धर्मांतरण करवा दिया जाता है।

सात कोड का करते थे इस्तेमाल

पूछताछ में अब ये बात सामने आई है कि सात कोडवर्ड के सहारे ही लोगों का धर्मांतरण किया जाता था। आरोपी मौलानाओं से पूछताछ में ATS ने धर्मांतरण के सिंडिकेट को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ATS ने बताया कि सिंडिकेट के लिए मूक बधिरों का साइन लैंग्वेज बड़ा हथियार था। ATS को 7 कोडवर्ड मिले जिसमें से 6 को डिकोड करके उसका मतलब पता कर लिया गया है।

एटीएस को अब तक की पूछताछ में एक शब्द का इस्तेमाल सबसे ज्यादा खटक रहा है। वह है कौम का कलंक। बातचीत के दौरान इस शब्द का इस्तेमाल किसके लिए किया गया है, यह अभी साफ नहीं हो सका है।यूपी एटीएस ने जिन 3 लोगों को सोमवार को गिरफ्तार किया है। उनमें से इंटरप्रेटर इरफान ख्वाजा और अब्दुल मन्नान को रिमांड पर लेकर इस कोड वर्ड को समझने की कोशिश की जाएगी।

अब तक पांच गिरफ्तार

बता दें कि हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने के मामले में अब तक 5 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। बीते 21 जून को मौलाना जहांगीर और मौलाना उमर गौतम को ATS ने लखनऊ से पकड़ा था। इसके बाद सोमवार को यूपी ATS ने महाराष्ट्र के बीड से इरफान, दिल्ली से राहुल भोला और गुरुग्राम से मन्नू यादव से दबोचा। मौलाना उमर गौतम और जहांगीर, इरफान खान के साथ मिलकर लालच देकर धर्मांतरण करवाते थे। मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान पुत्र राजीव यादव भी मूक बधिर है। इसने ही कानपुर के आदित्य गुप्ता का धर्मांतरण कराया था। मौलाना उमर गौतम असम के मरकज-उल-मारिफ नाम की संस्था के साथ काम कर रहा था। यह संगठन बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों के लिए काम करता है।

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