Sunday, March 29, 2026
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इटली की नई सरकार बनने वाली,दहशत में मुसलमान कट्टरपंथी, जिहादियों और मुसलमान शरणार्थियों के सख्त खिलाफ

रविवार को इटली में आम चुनाव के लिए मतदान शुरू है। इस चुनाव पर यूरोपियन यूनियन (ईयू) का दारोमदार टिका हुआ है। जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली पोस्ट-फासिस्ट विचारधारा वाली ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी के गठबंधन को इस चुनाव में स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस धुर दक्षिणपंथी गठबंधन में मेतियो साल्विनी के नेतृत्व वाली पार्टी- द लीग और सिल्वियो बर्लुस्कोनी के नेतृत्व वाली फोर्जा इतालिया भी शामिल हैं। इस चुनाव में इस गठबंधन को 50 फीसदी से ज्यादा सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

यूरोपीय संघ छोड़ सकती हैं मेलोनी

यूरोपीय संघ छोड़ सकती हैं मेलोनी

जॉर्जिया मेलोनी उग्र राष्ट्रवादी और यूरोपीय एकता के उलट विचार रखने वाली नेत्री मानी जाती हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि अगर मेलोनी इटली की प्रधानमंत्री बनती हैं, तो हैं तो वह यूरोपीय संघ को छोड़ सकती हैं। मेलोनी यूरोपीय संघ को शरणार्थी समस्या का कारण मानती हैं। अपने चुनावी कैंपेन में उन्होंने कहा था- मुस्लिम देशों में गृहयुद्ध में त्रस्त महिलाओं और बच्चों की तस्वीरें दिखाई जाती हैं। लेकिन हमारे देश में ये अनाथ बच्चे और विधवा महिलाएं नहीं, बल्कि पुरुष शरणार्थी बनकर आते हैं, और तमाम तरह के अपराधों में लिप्त रहते हैं। मैं इन पुरुषों को शरणार्थी नहीं मानती।

मुस्लिम शरणार्थियों को मानती हैं खतरा

मुस्लिम शरणार्थियों को मानती हैं खतरा

प्रमुख मध्यमार्गी दल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एनरिको लेत्ता ने ब्रिटिश अखबार द फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा कि मेलोनी के शासनकाल में यूरोप का भविष्य कम मजबूत और कम सुरक्षित हो जाएगा। उनका नजरिया यूरोप समर्थक नहीं है। उनका नजरिया यूरोप समर्थक नहीं है। मेलोनी यूरोपीय संघ पर इटली की नस्ल बदलने का भी आरोप लगाती हैं। मेलोनी ने कहा कि शरणार्थी खासकर मुस्लिम शरणार्थी देश के लिए खतरा साबित होते हैं। इससे पहले हुए एक पोल में जॉर्जिया मेलोनी का वोट शेयर 25 फीसदी से बढ़कर 46 फीसदी हो गया था। ऐसे में यह लगभग तय है कि इटली में एक बार फिर से दक्षिणपंथी पार्टी का राज कायम होने जा रहा है।

दक्षिणपंथी सरकार बनी तो बदलेगी इटली की नीति

दक्षिणपंथी सरकार बनी तो बदलेगी इटली की नीति

अभी तक इटली यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन का मजबूती से समर्थन करता रहा है। लेकिन अगली सरकार के तहत ऐसा रहेगा, इसे लेकर शक है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि यदि यह गठबंधन चुनाव जीतता है तो संभव है कि ये रूस के प्रति मैत्री का भाव रखें। पारंपरिक रूप से मास्को का रोम से बेहतर संबंध रहा है। हालांकि चुनाव अभियान के दौरान मेलोनी ने यूक्रेन को सैनिक मदद देने की नीति जारी रखने का वादा किया है। उन्होंने रूस पर लगे प्रतिबंधों का भी समर्थन किया है।

पुतिन केकट्टर समर्थक हैं साल्विनी

पुतिन केकट्टर समर्थक हैं साल्विनी

लेकिन मेलोनी के सहयोगी दल के दोनों नेता रूस के कट्टर समर्थन हैं। इटली का चार बार नेतृत्व करने वाले प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी का रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मित्रवत व्यवहार रहा है। अभी तक उन्होंने भी पुतिन की आलोचना नहीं की है। जबकि द लीग पार्टी के साल्विनी ने खुले तौर पर कहा कहा कि रूस पर लगे प्रतिबंधों से पुतिन और उसके लोगों को नहीं हम और हमारे लोगो को फर्क पड़ रहा है। हम सभी इसकी कीमत चुका रहे हैं। साल्विनी तो पुतिन के चेहरे वाली टीशर्ट तक पहन चुके हैं।

  • इटली में पॉलिटिकल क्राइसिस

    इटली में पॉलिटिकल क्राइसिस

    जॉर्जिया मेलोनी की ब्रदर्स ऑफ इटली पार्टी महज दस साल पहले ही बनी है मगर ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस चुनाव में यह सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। इसके अलाव इटली में फोर्जा इतालिया, डेमोक्रेटिक पार्टी, इटालियन कम्युनिस्ट पार्टी, टूगेदर फॉर द फ्यूचर, द लीग, फाइव स्टार मूवमेंट जैसी कुछ बड़ी पार्टियां हैं। इटली में राजनीतिक संकट एक बड़ा मुद्दा रहा है। छोटे दल सत्ता के लालच में एकजुट हो जाते हैं। इनकी सरकार कुछ महीने या सालभर चलती है, फिर गिर जाती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 में जब इटली को गणतंत्र घोषित किया गया, उसके बाद से 29 विभिन्न नेताओं के नेतृत्व में 67 सरकारें रही हैं।1946 से 1994 के बीच 60 सरकारें गिरीं। पॉलिटिकल ब्लैकमेलिंग से बचने के लिए 1994 में यहां संसद की सीटें 600 से घटाकर 400 कर दी गईं। सीनेट में भी अब 315 के बजाए सिर्फ 200 मेंबर्स ही रह गए हैं।

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