#प्रगति गोरी-चिट्टी-स्लिम-खूबसूरत 32 वर्षीया स्मार्ट महिला थी… अपने शरीर को खूब मेंटेन भी रखा था… 6 वर्ष और डेढ़ वर्ष की दो पुत्रियों को जन्म देने के बाद भी 26-27 साल से ज़्यादा उम्र की नहीं दिखती थी ! पति 38 वर्षीय ऋषिकांत सरकारी स्कूल में अध्यापक थे… उच्च शिक्षित थे… सब तरफ संतोष था… खुशी थी… मगर ऐसे में #शाहनवाज़ नामक लोकल टैक्सी ड्राइवर… परिवार पर काल बनकर खड़ा हो गया….
शाहनवाज़ की आंख प्रगति की खूबसूरती पर अटक कर रह गयी… प्रगति घर से निकलती तो शाहनवाज़ पीछा करता… प्रगति ने भी जल्दी ही शाहनवाज़ की इच्छाओं को समझ लिया ! पति का अक्सर उच्चशिक्षित और एलीट होना…. सतही चरित्र वाली महिलाओं में अलगाव का कारण बन जाता है ! शाहनवाज़ ने इस गड्ढे की गहराई को आसानी से नाप लिया ! प्रगति ने छूट दी… पति ऋषिकांत की अनुपस्थिति में शाहनवाज ने घर मे आना-जाना शुरू कर दिया !
जिहाद का पहला चरण पूरा हो गया… खूबसूरत हिन्दू महिला एक मोमिन के जाल में जा गिरी थी !..चर्चा ऋषिकांत तक पहुची… ऋषिकांत ने प्रगति और शाहनवाज़ के सामने इज़्ज़त और नैतिकता का वास्ता दिया… दुधमुंही बेटियों की कसम खिलाईं… मगर अनैतिक वासना ने ममता के ऊपर क्रूर विजय पाई… प्रगति … शाहनवाज़ के साथ दोनो बेटियों को छोड़कर #लापता हो गई…
दो दिन बाद अखबारों में कहानी छपी कि ऋषिकांत ने दोनों बेटियों को फांसी से लटका दिया … फिर डेढ़ और 6 वर्ष की मासूमों की लाशों की फांसी पर लटकती फोटो खींची … फोटो को अपनी चरित्रहीन भागी हुई पत्नी प्रगति के व्हाट्सअप पर डाला… और स्वयं भी फांसी लगा ली… कोई सुसाइड नोट नहीं प्राप्त हुआ…
निकम्मी मीडिया कूद कर इस नतीजे पर पहुँच गई कि ऋषिकांत ने अपनी बेटियों की फांसी पर लटका कर हत्या कर दी और खुद भी आत्महत्या कर ली…
आप खुद ही विचारिये कि.. यह बनावटी कहानी… शाहनवाज़ और पुलिस को कितनी रिलीफ देने वाली है ? शाहनवाज़ के लिए रास्ते के तीनों कांटे खत्म हो गए…. ऋषिकांत की पूरी संपत्ति पर प्रगति के माध्यम से कब्जा भी बेरोकटोक हो गया ! प्रगति के साथ निकाह का भी रास्ता साफ !! जब पुलिस ने यह स्थापित कर ही दिया कि सारी त्रासदी का कारण और अभियुक्त मृत ऋषिकांत है तो केस बंद करने का रास्ता साफ !… तफ्तीश की कोई ज़रूरत नहीं रही !! मगर किसी भी विवेकशील व्यक्ति के हिसाब से असली कहानी यह हो सकती है….
इसका मूल आधार शाहनवाज़ और प्रगति का फरार हो जाना है… संभवतः ऋषिकांत औऱ दोनो बच्चियों की हत्या अकेले या प्रगति के साथ मिलकर … शाहनवाज़ ने की है ! मर्डर के बाद शाहनवाज़ द्वारा #मृत_ऋषिकांत के #मोबाइल से दोनों मृत बच्चियों के फोटो खींचे गए… व्हाट्सएप्प के द्वारा प्रगति के मोबाइल पर डाले गए… (गौर कीजिए ऋषिकांत द्वारा हत्या करते हुए या रस्सी पर लटकाते हुए लाइव फोटो नहीं डाले गए हैं… बच्चियों की लाशें रस्सी पर लटकते हुए फोटो हैं) … बढ़िया कहानी तैयार हुई !
ऋषिकांत खुद भी यदि आत्महत्या करता तो व्हाट्सअप पर लाइव सुसाईड नोट.. डाल सकता था या किसी कागज़ पर सुसाइड नोट लिख कर रख सकता था !.. मगर उसने ऐसा नहीं किया… क्यों ? मरने से पहले ऋषिकांत…शाहनवाज़ और प्रगति को तीनों हत्याओं के लिए दोषी ठहराता… मगर ऋषिकांत ने ऐसा नहीं किया… क्यों ?
100 % संभावना है कि तीनों व्यक्तियों का हत्यारा शाहनवाज़ हो और प्रगति की लिप्तता हो !! पुलिस ने जो रिपोर्ट दर्ज की है उसमें लापता शाहनवाज़ और बदचलन प्रगति पर आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा लगाई गई हैं !! असली ट्विस्ट यह है कि पुलिस ने अब शाहनवाज़ पर अब हत्या की धारा भी लगाई है !!
एक हिन्दू परिवार लव जिहाद की बलिबेदी पर खत्म हो चुका है… देश मे ऐसी हज़ारों कहानियां ऐसे ही अंजामों की तरफ बढ़ रही होंगी ! सोने का अभिनय करने वाले को कौन जगा पाया है ?
एक प्रश्न है आप सभी सम्मानित भाइयो बहनों माताओं से— कि यदि प्रगति मेरी आपकी बहू बहन बेटी होती तो क्या तब भी शाहनवाज को आप और मैं क्षमा कर देते?? या
ऋषिकांत आपका मेरा भाई बेटा दामाद होता तो क्या शाहनवाज को क्षमा कर देते हम सभी???
एक और अंतिम प्रश्न
जिस समाज का पौरुष स्त्रियों के अपमान का बदला शत्रु की गर्दन धरा पर गिराकर लेता हो उस समाज का इतना कायर होना क्या आप सभी को कचोटता नही है।
मुझे तो शर्म आ रही है खुद पर क्या आपको भी ऐसा ही महसूस हो रहा है???
✒️गौरव कर्णवाल






