Thursday, February 12, 2026
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इंदिरा गांधी को क्यों बाहर निकाला था,शांति निकेतन से,गुरुवर रवीन्द्र नाथ टैगोर ने

फ्रेंक के ‘फ्रेंच” योग से लेकर धीरेंद्र के योगासन तक।
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अभी एपिस्टन_फ़ाइल के किस्से हर किसी की जुबान पर हैं। जो निर्लज्जता एपिस्टन फ़ाइल के माध्यम से पता चल रही है उसे देखकर सहसा यकीन नहीं होता कि इतनी घिनौनी मानसिकता का कोई शख्स अमेरिका का राष्ट्रपति, बिल गेट्स के शिखर तक भी पहुँच सकता है।

खैर कुछ भी हो पर कांग्रेसियों का मोदी जी को एपिस्टन फ़ाइल से जोड़ना बेहद आपत्तिजनक है एक तरह से यह राष्ट्र के प्रति अपराध है कोई मोदी जी की नीतियों का घोर विरोधी हो सकता है किंतु उनको चरित्रहीन कहना मानसिक दिवालियापन से अधिक कुछ नहीं।

अब जब चरित्र की बात हो ही रही है तो कांग्रेसियों की नाक इंदिरा गांधी की फाइल की भी थोड़ी स्टडी कर ही लेते हैं…

हाँ तो इंदिरा अर्थात प्रियदर्शिनी।
गुरुदेव रवींद्रनाथ_टैगोर की प्रियदर्शिनी उस समय इंदिरा, गांधी नहीं हुआ करती थी कदाचित लाज के मारे नेहरू टाइटल लेने से मना कर दिया था इंदिरा ने,

बात तब की है जब इंदिरा 15-16 साल की कामिनी हुआ करती थी पिता नेहरू ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के शांतिनिकेतन में पढ़ाई करने के लिए इंदिरा को भेजा

शांति निकेतन में पढने गईं तो षोडशी इंदिरा फ्रेंच पढ़ाने वाले जर्मन शिक्षक फ्रेंक के प्यार के आगोश में अपना दिल दे बैठी। अब फ्रेंक इंदिरा को कौन सा ‘फ्रेंच’ सिखाने लगे ये तो इंदिरा जाने या दिलफेंक फ्रेंक जाने पर इंदिरा की ‘फ्रेंच’ वाले प्यार की हरकतों से तंग आकर रवींद्रनाथ टैगोर ने इंदिरा को शांतिनिकेतन से निकाल दिया।

तो यहाँ से शुरुआत हुआ कांग्रेसियों की नाक इंद्रापिस्टन की फ़ाइल का सफरनामा।

फ्रेंक से फ्रेंच-फ्रेंच सीखने के बाद मार्च 1942 में इंदिरा की शादी फिरोज़ घांडी से हो गई पर चंचल इंदिरा को फिरोज़ कुछ जमे नहीं और कुछ दिनों बाद ही पापा नेहरू के निजी सचिव मथाई के साथ गुटरगूँ गुटरगूँ करने लगी बेचारा फिरोज़ दूसरे कमरे में कसम साता रहता था।

मथाई खुद बताते हैं कि उनके और इंदिरा के बीच से क्सुअल रिलेशन थे उन्होंने इंदिरा के स्तनों की चर्चा की और यह भी कहा कि इंदिरा बिस्तर पर बहुत अच्छी थी उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा सेक्स के मामले में केरल और फ्रेंच का मिश्रण थी। फिर से ‘फ्रेंच’😜। मथाई ने तो यहाँ तक कहा कि एक बार तो इंदिरा गांधी प्रेग्नेंट भी हो गई थी और उन्होंने एक जाने-माने प्रसिद्ध डॉक्टर से अबॉर्शन भी करवाया। खैर ये सब मैं नहीं कह रहा ये तो मथाई खुद स्वीकार किये हैं।

पानी सिर के ऊपर बहने लगा तो नेहरू ने 1959 में मथाई को अपने निजी सचिव से हटा दिया और भारी चेतावनी देकर लिमिट में रहने का हुक्म सुनाया तो 12 साल तक गुटरगूँ के इस खेल का अंत हुआ। पर अंत मथाई के साथ के खेल का हुआ था। पर आग बदस्तूर भभक रही थी।

कुछ दिनों के अकेलेपन के बाद भारतीय विदेश सेवा के अफसर और राजदूत मोहम्मद_यूनुस_खान के संग इंदिरा गांधी के चर्चे सत्ता के गलियारों से लेकर प्रेस क्लब की चर्चाओं में आम हो चले।
मोहम्मद यूनुस साहब गांधी परिवार के अभिन्न अंग जैसे हो गए…उतने जितने कि कभी फिरोज़ भी नहीं थे। कहते हैं कि मोहम्मद यूनुस के कुपुत्र आदिल_शहरयार और संजय गांधी की शक्ल लगभग एक जैसी थी ( कुपुत्र इसलिए कि आतं*क वाद के जुर्म में अमेरिका की जेल में सड़ रहा था…वो तो भला हो यूनियन कार्बाइड केस का कि एंडरसन के बदले राजीव गांधी आदिल शहरयार को अमेरिका के चंगुल से छुड़वा लाए थे)।

अभी यूनुस सर के साथ इलू इलू चल ही रहा था कि योगासन सिखाने के लिए धीरेंद्र ब्रह्मचारी की इंदिरा की लाइफ में एंट्री होती है और जीवन के अंतिम समय तक धीरेंद्र के ने ब्रह्मचर्य के वे वे योग विभिन्न आसन की मुद्राओं में इंदिरा जी को सिखाए कि योग और आसन मिलकर योगासन कहने लगा,

तो हे कांग्रेसियों मोदी जी को एपिस्टन फ़ाइल से जोड़ने से पहले अपनी दादी की इंद्रापिस्टन पढ़ लो, शायद थोड़ी लज़्ज़ा आ जाए। बताए गए सारे वाक्य किताबों और इतिहासकारों द्वारा बताए गए है जिनको कहा तो काल्पनिक जा सकता है लेकिन यह उनके द्वारा बताई गई घटना है जो उस समय इस परिवार के साथ सम्मिलित थे

पोस्ट साभार फोटो सोर्स इंटरनेट

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